यूपी की जीत अब सीएम योगी को जरूरी तौर पर आगे बढ़ाएगी, जिससे वे न केवल एक मुख्यमंत्री के रूप में बल्कि एक वरिष्ठ बीजेपी नेता के रूप में भी महत्त्वपूर्ण मामलों में अपनी बात रख पाएंगे.
ज़मीनी स्तर पर बहुत से लोग परगट सिंह से असंतुष्ट नज़र आए लेकिन फिर भी चुनाव क्षेत्र का सुनियोजित विकास करने के उनके वादे को देखते हुए, लोगों ने अपनी आस्था एक अनुभवी राजनेता में रखी.
2017 के विधान सभा चुनावों में, बीजेपी ने पीलीभीत की सभी पांच विधान सभा सीटें एक बड़े अंतर से जीत लीं थीं. सुल्तानपुर में उसने पांच में से चार सीटें जीतीं थीं, और सिर्फ इसौली सीट उसने अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी (एसपी) के हाथों गंवा दी थी.
एआईएमआईएम ने 97 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उनके भाषणों को लोगों की ‘तारीफ’ तो खूब मिली लेकिन यह वोटों में तब्दील नहीं हुई और मुसलमानों ने सपा पर ही भरोसा जताया.
2017 के पिछले विधान सभा चुनावों में, बीजेपी ने यहां से 51 सीटें जीतीं थी, जबकि 2012 में उसे 11 सीटें मिली थीं. 2017 में एसपी ने पश्चिम यूपी से 15 सीटें जीतीं थीं, जबकि कांग्रेस को दो, और आरएलडी तथा बीएसपी को एक- एक सीट मिली थीं.
दिलचस्प है कि पंजाब में वर्तमान मुख्यमंत्री के साथ पहले के भी सभी मुख्यमंत्री अपनी सीट नहीं बचा पाए हैं. चन्नी के अलावा कैप्टन अमरिंदर सिंह पटियाला शहरी क्षेत्र, सुखबीर बादल जलालाबाद से चुनाव हार गए हैं.
बीजेपी गुरुवार को जारी चुनाव परिणाम में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. बीजेपी ने इससे पहले कहा था कि चुनाव परिणाम आने के बाद उम्मीदवार मुख्यमंत्री के नाम का फैसला किया जाएगा.
पंजाब की सत्ता हासिल करने के बाद आम आदमी पार्टी- जो 2015 से दिल्ली में सत्तासीन है- अब एकमात्र ऐसी गैर-कांग्रेसी, गैर-भाजपा पार्टी बन गई है जिसकी एक से ज्यादा राज्यों में सरकार होगी.
पंच का अपने प्लश टॉय से लगाव उसके देश से नहीं, बल्कि उससे मिलने वाले आराम से है. इसी तरह, ग्राहक जियोपॉलिटिकल लेबल से ज्यादा भरोसे और डिजाइन को प्राथमिकता देते हैं.