Sunday, 3 July, 2022
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उमा भारती ने BJP आलाकमान को दिया संकेत- ‘महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए शराब की बोतलों पर पत्थर फेंके’

तेज़-तर्रार नेता की निगाहें राज्य और लोकसभा चुनावों पर हैं, जो अगले दो सालों में होने हैं. लेकिन माना जा रहा है कि लंबे समय तक राजनीति से अवकाश के बाद, उमा भारती को अब अपने पैर जमाने में दिक़्क़त हो रही है.

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नई दिल्ली: मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने रविवार को खलबली मचा दी, जब उन्होंने भोपाल के आज़ाद नगर इलाक़े में, शराब की एक दुकान में रखी बोतलों पर एक ईंट फेंक मार दी. बीजेपी नेताओं का कहना है कि उनके इस क़दम से, ‘प्रदेश की सियासत में हाशिए पर कर दिए जाने की, उनकी हताशा का आभास होता है’.

सोमवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखे एक पत्र में, अपनी इस हरकत का कारण समझाते हुए उन्होंने कहा कि उनका मक़सद महिलाओं के ‘सम्मान’ की रक्षा करना था और वो उन्हें राज्य में शराब बंदी लागू करने की याद दिलाना चाहतीं थीं.

उन्होंने हिंदी में लिखा, ‘शहर के बारखेड़ा पठानी इलाक़े की महिलाओ के अनुरोध पर, मैं उनसे मिलने गई थी. उन्होंने मुझे बताया कि एक शराब की दुकान के पास मज़दूरों की एक कॉलोनी है, जिसमें स्कूल और मंदिर मौजूद हैं. पिछले तीन वर्षों से ये महिलाएं इस दुकान को बंद कराने के लिए आंदोलन कर रही हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.’

भारती ने अपने पत्र में समझाया, ‘प्रशासन ने उन्हें कई बार आश्वासन दिए थे, लेकिन कुछ नहीं हुआ, इसलिए मैंने उन्हें आश्वस्त किया कि मैं इस मुद्दे को उठाउंगी. आंख में आंसू भरे हुए कुछ महिलाओं ने मुझे बताया कि कुछ पुरुष तो शराब पीने के बाद, दुकान के पीछे खुले में ही पेशाब कर देते हैं. कॉलोनी में रहने वाली महिलाओं और लड़कियों के लिए ये बहुत शर्म की बात है’.

फिर उन्होंने लिखा, ‘मैंने दुकान के पास खड़े लोगों को दूर हट जाने के लिए कहा. फिर मैंने एक पत्थर उठाया और शराब की बोतलों को नुक़सान पहुंचाने के लिए, उसे पूरी ताक़त से फेंक कर मारा.’ भारती ने प्रशासन से एक हफ्ते के भीतर दुकान बंद कराने के लिए कहा है.

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पूर्व केंद्रीय मंत्री लंबे समय से एमपी में शराब बंदी के लिए आंदोलन कर रही हैं. सूत्रों के अनुसार वो जानती हैं कि ये एक ऐसा मुद्दा है, जिसकी गूंज महिला मतदाताओं तक पहुंचेगी, और इसकी सहायता से वो चौहान को घेरकर, सूबे की राजनीति में वापसी कर सकती हैं.

मध्यप्रदेश बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने दिप्रिंट से कहा, ‘उन्होंने घोषणा की है कि वो 2024 के लोकसभा चुनाव लड़ना चाहेंगी. उन्हें टिकट देने का निर्णय आलाकमान का होगा.’

दिप्रिंट से बात करते हुए भारती ने कहा कि स्कूलों, कॉलेजों, और मंदिरों के पास शराब की दुकानों पर कड़ा प्रतिबंध लागू करना राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी है. उन्होंने आगे कहा, ‘मेरा काम जागरूकता पैदा करना है, जो मैं कर रही हूं’.


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भारती का शराब-विरोधी अभियान

भारती ने 2018 में ऐलान किया था कि वो तान साल के लिए चुनावी राजनीति से अवकाश ले रही हैं.

अवकाश के अंत की ओर आते हुए, ज़ाहिरी तौर पर सूबे की राजनीति में घुसने में संघर्ष कर रहीं भारती ने जनवरी 2021 में शराब बंदी का मुद्दा उठाया था, जिससे कुछ समय पहले ही एमपी के मुरैना ज़िले में, अवैध शराब पीने से कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई थी.

उसी महीने उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से एक सार्वजनिक अपील करके, बीजेपी-शासित राज्यों में शराब पर पाबंदी लगाने की मांग की. उन्होंने गुजरात और बिहार के उदाहरण दिए. माना जाता है कि बिहार में 2016 में लगाई गई शराब बंदी की वजह से, महिलाओं ने सीएम नीतीश कुमार के समर्थन में वोट दिए.

भारती ने उसी साल 8 मार्च को ये भी ऐलान किया कि वो शराब के खिलाफ एक आंदोलन छेड़ेंगी, लेकिन फिर कोविड लहर का हवाला देते हुए, उन्होंने उसपर अमल नहीं किया. लेकिन, सूत्रों का कहना है कि उनकी पुकार को ज़्यादा समर्थन नहीं मिला, और उनके सलाहकारों ने उनसे कहा कि वो समय आंदोलन के लिए परिपक्व नहीं था.

पिछले छह महीनों में, भारती ने अपना अभियान तेज़ कर दिया है और सितंबर 2021 में उन्होंने शराब बंदी लागू करने के लिए, सीएम चौहान को जनवरी 2022 तक की मोहलत दे दी.

उन्होंने चौहान को चेतावनी दी कि अगर बैन को लागू नहीं किया गया, तो वो ‘लाठी लेकर सड़कों पर उतर आएंगी’. उन्होंने ये भी ऐलान किया कि वो शराब की दुकानों के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगी.

पिछले सप्ताह बृहस्पतिवार को उन्होंने सीएम से मिलकर मांग उठाई, कि सरकार को ऐसी शराब की दुकानों को तुरंत बंद कर देना चाहिए, जो नियमों को तोड़ते हुए प्रतिबंधित क्षेत्रों में चल रही हैं. सरकारी नियमों के अनुसार, स्कूलों और उपासना स्थलों के निकट शराब की दुकानों की अनुमति नहीं है.

पिछले सप्ताह, भोपाल में तारावाली मंदिर भी गईं, जिसके पास एक शराब की दुकान मौजूद है और उन्होंने लोगों से पूछा कि क्या उसे खुले रहना चाहिए. उन्होंने पत्रकारों को बताया कि वो राज्य का दौरा करेंगी और देखेंगी कि प्रतिबंधित क्षेत्रों में कितनी दुकानें चल रही हैं.

सोमवार को चौहान को लिखे अपने पत्र में भारती ने कहा कि डेढ़ साल पहले, मेरी आपसे तथा प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बीडी शर्मा के साथ, शराब के खिलाफ एक आंदोलन शुरू करने के विषय पर बातचीत हुई थी, जो काफी सकारात्मक थी’.

उन्होंने कहा, ‘आपका सुझाव था कि एक जागरूकता अभियान शुरू किया जाए, जिसमें राज्य सरकार शराब बंदी के लिए एक सामाजिक आंदोलन का समर्थन करेगी. अब लोग पहल कर रहे हैं, और शराब बंदी लागू करने के लिए सरकार को उनका समर्थन करना चाहिए’.

BJP नेतृत्व को संदेश

भारती शराबबंदी पर ऐसे समय ज़ोर दे रही हैं, जब एमपी में अगले साल चुनाव होने जा रहे हैं.

अपने अवकाश के बाद से, जो उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले घोषित किया था, भारती को कथित रूप अपने राज्य और बीजेपी में, हाशिए पर ढकेला जाता रहा है, जबकि वो 2024 के लोकसभा चुनाव लड़ने जा रही हैं.

तेज़-तर्रार नेता भारती क़रीब 20 वर्ष की उम्र से बीजेपी के साथ जुड़ी रही हैं, और ख़ुद को राम जन्मभूमि आंदोलन के साथ जोड़कर, उन्होंने पार्टी में अपनी स्थिति मज़बूत कर ली.

पहली मोदी सरकार में वो जल संसाधन मंत्री थीं, और 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले, उन्हें बीजेपी का एक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था. लेकिन 2020 में उन्हें पद से हटा दिया गया. इस साल पांच राज्यों में हुए चुनावों में, वो पार्टी के प्रचार अभियानों में नज़र नहीं आईं.

एक बीजेपी नेता ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में, मध्य प्रदेश की राजनीति में ‘काफी कुछ बदल गया है’.

नेता ने कहा, ‘(नागरिक उड्डयन मंत्री) ज्योतिरादित्य सिंधिया अब सत्ता का नया केंद्र हैं और दूसरे दावेदारों को दूर रखने के लिए, शिवराज सिंह चौहान ने उनके साथ अच्छे रिश्ते बना लिए हैं.’ उन्होंने आगे कहा, ‘शिवराज-सिंधिया कैमिस्ट्री के कारण, (केंद्रीय गृह मंत्री) अमित शाह के अपने लोगों- कैलाश विजयवर्गीय और नरोत्तम मिश्रा को, (सीएम के चुनाव के समय) कुर्सी तक नहीं मिली थी’.

उन्होंने आगे कहा, ‘दिल्ली में उमा भारती के अमित शाह के साथ ऐसे रिश्ते बिल्कुल नहीं हैं, और इसकी संभावना बहुत कम है, कि उन्हें प्रदेश की राजनीति में जगह मिलेगी.’

पहले हवाला दिए गए प्रदेश बीजेपी नेता ने भी समझाया, कि ‘सत्ता का एक और केंद्र पैदा न हो जाए’, इस डर से भारती को हाशिए पर रखने की ज़रूरत है.

नेता ने कहा, ‘पिछली बार, वो (उत्तर प्रदेश के) झांसी से जीतीं थीं. उनके लिए ये एक विकल्प हो सकता है, लेकिन सत्ता का एक और केंद्र पैदा हो जाने के डर से, (सीएम) योगी आदित्यनाथ उन्हें वहा से खड़ा करने में झिझकेंगे’. उन्होंने आगे कहा, ‘वो भोपाल या खजुराहो से चुनाव लड़ना चाहती हैं जहां से उन्होंने पहले लड़ा था, लेकिन शिवराज इस बात को पसंद नहीं करेंगे’.

दूसरे बीजेपी सूत्रों ने कहा, कि पिछले साल भी भारती को राज्यसभा टिकट मिलने की उम्मीद थी, जो जुलाई में थावर चंद गहलोत के इस्तीफा देने से ख़ाली हुई थी, लेकिन बीजेपी आलाकमान ने उसे एल मुरुगन को देने का फैसला किया, जिन्हें राज्य मंत्री के तौर पर केंद्र सरकार में शामिल किया गया था.

एक सूत्र ने कहा, ‘इसके अलावा, उन्हें राज्यसभा सीट देना सही विकल्प नहीं था, क्योंकि वो एक जन नेता हैं’.

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