शुक्रवार को शामिल किए गए 9 मंत्रियों में से तीन पहली बार विधायक बने. कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में कैबिनेट विस्तार में 6 ओबीसी चेहरे, 3 एसटी, 1 एससी और 2 सामान्य वर्ग के मंत्री हैं.
बठिंडा में नवजोत सिद्धू की रैली ने प्रताप सिंह बाजवा के साथ विवाद को जन्म दिया है, जिन्होंने उन्हें 2022 के चुनावों में पार्टी की हार के लिए दोषी ठहराया है और उन्हें AAP के खिलाफ आधिकारिक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कहा है.
आदिवासी सीएम के बाद बस्तर से सामान्य वर्ग के विधायक किरण सिंह देव को बीजेपी की राज्य इकाई का अध्यक्ष बनाया गया है. इसे बीजेपी द्वारा सभी वर्गों में संतुलन बनाने के रूप में देखा जा रहा है.
नौ नामों में बृजमोहन अग्रवाल, राम विचार नेताम, दयालदास बघेल, केदार कश्यप, लखनलाल देवांगन, श्याम बिहारी जायसवाल, ओपी चौधरी, टंकराम वर्मा और लक्ष्मी राजवाड़े शामिल हैं.
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि हम जनता को दिखाना चाहते हैं कि यदि वे इस तरह से संसद चलाएंगे और विपक्ष की बात नहीं सुनेंगे तो वे लोकतंत्र को बर्बाद कर रहे हैं.
आरएसएस के सुनील आंबेकर की टिप्पणी एक अन्य पदाधिकारी द्वारा जाति जनगणना का विरोध करने के एक दिन बाद आई है. कांग्रेस का दावा है कि आरएसएस और बीजेपी जनगणना से 'दलितों, पिछड़े वर्गों को समान अधिकार' देने से डरते हैं.
संसद भवन स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई इस मुलाकात के दौरान कुमारस्वामी के भतीजे और जेडी (एस) के हासन से सांसद प्रज्वल रेवन्ना सहित पार्टी के कुछ अन्य नेता मौजूद थे.
भाजपा किसान मोर्चा प्रमुख ने राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ की नकल करने के लिए टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी की आलोचना की और राहुल गांधी द्वारा इसकी वीडियो बनाए जाने पर 'ओबीसी का अपमान' करने का आरोप लगाया.