वाम नेताओं का कहना है कि प्रवासी संकट और बेरोज़ागारी जैसे मुद्दों की वजह से, वो बिहार के पिछले चुनावों के मुक़ाबले, इस बार अपनी स्थिति में काफी सुधार कर पाए हैं.
आयोग ने कहा कि राज्य के 55 केंद्रों पर वोटों की गिनती चल रही है. कई सीटों पर 19 से लेकर 50 से ज्यादा राउंड तक की भी गिनती हो सकती है इसलिए नतीजे आने में देरी हो सकती है.
पुष्पम प्रिया ने कई हिंदी और अंग्रेजी अखबारों में पूरे पेज के विज्ञापनों के माध्यम से राजनीति में प्रवेश करने का ऐलान किया था, जिसमें कहा गया था, ‘बिहार बेहतर का हकदार है, और बेहतर संभव है.’
कांग्रेस के उस्मानी को मैदान में उतारने के फैसले का बीजेपी और उसके अपने पार्टी सदस्यों ने विरोध किया था, चूंकि बहुत से लोग उन्हें ‘जिन्ना समर्थक’ कहते हैं.
विधानसभा चुनाव में विपक्ष का अभियान पूरी तरह से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव पर केंद्रित रहा जबकि भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को केंद्र में रखकर नीतीश पर ही भरोसा जताया.
अवामी लीग को अभी इस सवाल का जवाब नहीं चाहिए कि हसीना के बाद कौन होगा या यह बहस कि हसीना को बांग्लादेश लौटना चाहिए या नहीं, बल्कि ज़मीन पर नया नेतृत्व चाहिए.