Monday, 24 January, 2022
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मुजफ्फरपुर आश्रय गृह मामले में इस्तीफा देने वाली JDU की मंजू वर्मा 40 हजार से ज्यादा वोटों से हारी

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार मंजु वर्मा 40,897 मतों से हारी हैं.

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नई दिल्ली: बिहार सरकार की पूर्व मंत्री जदयू की मंजू वर्मा, जिन्हें मुजफ्फरपुर आश्रय गृह बलात्कार मामले में इस्तीफा देना पड़ा था राजद के पूर्व सांसद राजवंशी महतो से बेगूसराय की चेरिया बरियारपुर सीट पर हार गईं हैं.

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार मंजु वर्मा 40,897 मतों से हारी हैं.

वह 2010 और 2015 में एक ही सीट से दो बार निर्वाचित हुई थीं, जिसमें उनकी जाति – कुशवाहा बड़ी तादाद में है. बिहार की पूर्व समाज कल्याण मंत्री वर्मा को मुजफ्फरपुर आश्रय गृह यौन शोषण मामले के बाद अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था – जिसमें 34 लड़कियों का कथित रूप से शोषण किया गया गया था. यह मामला 2018 में सामने आया था.

मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा कथित तौर पर आश्रय गृह के लगातार आगंतुक थे, जिन्हें उनके विभाग द्वारा वित्त पोषित किया गया था और इसे ब्रजेश ठाकुर द्वारा चलाया जा रहा था. सीबीआई ने मामले की जांच की और दिल्ली की एक अदालत ने इस साल फरवरी में दोषी ठहराया लेकिन मंजू और उसके पति को आरोप पत्र में उल्लेख नहीं किया गया.


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हालांकि, मंजू वर्मा ने छह महीने की जेल की सजा काट ली है, लेकिन मुजफ्फरपुर आश्रय गृह मामले के लिए नहीं बल्कि इसलिए कि बिहार सरकार द्वारा गठित एक एसआईटी ने चेरिया बरियारपुर में उनके घर पर 50 गोलियां पायी थीं. मंजू और चंद्रशेखर दोनों पर आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था.

‘जेडी(यू), नीतीश ने मुझे समर्थन नहीं किया’

उस समय, मंजू ने शिकायत की थी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी – जनता दल (यूनाइटेड) ने उनके द्वारा किए गए अपराध के लिए उनका समर्थन नहीं किया था. उन्होंने मुजफ्फरपुर आश्रय गृह मामले में अपने पति का बचाव भी किया था.

उन्होंने कहा, ‘मुझे घोटाले को उजागर करने के लिए श्रेय दिया जाना चाहिए था. उन्होंने कहा, ‘विभाग के एक मंत्री के रूप में, मैंने आश्रय गृहों के सामाजिक अंकेक्षण का आदेश दिया और रिपोर्ट ने घोटाले को उजागर किया. मैंने व्यक्तिगत रूप से एक बार आश्रय गृह का दौरा किया और उस समय सब कुछ ठीक लग रहा था.’

मंजू को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया था, वह 2019 में जमानत मिलने के बाद गायब हो गई थी. वह दोबारा तब आयीं जब नीतीश कुमार विधानसभा चुनाव के लिए संभावित उम्मीदवारों के साथ बैठक कर रहे थे.

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