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Tuesday, 3 March, 2026
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मोदी सिर्फ जम्मू-कश्मीर में ‘दिल जीतने’ नहीं गए थे, यह दुनिया के लिए एक संकेत भी था

पीएम मोदी ने चुनावों का ज़िक्र नहीं किया, लेकिन उन्होंने बड़े पैमाने पर मुस्लिम समुदाय तक पहुंच बनाई और हज़रतबल परियोजना के उद्घाटन के जरिए विश्व को एक संकेत भेजा.

बीजेपी तमिलनाडु में गुजरात या यूपी मॉडल से लोगों को लुभा नहीं सकती, द्रविड़ मॉडल सफल है

दरअसल बीजेपी जब तमिलनाडु में जमीन तलाशने की कोशिश करती है, तो उसके पास अपना बना कोई ऐसा मॉडल नहीं है जो द्रविड़ विचारधारा पर चलने वाले तमिलनाडु से ज्यादा चमकदार हो.

बीजेपी की रणनीति पर गौर कीजिए, 2024 नहीं बल्कि 2029 की तैयारी कर रही है

‘माइलेज’ वाले नेता मानते हैं कि वे उम्र आदि की सीमाओं से ऊपर हैं, मसलन शी जिनपिंग, बाइडन, ट्रंप, एर्दोगन या पुतिन को ही देख लीजिए. तो फिर मोदी 75 की उम्र के बाद भी प्रधानमंत्री क्यों नहीं बने रह सकते?

यूपी से कश्मीर तक — PM मोदी पसमांदा मुसलमानों को ऐसे संबोधित कर रहे हैं, जैसा पहले कभी नहीं हुआ

एक पसमांदा मुस्लिम महिला के रूप में एक राजनीतिक दल द्वारा एक महत्वपूर्ण वोटिंग ब्लॉक के रूप में संबोधित किए जाने के गहरे मायने हैं.

आपातकाल की विरासत? 1977-1989 के लोकसभा चुनावों ने भारत के राजनीतिक परिदृश्य को कैसे बदला

कांग्रेस की पहली बार हार से लेकर टीडीपी के भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी बनने तक, 1977 से 1989 तक के लोकसभा चुनाव कई आश्चर्य लेकर आए.

यदि पार्टियां जजों को राजनीतिक व्यवस्था में शामिल कर लेंगी तो भारतीय लोकतंत्र का आखिरी किला भी ढह जाएगा

हम ऐसे युग में रहते हैं जब पूरा देश विधायी और कार्यकारी शाखाओं पर नियंत्रण रखने के लिए न्यायपालिका की ओर देखता है. क्या हमें राजनीतिक दलों को न्यायाधीशों को अपने पक्ष में करने की अनुमति देनी चाहिए?

तीसरी और पांचवीं लोकसभा चुनाव के बीच भारतीय लोकतंत्र कैसे बदला?

1971 के लोकसभा चुनाव का तीखा विश्लेषण करते हुए अमेरिकी राजनीतिक वैज्ञानिक मायरोन वेनर ने लिखा कि यह राष्ट्रीय मुद्दों पर लड़ा गया पहला चुनाव था.

भारत में लोकसभा चुनाव कराने की रणनीति कितनी चौंका देने वाली है? पहली से 18 तारीख तक

96 करोड़ से अधिक मतदाता, जिनमें से 47 करोड़ महिलाएं हैं, जल्द ही 28 राज्यों और नौ केंद्र शासित प्रदेशों में 15 लाख अधिकारियों की देखरेख में 12 लाख बूथों पर बहु-चरणीय चुनाव में अपने मतपत्र डालकर 543 लोकसभा सांसदों का चुनाव करेंगे.

मोदी सरकार में संस्थानों का दुरुपयोग इंदिरा गांधी के 1971 के अधिनियम को मामूली अपराध जैसा बनाता है

मोदी-शैली की राजनीति में ईडी, राज्यपाल, रिटर्निंग अधिकारी, संक्षेप में राज्य के लगभग सभी संस्थानों को राजनीतिक विरोधियों के लिए जीवन को असंभव बनाने के लिए सेवा में लगाया जाता है.

बीते कल के हथियारों से आगामी युद्ध न लड़ें, सेनाएं करें भावी जंग की तैयारी

एक सर्वोत्तम प्लेटफॉर्म के लिए सब कुछ हासिल करने के चक्कर में सिफर ही हमारे हाथ आ सकता है. सर्वश्रेष्ठ जो है वह अच्छे का दुश्मन होता है.

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नयी दिल्ली, दो मार्च (भाषा) अहमदाबाद के एक निजी स्कूल के छात्रों ने एआई-आधारित त्वचा स्वास्थ्य जागरूकता ऐप विकसित किया है, जिसने चर्म रोग...

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