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Thursday, 5 February, 2026
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भारत को कमतर करके देखना बंद करे चीन, इसके अपने स्कॉलर दिल्ली को ‘मजबूत’ कहते हैं

चीन सिर्फ भारत के इरादों को गलत नहीं समझ रहा है; यह ऐतिहासिक रूप से मैत्रीपूर्ण रिश्ते को शत्रुतापूर्ण रिश्ते में बदलकर एक रणनीतिक गलती कर रहा है, जिससे मौजूदा विश्वास की खाई और गहरी हो रही है.

भारतीय मुसलमानों को ‘मुस्लिम’ नेता की नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्ति की ज़रूरत जो धर्म के लेबल से ऊपर उठे

यह धारणा कि समुदायों का प्रतिनिधित्व उनकी धार्मिक पृष्ठभूमि के नेताओं द्वारा किया जाना चाहिए, संविधान का खंडन करती है.

दक्षिण भारत हिंदी पट्टी से कम धार्मिक नहीं है, प्यू सर्वे ने उत्तर-दक्षिण विभाजन को खत्म कर दिया

प्यू के 2020-2021 सर्वे के अनुसार, रीति-रिवाजों में अंतर है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के संदर्भ में उत्तर-दक्षिण विभाजन का कोई सबूत नहीं है.

मुसलमानों को अपना कोई राम मोहन राय या आंबेडकर चाहिए, ‘हिंदू वामपंथी’ और लिबरल नेताओं को छोड़ें

अब तक मुसलमानों ने कभी भी हिंदुओं और उनके धर्म को समझने की कोशिश नहीं की. मुस्लिम शासकों को भारतीय जनता, संस्कृति, धर्म और इतिहास के प्रति कोई जिज्ञासा नहीं थी

ब्रेड, कुकीज़, शराब इन्फ्लेमेशन पैदा करते हैं, सिर्फ स्किन की देखभाल से पुरानी बीमारियों का इलाज संभव नहीं

क्रोनिक इन्फ्लेमेशन विभिन्न त्वचा संबंधी समस्याओं को जन्म देता है, जिनमें समय से पहले बुढ़ापा, मुंहासे, पिगमेंटेशन और सोरायसिस, एक्जिमा और एक्ने वुल्गारिस जैसी ऑटोइम्यून बीमारियां शामिल हैं.

भारतीय मुसलमानों को बांटने वाले नहीं बल्कि वास्तविक नेताओं की जरूरत, पसमांदा इसके बेहतर विकल्प हो सकते हैं

अशरफ़ नेता पसमांदा मुसलमानों की चिंताओं के प्रति उदासीन नज़र आते हैं. इसके बजाय, वे चुनावी लाभ के लिए इस हाशिए पर मौजूद वर्ग का शोषण करते हैं, और उन्हें लगातार पीड़ित होने के नैरेटिव में फंसा देते हैं.

न लोकतंत्र खत्म हुआ है, न संविधान को बदला जा रहा है; विपक्ष को इतिहास से सीखकर धैर्य से काम लेना होगा

इंदिरा गांधी ने जिन्हें इमरजेंसी में जेलों में कैद किया था उनके वारिस भारत के बुनियादी वैचारिक आधारों की आज नयी परिभाषा गढ़ रहे हैं, उन्हें उसी तरह परास्त किया जा सकता है जैसे 1970 के दशक में इंदिरा को किया गया था.

राम मंदिर हकीकत है, कांग्रेस और पश्चिमी मीडिया को तालमेल बिठाने में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए

अयोध्या में राम मंदिर केवल एक ईंट और गारे की संरचना नहीं है; यह हिंदू गौरव का पुनरुत्थान है जिसे सदियों पहले लुटेरों की एक भीड़ ने चोट पहुंचाई थी।

गणतंत्र मर चुका है और BJP-RSS को जिम्मेदार ठहराने का मतलब नहीं, हमें नई राजनीतिक भाषा की जरूरत है

भारत में अब एक नया संविधान है जिसमें हर लक्ष्मण रेखा बहुसंख्यक समुदाय खींचता है और जिसे सरकार का कोई भी अंग पार नहीं कर सकता है.

राम अखंड भारत के प्रतीक हैं या हिंदू विजय के? जवाब नए भारत को आकार देगा

गांधी, आडवाणी और अब मोदी- इन सभी ने राम के नाम पर लोगों को लामबंद किया. तो, भारत के उदारवादी कब से राम के संदर्भ देने से शर्मिंदा महसूस करने लगे?

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बाराबंकी (उप्र), पांच फरवरी (भाषा) जिले के हैदरगढ़ थाना क्षेत्र में मशहूर अवसानेश्वर महादेव शिव मंदिर से अज्ञात चोरों ने चांदी के गहने, नकदी...

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