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Monday, 30 March, 2026
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NTA को परीक्षाओं को ‘मुन्ना भाईयों’ से बचाना था, अब यह समस्या का हिस्सा बन गया है

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का चार्टर प्रवेश और भर्ती के लिए ‘उम्मीदवारों की योग्यता’ का आकलन करना है, लेकिन NEET और UGC-NET की आग ने इसकी खुद की योग्यता को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है.

हमारे बारह को लेकर गुस्सा दिखाता है कि मुसलमानों की हल्की आलोचना को भी इस्लामोफोबिया समझा जाता है

बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि हमारे बारह में कोई मुस्लिम विरोधी कंटेंट नहीं है और इसका उद्देश्य महिलाओं का उत्थान करना है.

नागरिक सत्ता और सेना के रिश्ते को सुधारें, एनएसएस लाएं, सीडीएस का बोझ कम करें

सीडीएस पर कई जिम्मेदारियों का बोझ सलाहकार के रूप में उनकी भूमिका को प्रभावित कर सकता है, सरकार इस मसले को सुलझाए.

मोहन भागवत वही कर रहे हैं जिससे मोदी इनकार कर रहे हैं — आत्मनिरीक्षण, लेकिन मूर्ख मत बनिए

बीजेपी और आरएसएस एक दूसरे से परस्पर लाभकारी रिश्ते से जुड़े हैं. भागवत की टिप्पणियां कमज़ोर मोदी से ज़्यादा शक्ति प्राप्त करने की एक चाल मात्र हैं.

‘NEET’ को लेकर तिल का ताड़ मत खड़ा कीजिए, NTA की साख खराब करने की कोशिश की जा रही है

न कोई सबूत है, और न कोई संकेत तक है कि ‘सवाल हल करने वाले गिरोहों’ या ‘चीटिंग माफिया’ के साथ एनटीए की कोई साठगांठ है. राजनीतिक दलों के सार्वजनिक बयान ‘नीट’ के पक्ष या विपक्ष में तर्क के बिंदु नहीं बन सकते

लोकसभा चुनाव में लोकतंत्र का ‘लोक’ राहुल गांधी के साथ, तो पूरा ‘तंत्र’ नरेंद्र मोदी के साथ रहा

2024 के चुनाव में अगर सबसे बड़ा राजनीतिक व्यक्तित्व किसी का निर्मित हुआ है तो वे राहुल गांधी हैं. उन्होंने अपने को साधारण जनता का नेता और मोदी को कॉरपोरेट शक्तियों का नेता साबित किया. यही वो पक्ष है जिसके कारण हार की जीत और जीत की हार का मुहावरा दोहराया जा रहा है.

अग्निपथ योजना पर फिर से विचार करने, सुधार करने या नए तरीके से लागू करने का यही मौका है

मौजूदा राजनीतिक हालात ने सेना और सरकार को इस मसले पर फिर से विचार करने का मौका दिया है. कोई स्वच्छंद निर्णय न किया जाए, और किसी क्रमिक फेरबदल से बात नहीं बनेगी

संघ की नसीहत BJP को रास्ता दिखाने जैसी है, पार्टी के नेतृत्व में बदलाव न ही RSS की मंशा है और न ही ताकत

संघ-भाजपा के रिश्ते का इतिहास प्रेमियों के बीच होने वाली नोक-झोंक से भरा पड़ा है, लेकिन इस सबसे  शायद ही कोई बड़ा फर्क पड़ा है. यह सोचना कि संघ भाजपा नेतृत्व में कोई परिवर्तन लाएगा, उसकी मंशा और ताकत का गलत आकलन ही होगा

मोदी अगले कुछ महीने यह दिखाने में बिताएंगे कि वे काम करने वाले व्यक्ति हैं और नियंत्रण में भी हैं

अगर मोदी वाजपेयी शैली का एनडीए गठबंधन चलाना चाहते हैं, तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं है. अगर वे तथाकथित मोदी क्रांति की ओर लौटना चाहते हैं, तो गठबंधन मौजूदा शांति से कहीं ज़्यादा मुश्किल में है.

वित्त मंत्री का पहला काम बजट बनाना और तय करना कि घाटा कम करें या रोज़गार बढ़ाएं

जीएसटी कंपन्सेशन सेस को खत्म करने से उत्पादों तथा सेवाओं पर कुल जीएसटी में कमी लाई जा सकती है और मांग को मजबूती दी जा सकती है.

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चंडीगढ़, 29 मार्च (भाषा) पंजाब के लुधियाना जिले में रविवार शाम को दो अज्ञात लोगों ने कुल्हाड़ी से हमला करके एक स्थानीय कांग्रेस नेता...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

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