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Monday, 2 March, 2026
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मिडिल-ईस्ट संकट पर चीन चुप है, तुष्टीकरण के लिए अब इसे एक नया दोस्त मिल गया है

बीजिंग की रणनीति में इज़राइल के साथ सीधे टकराव को दरकिनार करते हुए क्षेत्रीय साझेदारों के साथ अपने तालमेल को संतुलित करना शामिल है.

ईरान-इज़रायल भू-राजनीति की अनदेखी करके जंग लड़ने का मनमर्जी फैसला नहीं कर सकते

दोनों पक्षों के इस रुख का कारण शायद वैश्विक भू-राजनीतिक नक्शे में पश्चिम एशिया की रणनीतिक स्थिति के राजनीतिक तथा सामरिक संदर्भ में छिपा है.

राजीव चन्द्रशेखर आधुनिक हैं, उदारवादी हैं, लेकिन दुखद रूप से भाजपा के धर्मांध वफादार हैं

तिरुवनंतपुरम में राजीव चंद्रशेखर का मुकाबला शशि थरूर से है. वे खुद को एक ऐसे राज्य के लिए प्रचारित कर रहे हैं जिसने परंपरागत रूप से भाजपा के प्रति घृणा दिखाई है.

यह 6 राज्य तय करेंगे, BJP अबकी बार 400 पार करेगी कि विपक्ष उसे 272 का आंकड़ा भी नहीं छूने देगा

इस बार हमारे राजनीतिक भूगोल के बड़े हिस्से में चुनावी मुक़ाबले का नतीजा भले साफ नजर आ रहा हो, मगर कुछ हिस्से में यह मुक़ाबला 2019 के मुक़ाबले से भी ज्यादा तीखा है

‘मोदी के जादू की मियाद पूरी हो गई’ यह मानने वाले भी कहते हैं कि ‘आयेगा तो मोदी ही’

मोदी की मौजूदगी बाकी तमाम मुद्दों को एक किनारे सरका कर लोगों के दिमाग पर छा जाने के मामले में अब नाकाफी है. साधारण राजनीति वापिस आ रही है और लंबे वक्त से दबे चले आ रहे मुद्दे अब सिर उठा रहे हैं.

एलके झा से पीएन हक्सर और पीके मिश्रा तक — PMO कैसे बना भारत का पावर हब

यह विडंबना है कि पीएमओ, जिस पर अक्सर भारत को वास्तविक राष्ट्रपति शासन प्रणाली देने का आरोप लगाया जाता है, का निर्माण सबसे अधिक सलाहकार प्रधानमंत्रियों में से एक, लाल बहादुर शास्त्री ने करवाया था.

आरक्षण खत्म होने के डर को दूर करने के लिए मोदी और शाह कैसे कर रहे हैं BJP की अगुवाई

मेरठ से उम्मीदवार अरुण गोविल ने संविधान में ‘परिवर्तन’ पर अपनी टिप्पणियों के लिए विपक्ष को उकसाया है. ऐसा करने पर वे लल्लू सिंह, अनंतकुमार हेगड़े और ज्योति मिर्धा की सूची में शामिल हो गए.

‘मटन, मुगल, मुस्लिम’, मोदी के लिए विपक्ष गैर-हिंदू और भारत विरोधी क्यों हैं

मोदी अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को मांस-मछली खाने वाले आधे-मुसलमानों की तरह पेश करना पसंद करते हैं जो ‘मुस्लिम’ घोषणा पत्र जारी करते हैं, मुसलमानों को खुश करते हैं और उनसे भारत का प्रतिनिधित्व करने की उम्मीद नहीं की जा सकती.

‘घुस के मारेंगे’ का ऐलान पड़ोसियों के लिए एक चेतावनी है, ‘हॉट पर्सूट’ को तो वैधता हासिल है ही

राजनीतिक नेतृत्व और फौजी कमांडर को ऐसी कार्रवाई की योजना बनाने और स्थानीय कमांडरों को छूट देने के मामले में सावधानी और संयम बरतना ज़रूरी है ताकि वह मान्य अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुरूप हो.

BJP का ‘अब की बार 400 पार’ का नारा कोई नया विचार नहीं है, यह 73 साल पहले की एक राजनीतिक प्रतिज्ञा है

'अब की बार 400 पार' की उत्पत्ति जवाहरलाल नेहरू और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बीच हुई तीखी बहस से हो सकती है, जब श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने नेहरू को चेतावनी दी थी कि वह उनकी 'कुचलने वाली मानसिकता' को कुचल देंगे.

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जयपुर, दो मार्च (भाषा) किशोरावस्था में कान के संक्रमण ने जब सुनने की शक्ति छीन ली तो विजयेश कुमार पंड्या के लिए घर और...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.