हम ऐसे युग में रहते हैं जब पूरा देश विधायी और कार्यकारी शाखाओं पर नियंत्रण रखने के लिए न्यायपालिका की ओर देखता है. क्या हमें राजनीतिक दलों को न्यायाधीशों को अपने पक्ष में करने की अनुमति देनी चाहिए?
96 करोड़ से अधिक मतदाता, जिनमें से 47 करोड़ महिलाएं हैं, जल्द ही 28 राज्यों और नौ केंद्र शासित प्रदेशों में 15 लाख अधिकारियों की देखरेख में 12 लाख बूथों पर बहु-चरणीय चुनाव में अपने मतपत्र डालकर 543 लोकसभा सांसदों का चुनाव करेंगे.
मोदी-शैली की राजनीति में ईडी, राज्यपाल, रिटर्निंग अधिकारी, संक्षेप में राज्य के लगभग सभी संस्थानों को राजनीतिक विरोधियों के लिए जीवन को असंभव बनाने के लिए सेवा में लगाया जाता है.
भारत में भले ही आदर्श लोकतंत्र कभी नहीं रहा लेकिन अभी चीजें इस हद तक रसातल को पहुंच गई हैं कि भारत को न्यूनतम अर्थों में भी लोकतंत्र नहीं कहा जा सकता.प्रतिस्पर्धी अधिनायकवाद बेहतर नाम है.
भारतीय राजनीति इतनी आकर्षक नहीं होती अगर इसकी राहें टेढ़ी-मेढ़ी न होतीं, इसकी खासियत यही है कि साफ-सपाट सी दिखने वाली किसी बात का भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं होता, किसी भी स्थिति को लेकर दावे के साथ नहीं कहा जा सकता-बेशक इसका कारण यही होगा.
ईडी अधिकारियों पर हमले के बाद संदेशखाली से शेख शाहजहां के भागने से टीएमसी बनाम बीजेपी युद्ध छिड़ गया. अब लगभग दो महीने बाद उनकी गिरफ्तारी ने हिरासत की लड़ाई शुरू कर दी है.
औपनिवेशिक खुफिया तंत्र क्रांतिकारियों को व्यक्ति के रूप में नहीं बल्कि खतरे के रूप में दर्ज करता था. ऐसा करके उसने कई ज़िंदगियों को इतिहास से निष्कासित कर दिया.