scorecardresearch
Saturday, 28 March, 2026
होममत-विमत

मत-विमत

मोदी-शाह असम में उन लपटों से खेल रहे हैं जो हिंदू-मुसलमान में फर्क नहीं करती

भाजपा के लिए 2019 में असम एक मुख्य मुद्दा बनकर उभरने वाला है। लेकिन यह ज़हरीली आग हिंदुओं को भी नहीं बख़्शेगी

नेहरू सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्री, वाजपेयी आर्थिक असफलता और राव सबसे ख़राब

नेहरू संग्रहालय में किसी और प्रधानमंत्री को शामिल करना, देश की रूह से खिलवाड़ है

रविशंकर प्रसाद फेक न्यूज़ पर कसना चाहते हैं लगाम पर भाजपा आईटी सेल पर नहीं

अगर मोदी सरकार नकली खबरों को लेकर सच में गंभीर थी तो उसे अपने आईटी सेल्स और पार्टी के नेताओं समेत सभी मोर्चों पर कोई शून्य सहिष्णुता अपनानी चाहिए थी

प्रियंका गाँधी बचा सकती हैं कांग्रेस, लेकिन फिर भैया राहुल का क्या होगा?

प्रियंका राहुल से कहीं बेहतर तरीके से मोदी-शाह को टक्कर देने की काबिलियत रखती थी

चिंता का विषय: मिलिट्री सेवा में भारत के 1 प्रतिशत सांसद भी न दे पाए योगदान

भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक सेना है, लेकिन मतदाता सूची में पूर्व सैनिकों और उनके परिवार की कुल 0.6 प्रतिशत ही भागीदारी है

एक नए और अदृश्य तरीके से बँट रहे हैं भारत के हिन्दू-मुसलमान

एक सामंजस्यपूर्ण समाज की कल्पना करना कैसे संभव है अगर दो समुदायों के लोग आपस में प्यार-मोहब्बत नहीं करते या शादी नहीं करते?

क्या मायने रखती है मोदी द्वारा इमरान खान को की गई फोन कॉल?

फोटो अवसर के लिए इस्लामाबाद के सार्क शिखर सम्मेलन में इमरान खान के बगल में खड़े नरेंद्र मोदीका दृश्य किसी राजनयिक तख्तापलट से कम नहीं होंगे

असम एनआरसी गड़बड़झाले के लिए सुप्रीम कोर्ट पूरी तरह ज़िम्मेदार

भाजपा में शामिल वरिष्ठ राजनेता लगातार इस तथ्य का जिक्र करते हैं कि एनआरसी के नवीनीकरण के कार्य की निगरानी शीर्ष न्यायालय द्वारा की जा रही है

चन्द्रगुप्त मौर्य पर की गयी टिप्पणी से नाराज़ जाति समूह, फूंक रहे हैं राजनाथ सिंह के पुतले

ऐसा तो बिल्कुल भी नहीं है कि किसी को चौथी शताब्दी (ई.पू) के शासक की जाति मालूम न हो

मोदी नहीं पर कोई भी सही: दुश्मनों को भी गले लगाने को तैयार हैं अब राहुल गांधी

दुश्मन के सबसे अच्छे दोस्त को रिझाना दर्शाता है कि राजनीतिक नियम दोबारा लिखे जा रहे हैं, जिसका एकमात्र उद्देश्य है: मोदी के अलावा कोई भी

मत-विमत

खाड़ी युद्ध ने भारत की कमजोरियां उजागर कीं, अब राष्ट्रीय हित में आत्ममंथन का वक्त है

सरकार कड़वा सच क्यों नहीं बोल सकती, इसे समझना बहुत आसान है. तमाम युद्धों की तरह यह युद्ध भी जब रुक जाएगा तब भी भारत के हित विजेता के साथ भी जुड़े होंगे और हारने वालों के साथ भी.

वीडियो

राजनीति

देश

पर्यावरण न्याय सुनिश्चित करने में न्यायालयों को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए: न्यायमूर्ति नागरत्ना

रांची, 28 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश बी. वी. नागरत्ना ने शनिवार को कहा कि अदालतों को पर्यावरणीय न्याय में सक्रिय भूमिका निभानी...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.