मोदी के चौथी औद्योगिक क्रांति में भारत के योगदान संबंधी दावे को उनकी आदतन अतिशयोक्तियों में गिन सकते हैं. लेकिन इसकी संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए.
जिन घटनाओं पर विवाद हुए और जनता में गुस्सा भड़का, मोदी ने उनपर चुप्पी साध ली, लेकिन वे उन मुद्दों पर ज़रूर बोलते हैं जो लोगों के दिमाग को उत्तेजित करें.
यह समझने के लिए कि 1971 को भारत की संसदीय सीटों का आधार क्यों बनाया गया, 1960 के दशक के उस माल्थसवादी डर को फिर से देखना होगा, जो विकास से जुड़ी सोच पर हावी था.