scorecardresearch
Wednesday, 21 January, 2026
होममत-विमत

मत-विमत

बीजेपी का जातीय अंकगणित अपने विरोधाभासों का शिकार बन रहा है

मोदी ने गरीब बनाम अमीर के ध्रुवीकरण पर ज़ोर दिया, और अपने भाषणों में वे ‘मित्रों’ की जगह ‘गरीबों’ के संबोधन का इस्तेमाल करने लगे.

सवर्ण आरक्षण लाकर इतिहास में नाम दर्ज करा गए नरेंद्र मोदी

अपने इस एक कदम से नरेंद्र मोदी ने अपने तमाम विरोधियों को चित करने की कोशिश की है. क्या वे सफल होंगे?

सवर्ण आरक्षण: सपा-बसपा ने ये क्या कर डाला?

सपा और बसपा ने इस संविधान और लोकतंत्र विरोधी कार्य में सरकार का साथ क्यों दिया? क्या ये दोनों पार्टियां ये सोचती हैं कि सवर्ण अब कांग्रेस और बीजेपी को छोड़कर सपा और बसपा को वोट डालेंगे?

नागरिकता (संशोधन) विधेयक के ज़रिये भाजपा जिन्ना की राह पर चल पड़ी है

नागरिकता (संशोधन) विधेयक भारत की नागरिकता का आधार धर्म को बनाना चाहता है. जबकि संविधान कहता है कि धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जायेगा.

लोकलुभावन नीतियां नहीं कृषि को चाहिए सुधार और बाज़ार

किसान नेता शरद जोशी ने कहा था कि कृषि के साथ कोई समस्या नहीं है. सरकार किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि सरकार स्वयं समस्या है.

सवर्ण आरक्षण बहाना है, संवैधानिक आरक्षण को मिटाना है!

सवर्ण जातियों को आर्थिक आधार पर केन्द्र सरकार द्वारा दिया जा रहा 10 प्रतिशत आरक्षण क्या संवैधानिक आरक्षण को खत्म करने की दिशा में बढ़ाया गया पहला कदम है?

बच्चों को फेल करने के बजाय शिक्षा का अधिकार नीति को पूरी तरह लागू करना ज़्यादा ज़रूरी क्यों?

संसद ने शिक्षा का अधिकार कानून, 2009 (संशोधन) को पास करके नो डिटेंशन पॉलिसी को खत्म कर दिया है, जिसके तहत आठवी तक बच्चों को फेल नहीं किया जाता था.

मधु लिमये: संसदीय राजनीति और समाजवाद का बड़ा पहरुआ

भारत की समाजवादी राजनीति के प्रतिनिधि नेता मधु लिमये ने चार दशक तक देश की राजनीति को कई तरीकों से प्रभावित किया. वे प्रखर वक्ता और सिद्धांतकार थे.

क्या आरक्षण दोबारा सवर्णों में बीजेपी के लिए जगायेगा उत्साह

पिछले तीन दशक में बीजेपी के उभार और एक बड़ी पार्टी बनने में सवर्ण, खासकर ब्राह्मण, बनिया और राजपूतों का बड़ा योगदान रहा है.

भाजपा का 10% सवर्ण आरक्षण वोटबैंक की राजनीति, लेकिन राह में हैं कानूनी अड़चनें

केंद्रीय कैबिनेट द्वारा पास किए गए इस वोट बटोरने वाले प्रस्ताव को लागू करने के लिए सरकार को बहुत ही शातिर राजनीतिक चालें चलनी होंगी.

मत-विमत

मौनी अमावस्या और पीएम मोदी—भारत की सोची-समझी चुप्पी के क्या मायने हैं

वैश्विक शोर-शराबे के माहौल में भारत का प्रतीकात्मक ‘मौनव्रत’ कूटनीति का सबसे प्रभावी साधन है. यह नई दिल्ली की रणनीतिक अस्पष्टता को बनाए रखता है.

वीडियो

राजनीति

देश

वांगचुक जेल बैरकों में सुधार के लिए प्रयोग के वास्ते थर्मामीटर चाहते हैं : पत्नी गीतांजलि अंगमो

नयी दिल्ली, 21 जनवरी (भाषा) जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जेल बैरकों को बेहतर बनाने के लिए पर्यावरण के अनुकूल वास्तुकला पर कुछ प्रयोग...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.