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Saturday, 7 March, 2026
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मत-विमत

केवल आदिवासी ही इस बात को समझते हैं कि प्राकृतिक जंगल उगाये नहीं जा सकते

भारत में 10 करोड़ से ज्यादा आदिवासी हैं, जो ब्रिटेन या जर्मनी की आबादी से ज्यादा हैं. देश में जंगल सिर्फ वहीं बचे हैं, जहां आदिवासी रहते हैं. जंगल में रहने के उनके अधिकार की रक्षा होनी चाहिए.

जातीय सम्मेलन: हाशिए पर पड़ी जातियों की गगनचुंबी अपेक्षाएं

जातीय सम्मेलनों में प्रायः ऐसे नेता होते हैं जो चुनाव लड़ने के लिए टिकटों के इंतज़ाम में लगे होते हैं और भारी भीड़ जमा कर अपनी ताकत राजनीतिक पार्टियों को दिखाते हैं.

अगर सही राजनीतिक फैसला न किया तो डूब जाएंगी अनुप्रिया पटेल

अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल की छवि एक ऐसे नेता ही है, जिन्होंने केंद्र सरकार में मंत्री रहते हुए भी सामाजिक न्याय के मुद्दे पर सरकार के गलत कामों की खिंचाई करने में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी.

विदेशी कंपनियां भारतीय उद्यमियों की जगह ले रही है, जोकि धूल फांक रहे हैं

सुज़ुकी का आधे कार बाज़ार पर कब्ज़ा है, चीनियों का मोबाइल फोन क्षेत्र पर और कोरियाइयों का उपभोक्ता सामान सेक्टर पर. और एतिहाद शायद जेट को उड़ाने लगे. विदेशी खिलाड़ियों के बिना भला हम कहां रहेंगे?

समानता और स्वच्छता के पहले प्रतीक गांधी नहीं, संत गाडगे हैं!

गांधी का स्वच्छता अभियान एक राजनीतिक मुहिम थी, जिसका उद्देश्य दलितों को कांग्रेस से जोड़ना था. इसके उलट संत गाडगे बाबा के लिए यह जीवन पद्धति थी.

बदला लेने से ज़्यादा ज़रूरी है दुश्मन के दिलो-दिमाग में खौफ़ पैदा करना

सवाल यह है कि बदले के बाद क्या? क्या इससे हमेशा के लिए अमन और सुरक्षा पक्की हो जाएगी, या यह सिर्फ एक सुर्खी, एक आयोजन बनकर रह जाएगा?

मी लार्ड! हमें भी चाहिए ऐसी सज़ा, आपको दुआ देंगे: देश के किसान

उद्योगपति अनिल अंबानी व एरिक्सन मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर कर्ज़मंद किसानों ने गुहार लगानी शुरू कर दी है कि उन्हें भी ऐसी सजा से नवाज़ा जाय.

मुलायम के दांव से बीएसपी का निकल सकता है दम

मुलायम सिंह जो कर रहे हैं, उससे सपा और बसपा की चुनावी संभावनाओं पर बुरा असर पड़ सकता है. इसका ज्यादा नुकसान बीएसपी को होगा, क्योंकि सपा में फैली उलझन के कारण सपा का वोट बीएसपी को ट्रांसफर नहीं हो पाएगा.

दो का पहाड़ा पढ़ने में व्यस्त सरकार आत्मबोधानंद से बात नहीं करना चाहती

आत्मबोधानंद उन्हीं चार मांगों पर अनशन कर रहे हैं जिन पर अडिग जीडी अग्रवाल ने शहादत दे दी थी, पर सरकार केवल सफल कुंभ के आयोजन व नमामि गंगे के प्रचार से काम चला रही है. उसने अभी तक उनसे बात भी नहीं की है.

गठबंधन जरूरी है, मज़बूत सरकारों ने लोकतांत्रिक संस्थानों को ज्यादा आघात पहुंचाया है

1977 के बाद देश के तमाम राज्यों में क्षेत्रिय दलों का तेज़ी से उभार शुरू हो गया. इन दलों ने उन क्षेत्रिय मुद्दों और समस्याओं के आधार पर जनप्रचार कर जनाधार बनाना शुरू कर दिया.

मत-विमत

ईरान का संघर्ष भारत तक पहुंचा, मुसलमानों से फिर देशभक्ति साबित करने की मांग

जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.

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राजनीति

देश

केंद्र ने अपनी विदेश नीति अमेरिका के पास गिरवी रख दी है: कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे

कलबुर्गी, सात मार्च (भाषा) कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खरगे ने शनिवार को केंद्र सरकार की विदेश नीति की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.