संभव है, बालाकोट हवाई हमले के बाद भी बारंबार होने वाले आतंकवादी हमले ना रुकें, लेकिन भारत ने कथानक को बदलने और यह दिखाने का विकल्प चुना कि वायुशक्ति से क्या कुछ संभव है.
सीवर में जान जाने का खतरा बॉर्डर से कम नहीं. देश के लिए सफाई का काम जरूरी भी है, वरना हर साल लाखों लोग बीमारी से मर जाएंगे. मोदी को सफाईकर्मियों के पैर धोने की जगह, उन्हें सम्मानजनक जिंदगी का हक देना चाहिए.
कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल कोशिश में हैं कि सरकार के पौने पांच साल के कामकाज को मसला बनाया जाए. वहीं मोदी ने सैन्य कार्रवाई और सैनिकों के मारे जाने से देश में उपजे गुस्से को मसला बना लिया है.
बात इमरान खान के हाथ में है- वे चाहें तो सीमा पर कायम तनाव के माहौल को जारी रखें और भारत में होने जा रहे आम चुनाव की थाली नरेन्द्र मोदी के हाथ में थमा दें.
अवध के किसी भी जिले के किसी भी हज्जाम के सैलून में चले जाइये, आपको वहां चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू जैसे नायकों की तस्वीरें लगी मिल जायेंगी.
पीएम नरेंद्र मोदी की देश में फैली किसी हिंसा या मामले में देरी से बोलना एक सुविचारित रणनीति का एक हिस्सा है, जो ऊना और अख़लाक़ मामलों में भी देखा गया..
अफगानिस्तान, कैमरून, म्यांमार और सूडान का सिलेक्शन सवाल खड़ा करता है. खासकर तब जब इस समय ब्रिटेन में शरण मांगने वालों में पाकिस्तानियों की संख्या सबसे ज्यादा में से एक है.