कन्हैया कुमार भूमिहार जाति के हैं, जिनकी बनारस में अच्छी संख्या है. वहां कभी कम्युनिस्टों का भी असर था. अपनी भाषण कला से कन्हैया बीजेपी की नाक में दम कर सकते हैं
बाबा साहेब का उद्देश्य दलितों में उनके मानव अधिकारों के लिए जारूकता पैदा करना था. उन्होंने यह निश्चय किया कि हमारा अछूत समाज इस तालाब से पानी पीकर रहेगा.
मान्यवर कांशीराम ने बामसेफ और बीएसपी ऐसे समय में बनाई जब वंचित जातियों का लोकतंत्र से मोहभंग हो रहा था. रिजर्व सीटों से चुने गए जनप्रतिनिधि बेकार साबित हुए थे. तब उन्होंने वंचित जातियों को शासक बनने का सपना दिखाया.
प्रियंका का कोई दूरदर्शी सलाहकार होता तो उन्हें कानपुर से वाराणसी की यात्रा करने की सलाह देता. इस बहाने वे गंगा सफाई के दावों की सच्चाईयों से रूबरू हो जातीं.
ऐसा लगता है कि आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए मुख्य मुद्दा नरेंद्र मोदी बनाम अराजकता का है. पार्टी काफी अाक्रामक रूप से इस मुद्दे को आगे बढ़ा रही है.
रामचन्द्र गुहा का मानना है की भारतीय क्रिकेट के पहले महान और सुपरस्टार क्रिकेटर सीके नायडू नहीं, पालवंकर थे. लेकिन क्रिकेट इतिहासकारों ने उनकी अनदेखी कर दी.
AAP सरकार ने बेअदबी के मामलों में जवाबदेही के मुद्दे से अपने किसी भी पूर्ववर्ती की तुलना में कहीं अधिक राजनीतिक लाभ उठाया है. अब उसके पास यह अवसर भी है—और दायित्व भी—कि वह अपनी इस बयानबाज़ी को अदालत में अपने प्रदर्शन से साबित करे.