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Saturday, 21 March, 2026
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मत-विमत

तो 40 साल बाद मिल सकता है दिल्ली को दूसरा सिख सांसद?

दिल्ली सरकार में मंत्री रहे अरविंदर सिंह लवली को कांग्रेस ने ईस्ट दिल्ली सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है. 1980 में चरणजीत सिंह बने थे दक्षिणी दिल्ली से सांसद.

क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी और अभिनेता अक्षय, दोनों हकीकत से दूर फिल्मी दुनिया में रहते हैं

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के मुखिया राजीव रंजन मिश्र का मातृ सदन जाने का हर्गिज यह मतलब नहीं कि सरकार आत्मबोधानंद से बात कर रही है.

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर दिग्विजय सिंह के लिए वरदान समान

अक्सर कांग्रेस का ‘मुस्लिम चेहरा’ बताए जाने वाले दिग्विजय सिंह अपनी छवि सुधारने और भोपाल के मुकाबले को ‘हिंदू धर्म बनाम हिंदुत्व’ का रूप देने के लिए प्रयासरत हैं.

बीजेपी को उदित राज, सावित्रीबाई फुले, उपेंद्र कुशवाहा, लक्ष्मीनारायण यादव जैसे नेता क्यों नहीं चाहिए?

बीजेपी का पूरा ध्यान इस समय सवर्ण वोटरों को इकट्ठा करने पर है, उनके लिए सवर्ण आरक्षण लाया गया है. उदित राज और उन जैसे लोग उसके इस प्रोजेक्ट में समस्या पैदा कर रहे थे.

उत्तर भारत में बन रही सामाजिक एकता से पूरा होगा कांशीराम का सपना

राजनीति आम तौर पर तोड़ती है. विभाजन पैदा करती है. लेकिन इस बार उत्तर भारत में खासकर बिहार और यूपी में समाज के वंचित समूहों ने जो एकता बनाई है, उसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं.

जी.डी बख्शी प्रकरण उदारवादियों के पाखंड और चुनिंदा आक्रोश को दर्शाता है

जब उदारवादियों के पाखंड को उजागर किया जाता है, तो वे उत्पीड़ित होने के उबाऊ रुदन में लग जाते हैं.

एक चुनाव से दूसरे चुनाव के बीच इतने अमीर कैसे हो जाते हैं नेता?

सांसद और विधायक अपना वेतन खुद तय करते हैं और बिना किसी बहस के अपना वेतन बढ़ा लेते हैं. इस मायने में राजनीति एक अच्छा व्यवसाय या कमाऊ खेती भी है. अब वह सिर्फ सेवा भाव के लिए नहीं की जा रही है

चुनाव में कौन हजम कर गया नोटबंदी, रोजगार, विकास, उत्पीड़न जैसे मुद्दे

चुनाव के दौरान उन मुद्दों पर बात क्यों नहीं हो रही है, जिनके कारण करोड़ों लोगों का जीवन प्रभावित हुआ? उन वादों की चर्चा क्यों नहीं है, जो 2014 में किए गए थे? उन्माद के सवाल सतह पर क्यों हैं?

चुनावी चक्कर में परमाणु हथियारों को उलझाना, पीएम मोदी की भारी भूल है

परमाणु शक्ति सम्पन्न देशों से कथनी और करनी में जिम्मेदार होने की उम्मीद की जाती है. भारत को परमाणु अस्त्रों को लेकर पाकिस्तान की तरह गैरजिम्मेदाराना बातें करने से परहेज करना चाहिए

क्या सपा को लगता है कि शालिनी यादव मोदी को बराबरी की टक्कर दे पाएंगी?

नरेंद्र मोदी के खिलाफ सपा-बसपा गठबंधन कोई मजबूत कैंडिडेट दे सकता था. लेकिन जाने किस मजबूरी में गठबंधन ने एक कमजोर प्रत्याशी यहां उतार दिया.

मत-विमत

‘विश्वगुरु’ बनने का हमारा-आपका भ्रम, दुनिया को देखने की समझ बिगाड़ रहा है

एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.

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राजनीति

देश

माकपा और विद्रोही नेता जी सुधाकरन के बीच जुबानी जंग तेज

अलप्पुझा (केरल), 21 मार्च (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) एवं उसके बागी नेता जी सुधाकरन के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है।...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.