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Wednesday, 25 February, 2026
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मत-विमत

चुनाव में कौन हजम कर गया नोटबंदी, रोजगार, विकास, उत्पीड़न जैसे मुद्दे

चुनाव के दौरान उन मुद्दों पर बात क्यों नहीं हो रही है, जिनके कारण करोड़ों लोगों का जीवन प्रभावित हुआ? उन वादों की चर्चा क्यों नहीं है, जो 2014 में किए गए थे? उन्माद के सवाल सतह पर क्यों हैं?

चुनावी चक्कर में परमाणु हथियारों को उलझाना, पीएम मोदी की भारी भूल है

परमाणु शक्ति सम्पन्न देशों से कथनी और करनी में जिम्मेदार होने की उम्मीद की जाती है. भारत को परमाणु अस्त्रों को लेकर पाकिस्तान की तरह गैरजिम्मेदाराना बातें करने से परहेज करना चाहिए

क्या सपा को लगता है कि शालिनी यादव मोदी को बराबरी की टक्कर दे पाएंगी?

नरेंद्र मोदी के खिलाफ सपा-बसपा गठबंधन कोई मजबूत कैंडिडेट दे सकता था. लेकिन जाने किस मजबूरी में गठबंधन ने एक कमजोर प्रत्याशी यहां उतार दिया.

मोदी का एक गठबंधन सरकार का नेतृत्व करना, वास्तविक बदलावों का कारण बन सकता है

गठबंधन सरकारें समावेशी होती हैं, भारत की विविधता को परिलक्षित करती हैं और सर्वाधिक अस्थिर गठबंधन सरकार भी आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ा चुकी है.

यादववाद के आरोप पर अखिलेश यादव को गुस्सा क्यों आया?

अखिलेश यादव के शासन पर लगातार इस बात के आरोप लगे कि उसमें यादव जाति को तरजीह दी गई. पहली बार उन्होंने इसका जवाब दिया है. क्या है इसका मतलब?

चुनाव प्रक्रिया में सुधार कीजिए, ईवीएम का हौवा दिखाना बंद कीजिए

अब समय आ गया है कि हम ईवीएम को कमज़ोर बनाने के प्रयास को त्याग कर यह सोचे कि पूरी मतदान प्रक्रिया को कैसे सदृढ़ बनाया जाए.

कौन रच रहा है चीफ जस्टिस के खिलाफ साजिश?

जस्टिस रंजन गोगोई चीफ जस्टिस के पद पर आसीन हैं और एक महिला जूनियर कोर्ट असिस्टेंट द्वारा लगाया गया यौन उत्पीड़न व प्रताड़ना का आरोप झेल रहे हैं, तो भी लगता है कि न्यायालय के अंदरूनी हालात सुधरने के बजाय और विकट हो गये हैं.

हरियाणवी पॉप कल्चर: हुक्का, ट्रैक्टर, अपणी बोली और सपना चौधरी

लिरिक्स में कुछ युवा अपनी बोली ना छोड़ने की घोषणा करते हैं तो कुछ अंग्रेजी ना सीखने का दंभ भी भरते हैं.

फिल्मी कलाकारों के जरिए राजनीति के दिग्गजों को घेरने की कोशिश

फिल्मी हस्तियों के प्रशंसकों की बड़ी संख्या होती है जो वोटों में भी परिवर्तित होती रहती हैं. इसीलिए राजनीतिक पार्टियां विरोधी नेताओं के खिलाफ उन्हें चुनावी मैदान में उतारती हैं.

आप चाहे कुछ भी समझें, प्रज्ञा ठाकुर का नामांकन हिंदुत्व का विज्ञापन नहीं हो सकता

जब भाजपा विपक्ष में थी तब कानून व्यवस्था के लिए आवाज़ उठती थी. उसके नेताओं को शालीन भाषा का इस्तेमाल करने के लिए जाना जाता था. साध्वी प्रज्ञा को टिकट देना इन सभी चीजों के खिलाफ है.

मत-विमत

मुसलमानों को ‘गोली मारने’ वाले हिमंत बिस्वा सरमा के वीडियो पर कानून क्या कहता है

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण चुनाव जीतने की संभावना बढ़ाने के लिए किया गया लगता है, लेकिन एक बड़ा कानूनी सवाल है: क्या इससे उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है?

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राजनीति

देश

क्रिकेट मैच ने भारत में महानगरों से इतर घरेलू यात्रा को बढ़ावा दिया: एयरबीएनबी

नयी दिल्ली, 25 फरवरी (भाषा) ऑनलाइन आवास सुविधा देने वाले मंच एयरबीएनबी ने कहा कि भारत में क्रिकेट आयोजनों ने घरेलू यात्रा को...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.