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Sunday, 22 March, 2026
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मुस्लिम सांसद, विधायक हमेशा मुसलमानों के लिए काम नहीं करते हैं

मुस्लिमों का पिछड़ापन एक राष्ट्रीय मुद्दा है, जो संसद में मुस्लिम सांसदों की घटती संख्या से अधिक गंभीर समस्या है.

क्या अपने ‘सुपरमैन’ हरभजन पर भरोसा ना करना धोनी को पड़ा भारी?

शार्दुल ठाकुर ने जब क्रुनाल पांड्या को आउट किया तो कॉमेंट्री में लगातार इस बारे में चर्चा हो रही थी कि धोनी किस कदर अपने खिलाड़ियों पर भरोसा करते हैं.

ग्राम्शी, आंबेडकर और लालू: वंचितों की मुक्ति के प्रश्न से टकराती तीन शख्सियतें

ग्राम्शी इटली के वंचितों, गरीबों, सबऑल्टर्न के सवालों पर लगातार मुखर रहे और जेल में भी उनकी आवाज कमजोर नहीं पड़ी. उसी तरह लालू प्रसाद भी भारत में दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के सवाल पर लगातार मुखर रहे हैं.

इस रमजान, न तो रोजे न ही खाने को मजबूर करें, कुरान कहता है कि धर्म में कोई विवशता नहीं होनी चाहिए

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ख़ुद एक मुसलमान नहीं हैं लेकिन वो नमाज पढ़ती हैं और रोजा भी रखती हैं. बहुतों का कहना है कि वो इस सच्चे दिल से नहीं करतीं और वो ये सब सिर्फ मुस्लिम वोटों के लिए करती हैं.

जाति और वर्ग की दुविधा में विलोप की ओर बढ़ता भारतीय वामपंथ

भारत में वामपंथ के नेतृत्व पर उच्च जातियों का क़ब्ज़ा रहा. जिसकी वजह से उनको जाति की समस्या को न देख पाने की बीमारी लग गयी है. यही वजह है कि जो पार्टी आजादी से लेकर 1962 तक देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी थी, वह विलोप की ओर बढ़ रही है.

अगर मोदी की सत्ता में वापसी नहीं होती तो उसका ज़िम्मेदार विपक्ष नहीं वो खुद होंगे

इस चुनाव अभियान से अगर कुछ स्पष्ट हुआ है तो वह यह है कि मोदी में किसी भी पिच पर बल्लेबाज़ी करने और छक्के लगाने की विलक्षण प्रतिभा है.

अति-पिछड़ों की बुलंद आवाज बनकर उभर रहे हैं ओम प्रकाश राजभर

अति-पिछड़ों की अनदेखी करने की सपा-बसपा की राजनीति की सीमाएं अब उजागर हो गई हैं. ऐसे में सैकड़ों अति-पिछड़ी जातियां अपना हक मांगने लगी हैं. इसी परिस्थिति में ओम प्रकाश राजभर का उभार हुआ है.

मोदी का असली ‘मंदिर मंत्र’ गूंज रहा है वाराणसी में

मोदी अगर ‘हिंदू हृदय सम्राट’ के तौर पर मजबूत होते जाते हैं तो बेहतर यह है कि ऐसा वे मध्ययुग की मस्जिदों को ढहाने की जगह प्राचीन मंदिरों का उद्धार करके बनें, जैसा कि वे वाराणसी में कर रहे हैं.

2019 लोकसभा चुनाव: कांग्रेस के नए ‘मणि’ हैं सैम पित्रोदा

इसबार जब कांग्रेस के एक नेता ने अपना इन चुनावों में मुंह बंद रखा तो दूसरे ने कमी पूरी कर दी. 2014 के मणि 2019 के सैम के रूप में सामने आये हैं.

कांशीराम क्यों कहते थे कि भारत को मज़बूत नहीं, मजूबर सरकार चाहिए!

जब-जब केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकारे रहीं, ज्यादातर फैसले पूंजीपतियों और सामंती शक्तियों के हक़ में किए गए. ऐसे शासन में क्षेत्रीय आकांक्षाओं, लोक-कल्याण और जनहित के कार्यों को नज़रंदाज़ किया गया.

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‘विश्वगुरु’ बनने का हमारा-आपका भ्रम, दुनिया को देखने की समझ बिगाड़ रहा है

एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.

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पंजाब के सरकारी अधिकारी की आत्महत्या का मामला: विपक्षी दल मुख्यमंत्री निवास का करेंगे घेराव

चंडीगढ़, 21 मार्च (भाषा) पंजाब में विपक्षी दलों ने शनिवार रात को घोषणा की कि वे अमृतसर में राज्य भंडारण निगम के एक...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.