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Monday, 23 March, 2026
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‘हार्वर्ड’ के अर्थशास्त्रियों को नौकरी पर रखने में कोई हर्ज़ नहीं पर उनकी सुनिए भी तो मोदी जी

जब देश की आर्थिक वृद्धि दर गिर रही हो और अर्थव्यवस्था के बड़े क्षेत्रों में हर तरफ से चुनौतियां हमलावर हों तब आला अर्थशास्त्रियों का विदा लेना देश के लिए घातक ही है.

बसपा में आनंद कुमार का विकल्प कौन हो सकता था?

बसपा के पास क्षमतावान नेताओं की एक पूरी कतार थी. उनमें से कई लोग अब पार्टी में नहीं हैं. इसके बावजूद कुछ क्षमतावान लोग अब भी हैं, जो बीएसपी को आगे ले जा सकते हैं.

आखिरकार बंगाली मुसलमान ममता की तुष्टिकरण की राजनीति का विरोध करने लगे हैं

शायद अब ममता बनर्जी जैसे राजनीतिज्ञ भी मुसलमानों को दुधारू गाय से अधिक, मनुष्यों के रूप में देखना सीख जाएं.

स्वास्थ्य सेवाएं: देश में तमिलनाडु और पड़ोस में बांग्लादेश से सीखिए

गोरखपुर या मुजफ्फरपुर में जितनी मौते हुई हैं या हो रही हैं, उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बिलकुल कमजोर है. उनके पास प्राइवेट सेक्टर में इलाज करा पाने का विकल्प ही नहीं है.

भाजपा-कांग्रेस एकमत है कि मोदी अपराजेय हैं, लेकिन पुरानी राजनीति को नए विचार का इंतज़ार

1984 में दो सीटों पर सिमटने वाली आडवाणी की भाजपा ने वापसी की है. कांग्रेस 52 सीटों के साथ लड़ाई को कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, पीआईएल योद्धाओं पर छोड़ कर भाग रही है.

ये जाति की राजनीति का अंत है या फिर जाति और धर्म के कॉकटेल की शुरुआत 

क्या वाकई भाजपा के नेतृत्व में जातिवाद की राजनीति खत्म हुई है, या फिर जातीय राजनीती इस आम चुनाव में किसी और रूप में प्रकट हुई है.

प्रकृति पर रईसी की ऐसी धौंस का अंत कहां?

हाल ही में औली में इन ‘बंधुओं’ (अजय व अतुल) के दो बेटों की शादियां संपन्न हुईं, इन शादियों की गुप्ता बंधुओं से ज्यादा कीमत औली और उसके पर्यावरण को चुकानी पड़ी है.

झारखंड में ऐसा क्या है कि वहां सबसे ज्यादा ‘मॉब लिंचिंग’ हो रही है?

झारखंड में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले मॉब लिंचिंग की घटना से वहां समाज में ध्रुवीकरण तेज हो सकता है. लेकिन इस क्रम में वहां कानून के शासन के होने या न होने का सवाल खड़ा हो गया है.

बिहार में मासूम बच्चों के काम क्यों न आई आयुष्मान भारत योजना

बिहार जैसे गरीब राज्यों और इंश्योरेंस आधारित आयुष्मान भारत योजना के बीच कोई तालमेल ही नहीं है. ये योजना देश के विकसित इलाकों के लिए बनी है. बिहार के लिए सरकार को कुछ और सोचना होगा.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति मसौदा पुरातनपंथी नहीं पर शक है कि इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा

इस दस्तावेज के सुझावों को देखें तो पिछले पांच वर्षों में नरेंद्र मोदी सरकार इसके विपरीत दिशा में चली है.

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असम में एंबुलेंस और ट्रक की टक्कर में छह लोगों की मौत, दो अन्य घायल

तेजपुर, 22 मार्च (भाषा) असम के सोनितपुर जिले में रविवार रात को एम्बुलेंस और ट्रक की टक्कर हो जाने से उनमें सवार छह...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.