जब देश की आर्थिक वृद्धि दर गिर रही हो और अर्थव्यवस्था के बड़े क्षेत्रों में हर तरफ से चुनौतियां हमलावर हों तब आला अर्थशास्त्रियों का विदा लेना देश के लिए घातक ही है.
बसपा के पास क्षमतावान नेताओं की एक पूरी कतार थी. उनमें से कई लोग अब पार्टी में नहीं हैं. इसके बावजूद कुछ क्षमतावान लोग अब भी हैं, जो बीएसपी को आगे ले जा सकते हैं.
गोरखपुर या मुजफ्फरपुर में जितनी मौते हुई हैं या हो रही हैं, उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बिलकुल कमजोर है. उनके पास प्राइवेट सेक्टर में इलाज करा पाने का विकल्प ही नहीं है.
1984 में दो सीटों पर सिमटने वाली आडवाणी की भाजपा ने वापसी की है. कांग्रेस 52 सीटों के साथ लड़ाई को कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, पीआईएल योद्धाओं पर छोड़ कर भाग रही है.
हाल ही में औली में इन ‘बंधुओं’ (अजय व अतुल) के दो बेटों की शादियां संपन्न हुईं, इन शादियों की गुप्ता बंधुओं से ज्यादा कीमत औली और उसके पर्यावरण को चुकानी पड़ी है.
झारखंड में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले मॉब लिंचिंग की घटना से वहां समाज में ध्रुवीकरण तेज हो सकता है. लेकिन इस क्रम में वहां कानून के शासन के होने या न होने का सवाल खड़ा हो गया है.
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.