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Saturday, 7 March, 2026
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ओबीसी आरक्षण पर भूपेश बघेल का दांव क्या राजनीति की दिशा बदल सकेगा?

ओबीसी की राजनीतिक चेतना में जब तक अधिकार और हिस्सेदारी का सवाल महत्वपूर्ण नहीं होता, तब तक सिर्फ आरक्षण देकर उन्हें साम्प्रदायिक होने से रोका नहीं जा सकता.

मोदी के ‘नए कश्मीर’ की वास्तविकता को समझने के लिए इन 5 उदार मिथकों को तोड़ने की जरूरत है

मोदी ने शिमला समझौते के बाद से जारी यथास्थिति को तोड़ दिया है. कश्मीर के पेचीदा अतीत से उबरकर आगे बढ़ना है, तो नई सच्चाई को स्वीकार करना पड़ेगा.

मोदी सरकार यूनिफार्म सिविल कोड पर काम कर रही है

समान नागरिक संहिता नहीं होने के कारण, हमारे धर्मनिरपेक्ष समाज में एक समुदाय विशेष का धार्मिक विशेषाधिकार विवाद का विषय बन गया है.

एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोगों को गरिमा के साथ जीने का अधिकार प्राप्त हो

उच्चतम न्यायालय का कहना था कि सामाजिक नैतिकता की वेदी पर संविधान को शहीद नहीं किया जा सकता और कानून के शासन में सिर्फ संविधान की हुकूमत को ही इजाजत दी जा सकती है.

भारत की अर्थव्यवस्था आईसीयू में जा रही है, बाज़ार में है घबराहट

भारतीय रिजर्व बैंक लगातार रेपो रेट में कमी कर रहा है, लेकिन उसका असर नहीं दिख रहा है. डूबते धन के संकट से जूझ रहे बैंक ब्याज दर घटाने को तैयार नहीं हो रहे हैं.

‘गलत पार्टी में सही आदमी’ नहीं, स्वयं एक पार्टी थे अटल बिहारी वाजपेयी

वाजपेयी की तरह कोई और नेता वक्तृत्व एवं खामोशी के मिश्रण का वैसा उपयोग नहीं कर पाया. वे इस खूबी की बदौलत कठिन सवालों से बचकर निकल जाते थे.

अटल बिहारी वाजपेयी का लीडरशिप फार्मूला: बड़ा दिल व सुलझा नेतृत्व

अटल बिहारी वाजपेयी की वो बातों जो उन्हें महान नेता बनाती हैं. इरादे मजबूत लेकिन दिल से कवि.

कश्मीर की गोरी लड़कियों की चाहत, दबी हुई मर्दाना कुंठाओं को दिखाता है

ऐसा कैसे मुमकिन हो पा रहा है कि अपने ही देश कि किसी हिस्से से संबंधित किसी कानूनी प्रावधान में फेरबदल को किसी 'दुश्मन देश' पर जीत के मर्दाना उत्सव में तब्दील करने की कोशिश की गई.

महात्मा गांधी के अलावा और भी नेता थे, जो नेहरू के ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ के दौरान मौजूद नहीं थे

एक तरह से हम यह भी कह सकतें हैं कि ये सभी गणमान्य व्यक्ति उस भयावह हिंसा को देखने से बच गये, जो स्वतंत्र भारत के उनके सपने के हकीकत मे पूरा होने से पहले हीं पूरे भारत को लहू-लुहान कर चुकी थी.

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारत विरोधी खबरें चलाना, पाकिस्तान सरकार के दोहरे चरित्र को दिखाता है

पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता है कि भारत में मुस्लिम और अल्पसंख्यकों का शोषण किया जाता है. लेकिन पाकिस्तान का खुद का रिकार्ड इस मामले में काफी खराब है.

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भारतीय उदारवादियों को धर्म के बारे में फिर से सोचने की जरूरत है. जड़ से कटा हुआ मॉडल असरदार नहीं है

पश्चिमी लिबरलिज़्म अधिकारों से शुरू होता है और समाज को पीछे की ओर डिज़ाइन करता है. धर्म रिश्तों से शुरू होता है. यह मानता है कि आप ज़िम्मेदारियों के जाल में पैदा हुए हैं, और यह जाल एक तोहफ़ा है.

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राहुल गांधी ने केरल में शिवगिरि मठ का दौरा किया

(तस्वीरों के साथ)तिरुवनंतपुरम, सात मार्च (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को यहां वर्कला स्थित शिवगिरि मठ गये। केरल के दो दिवसीय...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.