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Saturday, 7 March, 2026
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मत-विमत

कश्मीरियों को समझना होगा उनकी लड़ाई भारत से नहीं, आरएसएस-बीजेपी की विचारधारा से है

कश्मीर घाटी के मुसलमानों को आखिरी समाधान आखिरी विश्वासघात लगता है.

मार्क्स से काफी पहले संत रविदास ने देखा था समतामूलक समाज का सपना

जाति व्यवस्था को चुनौती देने के साथ ही एक समतामूलक आदर्शलोक - बेगमपुरा का सपना भी इस संत ने देखा था.

इमरान खान ने सही कहा था मोदी कश्मीर मामले को हमेशा के लिए सुलझा देंगे : रेहम खान

यदि पाकिस्तान भारत को कश्मीर उपहार में देने वाला था, तो 70 साल तक लोगों को परेशानी में क्यों डाला?

किस्तों के बोझ तले दबा जा रहा है भारत का मध्य वर्ग

देश में कोई भी उद्योग ऐसा नहीं है, जिसमें नौकरियां चकाचक मिल रही हों और उस क्षेत्र के लोगों के चेहरे खिले हुए हों या तो नौकरियों में स्थिरता बनी हुई है या नौकरियां जा रही हैं.

नेटवर्क बंद करने के अलावा कश्मीर को कैसे संभालना है भारत को इज़राइल से सीखना चाहिए

कश्मीर में संचार माध्यमों पर पाबंदी को लेकर गृहमंत्री अमित शाह भी उतने ही गलत हैं जितने भारत के सेलिब्रिटी टिप्पणीकार.

तीन तलाक और आर्टिकल 370 के बाद क्या भाजपा का अगला निशाना होगा आरक्षण

भाजपा के कोर मतदाताओं की हमेशा से ये इच्छा रही है कि जातिगत आरक्षण पूरी तरह से खत्म हो. भाजपा अपने कोर मतदाताओं को खुश करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है.

सीडीएस की घोषणा आजादी के बाद भारतीय सेना के लिए सबसे बड़ा कदम

कारगिल युद्ध के बाद तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय बनाने की आवश्यकता को गंभीरता से लेते हुए सीडीएस की सिफारिश पहले भी की गयी थी.

क्या मंडल पार्ट-2 के जरिए बीजेपी का मुकाबला कर पाएगी कांग्रेस?

मंडल कमीशन को लागू करने की घोषणा अगर मंडल-1 है, तो ओबीसी आरक्षण को बढ़ाने की कांग्रेस शासित राज्यों की कवायद मंडल-2 है. इसके राजनीतिक असर पर नजर रखने की जरूरत है.

रियल एस्टेट में लगे काले धन की वजह से नुकसान उठा रहे हैं उपभोक्ता

पिछले कुछ सालों में डेवलपरों की गड़बड़ियों और रियल एस्टेट में लगे काले पैसों की वजह से इस सेक्टर की स्थिति खराब हो गई है.

भारतीय सेवा क्षेत्र जल्द ही वाणिज्य निर्यात को पीछे छोड़ देगा, जो जश्न की बात नहीं है

मैनुफैक्चरिंग और सेवाओं के निर्यातों के बीच का बढ़ता असंतुलन बेरोजगारी को और बढ़ाएगा.

मत-विमत

भारतीय उदारवादियों को धर्म के बारे में फिर से सोचने की जरूरत है. जड़ से कटा हुआ मॉडल असरदार नहीं है

पश्चिमी लिबरलिज़्म अधिकारों से शुरू होता है और समाज को पीछे की ओर डिज़ाइन करता है. धर्म रिश्तों से शुरू होता है. यह मानता है कि आप ज़िम्मेदारियों के जाल में पैदा हुए हैं, और यह जाल एक तोहफ़ा है.

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राजनीति

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राहुल गांधी ने शिवगिरि मठ का दौरा किया

तिरुवनंतपुरम, सात मार्च (भाषा) केरल के दो दिवसीय दौरे पर आए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को यहां वर्कला स्थित शिवगिरि मठ का...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.