इमरान ख़ान से नई दिल्ली पर परमाणु हमले की ‘तौबा तौबा टीवी पत्रकार’ की अपील के कुछ ही दिन बाद उनके रेल मंत्री ने भारत को पाव-आधा पाव के एटम बमों की धमकी दे डाली.
अभी हम लोग जिस मुकाम पर आ चुके हैं. उसमें रास्ता बस यही बचता है कि हम हाल में प्रकाशित एनआरसी को अंतिम नहीं बल्कि अंतरिम सूची घोषित करें और सूची का पूरी तटस्थता बरतते हुए पुनरावलोकन हो.
अधिकारी बेशक आधुनिक लोकतंत्र के तहत काम करने वाली नौकरशाही के लिए नियुक्त किए जा रहे हैं, लेकिन निजी और सामाजिक जीवन के प्रभाव की वजह से वे सामंतवादी जीवन-मूल्यों से अपने आप को अलग नहीं कर पा रहे हैं.
आरक्षण विरोधी आंदोलनकारियों को इस बात का शायद अंदाजा नहीं है कि जब वे विरोध के दौरान रिक्शा चलाते हैं, जूते साफ करते हैं, झाड़ू लगाते हैं, तो वे श्रम का ही नहीं, श्रमिक जातियों का भी अपमान कर रहे होते हैं.
संविधान ने बेशक छुआछूत का निषेध कर दिया है और जातीय भेदभाव के खिलाफ बेशक संसद ने कानून बना दिया है, लेकिन दलितों को बराबरी से देखने का भाव समाज के एक हिस्से में अब तक नहीं आया है.