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Friday, 6 March, 2026
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रवीश कुमार की पत्रकारिता हमारे वक्त में घायल हो रहे सच का आईना है, पर सच इतना अकेला क्यों है

आदर्शवादी नौजवान, पत्रकार या ज़मीन से जुड़कर काम करने वाले एक्टिविस्ट्स से भेंट होती है तो वे रवीश का ज़िक्र किसी ‘हीरो’ के रुप में करते हैं और रवीश का नायकत्व उनके मन में कुछ इस कदर बसा है कि खुद रवीश को पता चले तो वे भी इस बात से डर जायें.

भारतीय सेना ने अरुणाचल में चीनी अतिक्रमण पर दिप्रिंट के लेख को गलत बताया

लेखक अभिजीत अय्यर-मित्रा ने अपने दावे के समर्थन में और भी उपग्रह चित्र पेश किए और उन्होंने भारतीय सेना के समक्ष नए सवाल भी उठाए हैं.

भारत को मरुस्थल घटाने हैं तो महान प्रधानमंत्रियों को इसपर अपने मासूम विचार छोड़ने पड़ेंगे

प्रधानमंत्री मोदी ने सैकड़ों तालाबों को पुनर्जीवित करने का प्रण दोहराया है. लेकिन क्या इसकी शुरुआत दिल्ली से की जा सकती है.

क्या जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय एक बौद्धिक ‘एनिमल फार्म’ है

जेएनयू की प्रभावी बौद्धिकता देशवासियों से ही नहीं, सामान्य बुद्धि से भी दूर रही है. लंबे समय से वामपंथी दबदबे का रहस्य सामाजिक शिक्षा के राजनीतिकरण में है.

मुस्लिम, दलित व किसान जातियों के विरोध से चलती बीजेपी की राजनीति

एकात्म मानववाद सिद्धांत के मूल में मुसलमानों के खिलाफ सभी भारतीयों की विराट एकता की बात थी. लेकिन बीजेपी अब मुसलमान-विरोध से आगे बढ़ चुकी है. उसने समाज में नए अंतर्विरोध तलाश लिए हैं.

मोदी सरकार का आर्थिक सुस्ती के दौर में प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध का फैसला सही नहीं है

सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध को सरकार की परोक्ष स्वीकारोक्ति मानी जाए कि वह कचरा निस्तारण का एक सक्षम तंत्र बनाने में नाकाम रही है.

एनआरसी से किसी को कुछ नहीं मिला है, असम अपने जातीय संघर्ष को अब खत्म करना चाहता है

कोई भी एनआरसी की फाइनल सूची को स्वीकारने को तैयार नहीं है. लंबी चली प्रक्रिया का निष्कर्ष लोगों के सामने कई परेशानियां लेकर आया है.

महामारी के रूप में बदल रही है आत्महत्या करने की प्रवृत्ति, हर 40 सेकेंड पर मौत दे रही है दस्तक

विश्व स्वास्थ्य संगठन के पास उपलब्ध 2014 के डाटा के अनुसार भारत में सबसे ज्यादा आत्महत्याओं का कारण पारिवारिक उलझनें, शादीशुदा जिंदगी की उठापटक या फिर उससे जुड़े विवाद हैं.

इंटरनेट पर रोक की भारी कीमत चुका रहे हैं कश्मीर के लोग

शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य और कारोबार से लेकर यात्रा तक जीवन के हर क्षेत्र में इंटरनेट का समावेश है. इसे पानी, बिजली की तरह जीवन की बुनियादी सुविधाओं की सूची में शामिल माना जा सकता है.

अमित शाह का लोहिया और अनुच्छेद-370 पर बयान तथ्यों पर आधारित नहीं

लोहिया कहते थे कि 1947 में जो बंटवारा हुआ वह अप्राकृतिक था और कभी न कभी वह वक़्त आएगा कि जब भारत और पाकिस्तान मिलेंगे क्योंकि दोनों का एक ही इतिहास, भूगोल और संस्कृति है.

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शुरुआती कारोबार में रुपया दो पैसे मजबूत होकर 91.62 प्रति डॉलर पर

मुंबई, छह मार्च (भाषा) भारतीय रुपया शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दो पैसे मजबूत होकर 91.62 के स्तर पर...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.