जब से केंद्र की सत्ता में भाजपा की सरकार आई है ऐसा क्यूं है कि संविधान बनाम मनुस्मृति पर चर्चा गरमाने लगी है. एक के बाद एक संविधान पर प्रहार किया जा रहा है.
कानून में ये स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जाति व्यवस्था से उत्पीड़ितों को भारत में विशेष नागरिकता के प्रावधान होंगे. उन्हें भारत के एससी-एसटी एक्ट से लेकर आरक्षण समेत सभी नागरिक सुविधाएं दी जाएंगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के पहले कार्यकाल और वर्तमान में काफी भारी अंतर है. कल्याणकारी और ग्रामीण योजनाओं पर जो पहले ध्यान था वो अब धुंधली हो चुकी है.
तीन तलाक़ कानून को कार्यरूप देकर, जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म कर और सीएए को पारित करा कर अमित शाह गृहमंत्री के रूप में शुरुआती महीनों में ही मोदी सरकार पर अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे हैं.
छात्र अलग कारण से, तो मुस्लिम और असमी लोग अलग कारण से नागरिकता कानून (सीएए) का विरोध कर रहे हैं. लेकिन मोदी सरकार ने यह जो कानून बनाया है उसकी असंवैधानिकता के सवाल पर मतभेद भी हैं.
पाकिस्तान हम पर 'ईरान जैसा' हमला करने के लिए बेताब होगा, और चीन हमें 'असममित विस्तार' का मौका दिए बिना ही एक हवाई अभियान को अंजाम देने की योजना बना रहा होगा. भारत के पास खुद को बदलने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.