बलात्कारियों को मृत्युदंड के खिलाफ राय रखने वालों की दलील है कि इस अपराध के अंतर्निहित कारण – स्त्री जाति से घृणा – को लक्षित किया जाना चाहिए. पर 130 करोड़ लोगों के देश में इसकी शुरुआत कहां से हो?
बजाज की टिप्पणियों से वास्तव में भाजपा को अपनी इस राजनीतिक छवि को मजबूत करने में मदद मिलती है कि वह उद्योगपतियों से करीबी रिश्ता नहीं रखती, और यह भाजपा को अपनी राजनीतिक पूंजी और अपना राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने में मदद ही कर सकता है
बच्चियों से दरिंदगी करने वाले मुजरिमों के लिये पॉक्सो कानून के तहत दया याचिका का प्रावधान खत्म करने संबंधी राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद का विचार बेहद चौकाने वाला है.
सीएबी और इसके साथ देशभर में एनआरसी की प्रक्रिया शुरू करने का विचार शुरू से ही बेमानी है. भाजपा इसे अगला ‘राम मंदिर और अनुच्छेद 370’ बनाकर इसका इस्तेमाल अपने विरोधियों पर ‘मुस्लिम तुष्टीकरण’ का आरोप लगाने के लिए कर सकती है.
ओबीसी, एससी और एसटी दोनों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा समान रूप से बराबरी का सिद्धांत लागू किया जाना भारत के सर्वाधिक उपेक्षित वर्गों के लिए अन्यायपूर्ण है.
डॉ. आंबेडकर ने न्याय के लिए संघर्षरत योद्धा की तरह एक नायक की जिंदगी जी और उनके लोगों ने उन्हें एक महानायक की तरह अश्रुपूरित नयनों से यादगार अंतिम विदाई दी
मातृशक्ति को कमतर आंकने के आदी सरकारी बाबू पद्मावती से आंखे चुरा रहे हैं. ठीक उसी तरह जैसे बिल्ली दूध पीते समय आंख बंद कर लेती है और सोचती है कि उसे कोई नहीं देख रहा.