रूढ़िवादी धर्मगुरुओं ने मुसलमानों को गरबा में शरीक होने से मना किया क्योंकि इसे गलत बताया गया. अब हिंदू दक्षिणपंथी समूह उनकी मौजूदगी को उत्तेजक बता रहे हैं—कारण अलग, नतीजा वही.
हाईकोर्ट की गलती यह रही कि उसने इन विशेष संस्थानों को सामान्य शैक्षणिक संस्थानों की तरह देखा. ये कॉलेज संवैधानिक न्याय के विशेष साधन के रूप में बनाए गए थे.
पिछली शताब्दी के अधिकांश समय नेपाल ने खुद को ‘दुनिया का एकमात्र हिंदू राज्य’ कहा. हालांकि, इतिहास के ज्यादातर समय में यह देश धार्मिक, राजनीतिक और जातीय रूप से विभाजित रहा है.
न्यायिक समीक्षा के दबाव में कई राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट के 2006 के फैसले के बाद कार्यकारी आदेश जारी किए, लेकिन ये आदेश इस तरह बनाए गए कि न्यायिक निर्देशों को लागू होने से रोका जा सके.