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Sunday, 1 March, 2026
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बिग फैट से लेकर छोटी वर्चुअल शादी तक- कोविड काल में भारतीय शादियों को बदलने का समय आ गया है

हज़ारीबाग़ में बैठे किसी जोड़े की शादी का सेट, वेनिस का कोई आकर्षक चौक हो सकता है. मुज़फ्फ़रनगर में बैठे लोग कल्पना कर सकते हैं कि वो लेक कोमो के किनारे किसी विला पर हैं.

कोरोना से जंग के बीच राष्ट्रीय पटल पर उभरे उद्धव ठाकरे

उद्धव ठाकरे एक ऐसे नेता के रूप में उभरकर सामने आए हैं, जो केंद्र सरकार और बीजेपी से उनके ही तौर-तरीकों से निपट रहे हैं. बीजेपी के दांव उद्धव पर काम नहीं आ रहे हैं.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सार्वजनिक तौर पर विनम्रता दिखाने की जरूरत है

राहुल गांधी ये दिखावा नहीं कर सकते कि 2014 और 2019 से उनका सामना ही नहीं हुआ. नई छवि गढ़ना शुरू करने से पहले, उन्हें विनम्रता को अपनाने की ज़रूरत है.

राहुल ने रघुराम राजन का जैसा इंटरव्यू लिया वैसा अर्णब गोस्वामी और तबलीगी जमात वालों का लें तो बात बने

राहुल को ऐसे और भी इंटरव्यू लेने चाहिए ताकि लोगों में यह बेहतर समझ बने कि हम किस वक़्त में जी रहे हैं. और उम्मीद की जानी चाहिए कि मोदी सरकार उन इंटरव्यू को सुने.

गुजरात से लेकर मध्य प्रदेश तक, कोविड की लड़ाई में भाजपा के मुख्यमंत्री पीएम मोदी को नीचे गिराने में लगे हैं

भाजपा के नेतागण जनता की याददाश्त को लेकर चिंतित नहीं हैं, उन्हें भरोसा है कि मोदी अपनी पसंद का समय चुन कर एक नया आख्यान गढ़ देंगे, और जनता भी उन्हें उसी तरह माफ कर देगी जैसे उसने नोटबंदी के बाद किया था.

मोदी सरकार तय करे कि कोविड-19 के दौरान लोग काढ़ा पीएं या शराब

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस महामारी के दौरान स्वस्थ जीवन शैली अपनाने की सलाह दी है और उसकी गाइडलाइंस में शराब का सेवन न करना शामिल है. ऐसे में भारत में शराब बेचने की इजाजत देना आश्चर्यजनक है.

लॉकडाउन में अमीर और गरीब दोनों तरह के राज्यों के लिए आफत बनेगी मजदूरों की घर वापसी

रिवर्स माइग्रेशन से पैदा होने वाला संकट रोजगार देने वाले अमीर राज्यों और श्रम बल मुहैया कराने वाले पिछड़े राज्यों, दोनों के लिए तबाही लेकर आ सकता है.

लॉकडाउन का पूरा श्रेय तो मोदी ले जायेंगे, पर इसे खोलने के जोखिम में वो राज्यों की हिस्सेदारी चाहते हैं

राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के अपने 24 मार्च के फैसले के लिए सराहे गए प्रधानमंत्री मोदी को मालूम है कि लॉकडाउन बढ़ाना हो या उसमें ढील देना, दोनों ही फैसलों से कोई खास राजनीतिक लाभ नहीं मिलने वाला है.

विपक्ष कुछ भी दलील दे, कोविड के खिलाफ लड़ाई में आंकड़े मोदी सरकार की सफलता की ओर ही इशारा करते हैं

कोविड प्रभाव के आधार पर देश के क्षेत्रों को जोन में विभाजित करने का एक लाभ यह नजर आता है कि सरकार कोरोना के खिलाफ लड़ाई और जनजीवन की सहूलियत, दोनों पर ध्यान दे सकेगी. सरकार के सामने देश की स्थिति की स्पष्ट तस्वीरें होगी.

कोरोना संकट के बीच राहुल गांधी की रघुराम राजन से हुई बातचीत दिखाती है कि कांग्रेस के पास कोई उपाय नहीं है

सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस से यह उम्मीद तो की ही जा सकती है कि वह वास्तविकताओं का ख्याल रखते हुए सरकार की आलोचना करे और यथार्थपरक समाधान पेश करे. 

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