पाकिस्तान के पास ‘वन पाउंड फिश मैन’, उड़ंतू टिकटॉक अंकल और विज्ञापन बनाने वाले वसीम हसन शेख तो थे ही, अब ताहर शाह लॉकडाउन से फैली मायूसी को भगाने में हमारी खूब मदद कर रहे हैं.
दिप्रिंट में बुधवार को तबलीगी जमात और वीएचपी की तुलना किए जाने वाले रविकान्त चंदन के लेख पर आरएसएस पर पीएचडी करने वाले रतन शारदा ने उनके दावों को गलत बताया और उसका जवाब दिया है.
कोरोना संकट ने अस्पतालों में कर्मचारियों के बीच गैर-बराबरी को एक बार फिर उजागर किया है. पिछले 30 सालों में समाज के हर कारोबारी हिस्से में ठेकेदारी प्रथा बढ़ी है और स्थाई रोज़गार कम हुये हैं. हेल्थ सेक्टर भी इसका अपवाद नहीं है.
वीडियो कांफ्रेंसिंग से मुकदमों की सुनवाई और ऑडियो रिकार्डिंग वेबसाइट पर अपलोड करने की व्यवस्था के मूर्तरूप लेने से देश की न्याय प्रणाली में क्रांतिकारी सुधार लाना संभव हो सकेगा.
एंड्रोक्राइनोलॉजिस्ट अंबरीश मिठल कहते हैं अगर आप स्मार्ट हैं तो सिर्फ बेसिक्स को फॉलो करें और आसान इंटरनेट की तकनीक का उपयोग करते हुए आप डायबिटीज़ के विजेता बन सकते हैं
आंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर जडेजा की क्लिप को एक लाख से अधिक लोगों द्वारा देखा जाना इस बात को दर्शाता है कि हम आंबेडकर के जातिविहीन समाज के सपने से बहुत दूर खड़े हैं.
प्रधानमंत्री ने जिस दूसरे चरण के लॉकडाऊन की घोषणा की है उसके फायदों पर उसके नुकसान कहीं ज्यादा भारी पड़ने वाले हैं. सरकार को भोजन और सुरक्षा का आश्वासन देना चाहिए.
किसी भी युद्ध को जीतने तो क्या, शुरू करने की कुंजी यह होती है कि उसका लक्ष्य स्पष्ट हो. यह पूरी तरह से राजनीतिक विषय होता है. यह न तो भावनात्मक मामला होता है, और न ही शुद्ध रूप से सैन्य मामला.