हज़ारीबाग़ में बैठे किसी जोड़े की शादी का सेट, वेनिस का कोई आकर्षक चौक हो सकता है. मुज़फ्फ़रनगर में बैठे लोग कल्पना कर सकते हैं कि वो लेक कोमो के किनारे किसी विला पर हैं.
उद्धव ठाकरे एक ऐसे नेता के रूप में उभरकर सामने आए हैं, जो केंद्र सरकार और बीजेपी से उनके ही तौर-तरीकों से निपट रहे हैं. बीजेपी के दांव उद्धव पर काम नहीं आ रहे हैं.
राहुल को ऐसे और भी इंटरव्यू लेने चाहिए ताकि लोगों में यह बेहतर समझ बने कि हम किस वक़्त में जी रहे हैं. और उम्मीद की जानी चाहिए कि मोदी सरकार उन इंटरव्यू को सुने.
भाजपा के नेतागण जनता की याददाश्त को लेकर चिंतित नहीं हैं, उन्हें भरोसा है कि मोदी अपनी पसंद का समय चुन कर एक नया आख्यान गढ़ देंगे, और जनता भी उन्हें उसी तरह माफ कर देगी जैसे उसने नोटबंदी के बाद किया था.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस महामारी के दौरान स्वस्थ जीवन शैली अपनाने की सलाह दी है और उसकी गाइडलाइंस में शराब का सेवन न करना शामिल है. ऐसे में भारत में शराब बेचने की इजाजत देना आश्चर्यजनक है.
राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के अपने 24 मार्च के फैसले के लिए सराहे गए प्रधानमंत्री मोदी को मालूम है कि लॉकडाउन बढ़ाना हो या उसमें ढील देना, दोनों ही फैसलों से कोई खास राजनीतिक लाभ नहीं मिलने वाला है.
कोविड प्रभाव के आधार पर देश के क्षेत्रों को जोन में विभाजित करने का एक लाभ यह नजर आता है कि सरकार कोरोना के खिलाफ लड़ाई और जनजीवन की सहूलियत, दोनों पर ध्यान दे सकेगी. सरकार के सामने देश की स्थिति की स्पष्ट तस्वीरें होगी.