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Sunday, 1 March, 2026
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मोदी सरकार के 20 लाख करोड़ के पैकेज ने एमएसएमई क़र्ज में सुधारों का अवसर खो दिया है

बिना कोलेटरल के एमएसएमई लोन के लिए सरकार की 100 प्रतिशत सॉवरेन गारंटी, क़र्ज़दारों को ये रक़म कभी न लौटाने के लिए प्रोत्साहित करेगी, और बैंकों को भी भविष्य में उन्हें क़र्ज़ देने के लिए हतोत्साहित करेगी.

कोविड के दौरान इमरान खान को एर्तुग्रुल देखने की लत लगी, पाकिस्तानियों को भी तुर्की शो की सिफारिश कर रहे हैं

वैसे तो किसी को भी अपनी पसंद का कार्यक्रम देखने की आज़ादी है लेकिन सरकार जब विदेशी सीरियलों को आगे बढ़ाने लगे और अपने तंग नजरिए को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी ब्रॉडकास्टर का इस्तेमाल करे तो इससे मुश्किल पैदा हो जाती है.

आतंकी अभियानों से राष्ट्रीय राइफल्स की 10 बटालियनों को निकालकर घुसपैठ रोधी ग्रिड को मजबूत किया जा सकता है

जम्मू-कश्मीर में हमारी रणनीतिक सीमाएं हमें इजाज़त नहीं देतीं, कि हम पाकिस्तान को कार्रवाई करने के लिए मजबूर कर सकें, इसलिए बाहरी मदद रोकने के लिए, मजबूरन हमें कूटनीति और रोकथाम के उपायों का सहारा लेना पड़ता है.

माई लॉर्ड अगर न्यायपालिका की निष्पक्षता बचाना चाहते हैं तो रिटायर होने के दो साल बाद तक कोई पद न लें

न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता स्वीकार करते हैं कि प्रत्येक राजनीतिक दल, जो भी सत्ता में हो, न्यायपालिका को अपने नियंत्रण में करने का प्रयास करता है लेकिन स्वतंत्र बने रहना तो न्यायाधीशों का काम है.

ज़मानत याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की सिंगल बेंच से सफ़ूरा ज़रगर, सुधा भारद्वाज को जल्दी इंसाफ मिलना चाहिए

सिंगल बेंच द्वारा ज़मानत याचिकाओं की सुनवाई कराने का सुप्रीम कोर्ट का क़दम, सरकारी एलान बनकर नहीं रह जाना चाहिए-जो पढ़ने में तो अच्छा लगता है, लेकिन जिसका नागरिकों के जीवन पर कोई असर नही होता.

20 लाख करोड़ से अर्थव्यवस्था में जान फूंकी जा सकती है रोजगार और जलवायु परिवर्तन से निपट सकते हैं- पर राजनीतिक इच्छाशक्ति होनी चाहिए

इस समय के लिए मोदी सरकार वास्तव में 20 लाख करोड़ रुपये जुटाने या बचाने जा रही है और लॉकडाउन से लगे झटके के बाद अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने के लिए इसका इस्तेमाल करेगी.

क्या मोदी अपने तानाशाही रवैये को छोड़कर कोविड काल में सर्वसम्मति की राह पकड़ सकते हैं

कंसेंसेस और आपसी सलाह इन दो चीज़ों का प्रदर्शन पिछले छह सालों में सत्तासीन रहते हुए मोदी ने नहीं किया. क्या मुख्यमंत्रियों के साथ मैराथन बैठकें कोविड से डील करने में प्रभावी साबित होंगी और क्या ये नया संकेत बनेंगी.

रुबिका लियाकत और सईद अंसारी जैसे हिंदी समाचार एंकर भाजपा के मुस्लिम नेताओं की तरह हैं

ये एंकर रंगमंच की जीती-जागती, विचारवान कठपुतलियां हैं जो खास रोल को निभाने के नाट्यशास्त्रीय समझौते से बंधी हैं. निजी जीवन में वे क्या सोचती हैं, इसका असर रंगमंच पर निभाए जाने वाले किरदार पर नहीं पड़ना चाहिए.

डब्लूएचओ में नेतृत्व की अपनी नयी भूमिका में भारत अपने साथियों को सत्ता संतुलन के नाम पर बरगला नहीं सकता

कोविड-19 को लेकर सत्ता संघर्ष अब नये रूपों में सामने आएगा, जिसकी अनदेखी करना भारत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है.

भारत कोरोना के बाद चीन के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की जगह ले सकता है, ये कहना जल्दबाजी होगी

#CutTheClutter के 467वें एपिसोड में शेखर गुप्त बता रहे हैं कि चीन के व्यापार में घुस पाना आसान नहीं लेकिन कुछ एरिया हैं, पर उसके लिए काफी मेहनत करनी होगी.

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तालिबान, TTP और बलूच चुनौती: रणनीतिक भूल की कीमत, पाकिस्तान दो तरफ से घिरा

पाकिस्तान का सियासी नेतृत्व कमजोर और कमअक्ल दिखता है. उसकी कूटनीति पूरी तरह भारत-चीन-अमेरिका केंद्रित है और वह अफगानिस्तान को अपना गुलाम मानता रहा है.

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बेटी की शादी के लिए छुट्टी नहीं मिलने से क्षुब्ध बीएलओ ने की खुदकुशी

कानपुर (उप्र), एक मार्च (भाषा) फतेहपुर जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) के तौर...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.