नागरिकता संशोधन कानून का विरोध, दिल्ली में हिंसा, कोरोनावायरस के दौरान मरकज में तब्लीगी जमात का आयोजन और पालघर में साधुओं की हत्या कुछ ऐसा ही संकेत देती हैं.
अरविंद केजरीवाल और उद्धव ठाकरे तो प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने को तैयार हैं मगर नीतीश कुमार लॉकडाउन के भंग होने का तर्क देकर उन मजदूरों को अपने राज्य में लौटने से लगातार रोक रहे हैं.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने के फैसले को काम के प्रति उनके समर्पण और प्रशासनिक कुशलता के पक्के सबूत के तौर पर पेश किया जा रहा है.
सुप्रीम कोर्ट के पिछले कुछ निर्णयों की वजह से दलितों को आंदोलन करते हुए सड़कों पर उतरना पड़ा था और उसके बाद कोर्ट को अपने निर्णयों में सुधार भी करना पड़ा है.
क्या वाकई केंद्र की मोदी सरकार ममता सरकार के साथ सहयोग नहीं कर रही अथवा ममता सरकार ही अपनी जवाबदेही से बचने की कोशिश में हैं ? इन सवालों को समझना जरुरी है.
उथलपुथल में पड़ी अर्थव्यवस्था की हकीकत का सामना होने पर आज हमें नाप में जो छोटा जूता पहनने के लिए मजबूर होना पड़ा है वह हमारे पैरों को अलग तरह से काटेगा.
आरएसएस अपनी बातों के समर्थन में दत्तोपंत ठेंगड़ी की लिखी किताब और अपनी पत्रिका ऑर्गनाइजर के 2019 के लेख आदि को प्रमाण के तौर पर पेश करता है, जिसकी कोई विश्वसनीयता नहीं है.
जो लोग सोनिया गांधी पर निजी हमले उनके विदेश में पैदा होने की वजह से करते हैं. वही लोग अक्सर सिर्फ विदेशों की नागरिकता हासिल किए भारतीयों की उपलब्धियों पर गर्व महसूस करते हैं.
किसी भी युद्ध को जीतने तो क्या, शुरू करने की कुंजी यह होती है कि उसका लक्ष्य स्पष्ट हो. यह पूरी तरह से राजनीतिक विषय होता है. यह न तो भावनात्मक मामला होता है, और न ही शुद्ध रूप से सैन्य मामला.
बुधवार को देहरादून के विकासनगर इलाके में दो भाइयों पर हमला होने के बाद खतरे की घंटी बज गई है, क्योंकि उन्होंने एक दुकानदार को अपनी कश्मीरी मुस्लिम पहचान बताई थी.