राहुल को ऐसे और भी इंटरव्यू लेने चाहिए ताकि लोगों में यह बेहतर समझ बने कि हम किस वक़्त में जी रहे हैं. और उम्मीद की जानी चाहिए कि मोदी सरकार उन इंटरव्यू को सुने.
भाजपा के नेतागण जनता की याददाश्त को लेकर चिंतित नहीं हैं, उन्हें भरोसा है कि मोदी अपनी पसंद का समय चुन कर एक नया आख्यान गढ़ देंगे, और जनता भी उन्हें उसी तरह माफ कर देगी जैसे उसने नोटबंदी के बाद किया था.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस महामारी के दौरान स्वस्थ जीवन शैली अपनाने की सलाह दी है और उसकी गाइडलाइंस में शराब का सेवन न करना शामिल है. ऐसे में भारत में शराब बेचने की इजाजत देना आश्चर्यजनक है.
राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के अपने 24 मार्च के फैसले के लिए सराहे गए प्रधानमंत्री मोदी को मालूम है कि लॉकडाउन बढ़ाना हो या उसमें ढील देना, दोनों ही फैसलों से कोई खास राजनीतिक लाभ नहीं मिलने वाला है.
कोविड प्रभाव के आधार पर देश के क्षेत्रों को जोन में विभाजित करने का एक लाभ यह नजर आता है कि सरकार कोरोना के खिलाफ लड़ाई और जनजीवन की सहूलियत, दोनों पर ध्यान दे सकेगी. सरकार के सामने देश की स्थिति की स्पष्ट तस्वीरें होगी.
भारत को धीरे-धीरे अपने कामकाज पर लौटाने की जरूरत थी, बजाय कि देश को लॉकडाउन की मूर्छा से बाहर न निकालकर रेड, ग्रीन, ऑरेंज जोन में सेलेक्टिव तौर पर खोलने की.
जिंदगी केवल एक बार किसी महामारी के दौरान बच निकलने के बारे में ही नहीं है. इसके मायने उससे भी अधिक हैं. ये कला, साहित्य, सिनेमा और सबसे महत्वपूर्ण हर तबके के लोगों से जुड़ने के बारे में भी है.
माहौल को खराब करने की कोशिश करने वालों को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की बातों पर ध्यान देना चाहिए जिन्होंने तुच्छ राजनीतिक उद्देश्यों के ऊपर राष्ट्रीय हितों को तरजीह दिए जाने पर ज़ोर दिया है.
आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि छह साल में पर्सनल लोन तीन गुना हो गए हैं और कर्ज़ चुकाने में चूक बढ़ी है; सोशल मीडिया से बनी लाइफस्टाइल को बनाए रखने के लिए मिडिल क्लास कर्ज़ ले रहा है, जबकि असली मज़दूरी आधी रह गई है.