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Saturday, 31 January, 2026
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राहुल ने रघुराम राजन का जैसा इंटरव्यू लिया वैसा अर्णब गोस्वामी और तबलीगी जमात वालों का लें तो बात बने

राहुल को ऐसे और भी इंटरव्यू लेने चाहिए ताकि लोगों में यह बेहतर समझ बने कि हम किस वक़्त में जी रहे हैं. और उम्मीद की जानी चाहिए कि मोदी सरकार उन इंटरव्यू को सुने.

गुजरात से लेकर मध्य प्रदेश तक, कोविड की लड़ाई में भाजपा के मुख्यमंत्री पीएम मोदी को नीचे गिराने में लगे हैं

भाजपा के नेतागण जनता की याददाश्त को लेकर चिंतित नहीं हैं, उन्हें भरोसा है कि मोदी अपनी पसंद का समय चुन कर एक नया आख्यान गढ़ देंगे, और जनता भी उन्हें उसी तरह माफ कर देगी जैसे उसने नोटबंदी के बाद किया था.

मोदी सरकार तय करे कि कोविड-19 के दौरान लोग काढ़ा पीएं या शराब

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस महामारी के दौरान स्वस्थ जीवन शैली अपनाने की सलाह दी है और उसकी गाइडलाइंस में शराब का सेवन न करना शामिल है. ऐसे में भारत में शराब बेचने की इजाजत देना आश्चर्यजनक है.

लॉकडाउन में अमीर और गरीब दोनों तरह के राज्यों के लिए आफत बनेगी मजदूरों की घर वापसी

रिवर्स माइग्रेशन से पैदा होने वाला संकट रोजगार देने वाले अमीर राज्यों और श्रम बल मुहैया कराने वाले पिछड़े राज्यों, दोनों के लिए तबाही लेकर आ सकता है.

लॉकडाउन का पूरा श्रेय तो मोदी ले जायेंगे, पर इसे खोलने के जोखिम में वो राज्यों की हिस्सेदारी चाहते हैं

राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के अपने 24 मार्च के फैसले के लिए सराहे गए प्रधानमंत्री मोदी को मालूम है कि लॉकडाउन बढ़ाना हो या उसमें ढील देना, दोनों ही फैसलों से कोई खास राजनीतिक लाभ नहीं मिलने वाला है.

विपक्ष कुछ भी दलील दे, कोविड के खिलाफ लड़ाई में आंकड़े मोदी सरकार की सफलता की ओर ही इशारा करते हैं

कोविड प्रभाव के आधार पर देश के क्षेत्रों को जोन में विभाजित करने का एक लाभ यह नजर आता है कि सरकार कोरोना के खिलाफ लड़ाई और जनजीवन की सहूलियत, दोनों पर ध्यान दे सकेगी. सरकार के सामने देश की स्थिति की स्पष्ट तस्वीरें होगी.

कोरोना संकट के बीच राहुल गांधी की रघुराम राजन से हुई बातचीत दिखाती है कि कांग्रेस के पास कोई उपाय नहीं है

सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस से यह उम्मीद तो की ही जा सकती है कि वह वास्तविकताओं का ख्याल रखते हुए सरकार की आलोचना करे और यथार्थपरक समाधान पेश करे. 

हालात सामान्य हैं पर सबको लॉकडाउन करके रखा है, मोदी सरकार ने कैसे देश को अक्षम बनाने का जोखिम उठाया है

भारत को धीरे-धीरे अपने कामकाज पर लौटाने की जरूरत थी, बजाय कि देश को लॉकडाउन की मूर्छा से बाहर न निकालकर रेड, ग्रीन, ऑरेंज जोन में सेलेक्टिव तौर पर खोलने की.

कोरोना महामारी में लोकतंत्र को कोसने वाले ध्यान रखें, तानाशाह के लिए भी तानाशाही अच्छी नहीं

जिंदगी केवल एक बार किसी महामारी के दौरान बच निकलने के बारे में ही नहीं है. इसके मायने उससे भी अधिक हैं. ये कला, साहित्य, सिनेमा और सबसे महत्वपूर्ण हर तबके के लोगों से जुड़ने के बारे में भी है.

हिंदुओं और मुसलमानों के बीच अविश्वास कोविड महामारी से लड़ाई में बाधक है, मोदी सरकार ऐसा कभी नहीं चाहेगी

माहौल को खराब करने की कोशिश करने वालों को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की बातों पर ध्यान देना चाहिए जिन्होंने तुच्छ राजनीतिक उद्देश्यों के ऊपर राष्ट्रीय हितों को तरजीह दिए जाने पर ज़ोर दिया है.

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गुज़ारा करने के लिए कर्ज़ा: भारतीय परिवार ज़्यादा बचत करते हैं, फिर भी क्यों हैं कर्ज़ में?

आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि छह साल में पर्सनल लोन तीन गुना हो गए हैं और कर्ज़ चुकाने में चूक बढ़ी है; सोशल मीडिया से बनी लाइफस्टाइल को बनाए रखने के लिए मिडिल क्लास कर्ज़ ले रहा है, जबकि असली मज़दूरी आधी रह गई है.

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दिल्ली: जनवरी 2026 में औसत एक्यूआई 307 रहा

नयी दिल्ली, 30 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस साल जनवरी में पिछले वर्ष की तुलना में वायु गुणवत्ता में मामूली गिरावट देखी...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

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