आसिम मुनीर से पहले जितने जनरल हुए, उन सबको यही सबक मिला कि पाकिस्तानी जिहादवाद को अपनाना खतरनाक ही साबित हुआ है, और यह ज़्यादातर समय बस थोड़े वक्त का ही प्रयास रहा.
समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता ऐसे शब्द हैं जिन्हें भाजपा नेता न पूरी तरह अपनाना चाहते हैं और न ही खुले तौर पर नकार पा रहे हैं. इसी उलझन की वजह से पार्टी अब इन विचारों का अपना मतलब गढ़ने की कोशिश कर रही है और वह भी थोड़े अटपटे और बेतुके तरीके से.
ईरान ने अमेरिका से इसका बदला लेने का संकल्प लिया, लेकिन उसने बैलिस्टिक मिसाइलों से मुख्यतः इजरायल को ही निशाना बनाया. इजरायल ने भी परमाणु अड्डों और सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाते हुए हवाई हमले लगातार जारी रखे.
ममदानी की मान्यताएं, गज़ा के लिए उनका समर्थन, मोदी या नेतन्याहू के प्रति उनकी नापसंद आदि की वजह से भारत में कई लोग उनके उत्कर्ष को एक और ‘भारतीय विजय’ के रूप में नहीं मना सकते हैं.
1964 में गुजरात के दौरे ने लाल बहादुर शास्त्री को त्रिभुवनदास के. पटेल द्वारा स्थापित और वर्गीज़ कुरिएन द्वारा कुशलता से प्रबंधित डेरी के सहकारी मॉडल के लाभों के बारे में कायल कर दिया था.
रूस और चीन इस स्थिति में हैं कि संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी जैसी बहुपक्षीय संस्थाओं के जरिए वैश्विक प्रयास का नेतृत्व कर सकें.
कई लिहाज़ से कमजोर होने के बावजूद ईरान दूसरों को धमकियां देता रहा है और गिर-जिम्मेदाराना हरकतें करता रहा है, लेकिन आतंकवादी रणनीति आपको यहीं तक पहुंचा सकती है.
फील्ड मार्शल असिम मुनीर के प्रति ट्रंप की बेहद गर्मजोशी भरी मेज़बानी ने भारत में काफी चिंता पैदा की है. 26/11 के बाद पहली बार ऐसा लग रहा है कि अमेरिका इस्लामाबाद की ओर झुकता दिख रहा है.