देश की कोयला खदानों को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोलने के ऐलान के बाद क्लीन एनर्जी, खासकर सौर ऊर्जा पर भारत की प्रतिबद्धता को लेकर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं.
मुझे दो सप्ताह पहले टेस्ट में कोविड-19 पॉजिटिव होने का पता चला. एक देश के तौर पर हम हालात को अवश्य पलटेंगे, बशर्ते कि हम ज़मीनी डेटा को लेकर सतर्क रहें, और कार्यान्वयन के अपने प्रयासों को बढ़ाएं.
यूपी सरकार महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता, कन्या शिक्षा, नेतृत्व संवर्धन तथा सामाजिक सशक्तिकरण के लिए मार्ग प्रशस्त कर रही है ताकि एक ऐसे परिवेश का निर्माण किया जा सके जिसमें महिलाएं अपनी पूर्ण क्षमता का उपयोग कर सकें.
आज के भारत के जिस नक्शे में पूरे अक्साई चीन को भारतीय क्षेत्र दिखाया गया है वह सबसे पहले 1950 के दशक में नेहरू के आदेश पर बनाया गया था. चीन के पास इस दावे का कोई ठोस ऐतिहासिक आधार नहीं था.
मोदी सरकार ही पंतजलि से कोरोनिल को कोविड की 'दवा' के तौर पर प्रचारित न करने का निर्देश दे चुकी है लेकिन भ्रामक हैशटैग रोकने या स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रचार को रोकने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने कुछ खास नहीं किया है.
चीन की तमाम फौजी तैयारी और जमावड़ा बल प्रयोग की कूटनीति का हिस्सा हो तो भी भारत को यही मान कर चलना चलना चाहिए कि जंग का खतरा वास्तविक है और उसे इसके लिए तैयार रहना है.
जानकारी को इंटेलिजेंस में बदलने के लिए, निर्णय लेने वाले सूत्रों की तरफ से, कुछ पुष्टिकरण की ज़रूरत होती है. एक ऐसे देश के मामले में, जिसका अपारदर्शिता में कोई सानी नहीं है, ये काम असंभव नहीं, लेकिन मुश्किल ज़रूर है.
सांप्रदायिक मुद्दे हों, अंधविश्वास पर चोट करना हो या समाज के हाशिए के तबके पर पड़े लोगों के सवाल हों, एसपी ने इन बारीक और समाज के भीतर जम चुकी समस्याओं को अपनी लेखनी और प्रस्तुति के जरिए दुनिया के सामने रख दिया.
शी जिंपिंग के सशक्त नेतृत्व वाले आधुनिक चीन का मानना है कि बीजिंग सार्वभौमिक शक्ति संरचना का केंद्र है और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीसीपी) का पूंजीवादी चरित्र विश्व की अगुआई करने के लिए पूर्वनिर्धारित है.
दीन दयाल उपाध्याय की हत्या और माधवराव सिंधिया के प्लेन क्रैश से लेकर गांधी परिवार की हत्याओं तक, राजनीति में जो कुछ भी होता है, उसका हिसाब-किताब से कम और किस्मत से ज़्यादा लेना-देना होता है.
याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि नियमों में रैगिंग को शामिल नहीं किया गया, यह मान लिया गया कि सिर्फ कुछ ही जातियां भेदभाव कर सकती हैं. बेंच ने नियमों की समीक्षा के लिए समाजशास्त्रियों की विशेषज्ञ समिति बनाने का सुझाव दिया.