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Thursday, 29 January, 2026
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सोलर एनर्जी का अगुआ बनने वाला भारत कोयले की कालिख की शरण में

देश की कोयला खदानों को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोलने के ऐलान के बाद क्लीन एनर्जी, खासकर सौर ऊर्जा पर भारत की प्रतिबद्धता को लेकर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं.

मैं एक सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाहकार हूं जिसे कोविड हुआ, यह है दिल्ली और मोदी सरकार को मेरी सलाह

मुझे दो सप्ताह पहले टेस्ट में कोविड-19 पॉजिटिव होने का पता चला. एक देश के तौर पर हम हालात को अवश्य पलटेंगे, बशर्ते कि हम ज़मीनी डेटा को लेकर सतर्क रहें, और कार्यान्वयन के अपने प्रयासों को बढ़ाएं.

शिक्षा और प्रशिक्षण में निवेश बढ़ाकर कैसे चीन का मुकाबला कर सकता है भारत

भारत को अगले कुछ दशकों में यदि चीन को पीछे छोड़ना है तो उसे चीन को कमजोर करने की रणनीति के साथ अपने को मजबूत करने की नीति पर भी काम करना होगा.

कोरोना काल में योगी सरकार की मदद से उत्तर प्रदेश की महिलाएं कैसे बन रही हैं आत्मनिर्भर

यूपी सरकार महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता, कन्या शिक्षा, नेतृत्व संवर्धन तथा सामाजिक सशक्तिकरण के लिए मार्ग प्रशस्त कर रही है ताकि एक ऐसे परिवेश का निर्माण किया जा सके जिसमें महिलाएं अपनी पूर्ण क्षमता का उपयोग कर सकें.

देशों की सीमाएं गढ़ी हुई वास्तविकताएं होती हैं, वैश्विक राजनीति में इसे अप्रासंगिक नहीं बनाया जा सकता

आज के भारत के जिस नक्शे में पूरे अक्साई चीन को भारतीय क्षेत्र दिखाया गया है वह सबसे पहले 1950 के दशक में नेहरू के आदेश पर बनाया गया था. चीन के पास इस दावे का कोई ठोस ऐतिहासिक आधार नहीं था.

रामदेव की कोरोनिल ने सोशल मीडिया की भ्रामक सूचनाओं के खिलाफ जंग में कैसे मुश्किलें बढ़ाईं

मोदी सरकार ही पंतजलि से कोरोनिल को कोविड की 'दवा' के तौर पर प्रचारित न करने का निर्देश दे चुकी है लेकिन भ्रामक हैशटैग रोकने या स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रचार को रोकने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने कुछ खास नहीं किया है.

फौजी जमावड़ा कर चीन युद्ध की धमकी दे रहा है, भारत को इसे सही मानकर तैयार रहना चाहिए

चीन की तमाम फौजी तैयारी और जमावड़ा बल प्रयोग की कूटनीति का हिस्सा हो तो भी भारत को यही मान कर चलना चलना चाहिए कि जंग का खतरा वास्तविक है और उसे इसके लिए तैयार रहना है.

एलएसी संघर्ष को ‘खुफिया विफलता’ कहना गलत है यह भारत की वास्तविक समस्या को नजरअंदाज करता है

जानकारी को इंटेलिजेंस में बदलने के लिए, निर्णय लेने वाले सूत्रों की तरफ से, कुछ पुष्टिकरण की ज़रूरत होती है. एक ऐसे देश के मामले में, जिसका अपारदर्शिता में कोई सानी नहीं है, ये काम असंभव नहीं, लेकिन मुश्किल ज़रूर है.

सुरेंद्र प्रताप सिंह: अखब़ार, टेलीविजन और फिल्मी पर्दे तक हाशिए पर पड़े लोगों का पत्रकार

सांप्रदायिक मुद्दे हों, अंधविश्वास पर चोट करना हो या समाज के हाशिए के तबके पर पड़े लोगों के सवाल हों, एसपी ने इन बारीक और समाज के भीतर जम चुकी समस्याओं को अपनी लेखनी और प्रस्तुति के जरिए दुनिया के सामने रख दिया.

चीन का समय खत्म हो गया, भाजपा-कांग्रेस को मौजूदा संकट के समय एकजुटता दिखानी चाहिए

शी जिंपिंग के सशक्त नेतृत्व वाले आधुनिक चीन का मानना है कि बीजिंग सार्वभौमिक शक्ति संरचना का केंद्र है और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीसीपी) का पूंजीवादी चरित्र विश्व की अगुआई करने के लिए पूर्वनिर्धारित है.

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अजित पवार की मौत ने भारतीय राजनीति में एक और ‘क्या होता अगर’ वाली बहस छोड़ दी है

दीन दयाल उपाध्याय की हत्या और माधवराव सिंधिया के प्लेन क्रैश से लेकर गांधी परिवार की हत्याओं तक, राजनीति में जो कुछ भी होता है, उसका हिसाब-किताब से कम और किस्मत से ज़्यादा लेना-देना होता है.

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UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक: कोर्ट ने क्यों कहा ‘पिछड़े’ और समाज के लिए खतरनाक

याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि नियमों में रैगिंग को शामिल नहीं किया गया, यह मान लिया गया कि सिर्फ कुछ ही जातियां भेदभाव कर सकती हैं. बेंच ने नियमों की समीक्षा के लिए समाजशास्त्रियों की विशेषज्ञ समिति बनाने का सुझाव दिया.

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.