पाकिस्तान में किसी ने भी कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की कोविड हेयरस्टाइल या दाढ़ी पर चर्चा नहीं की होगी लेकिन ये बात भी है कि वो हमारे सबसे पसंदीदा पड़ोसी नहीं हैं.
कुछ साल पहल् जब सीबीआई जब कोलकाता के पुलिस प्रमुख राजीव कुमार के घर पहुंचीं थी तो ममता बीचबचाव के लिए वहां फौरन पहुंच गईं थी. अब अभिषेक बनर्जी को स्वयं के परिवार के बचाव में अकेले खड़ा रहना पड़ रहा है.
वाजपेयी सरकार के जमाने में आरएसएस अपनी वैचारिक दासी भाजपा पर पकड़ बनाए रखने को उतावला दिखता था, तो अब वह मोदी की राजनीतिक पूंजी का पूरा लाभ उठाने की फिराक में है.
भारतीयों से पूछिए कि उनके लिए सबसे ज़्यादा अहम क्या है, और संभावना है कि अधिकांश लोग कहेंगे मेरा परिवार. लेकिन बहुत अजीब बात है कि भारत जैसे देश में, जो परिवार को ब्रह्माण्ड के केंद्र में रखता है, कुछ भारतीयों को परिवार नसीब ही नहीं होता.
क्या किसी ने सच में यह जांचा कि चर्च जाने के बावजूद उन्होंने हिंदू रीति-रिवाज़ बनाए रखे थे या नहीं? यह पता नहीं है, क्योंकि इसके लिए किसी व्यक्ति की निजी ज़िंदगी में और गहरी जांच करनी पड़ती, और कोई भी राज्य इतने लोगों की निजी ज़िंदगी में इतना अंदर तक नहीं जा सकता.