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Monday, 23 February, 2026
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असहिष्णु से असुरक्षित राष्ट्रवाद तक पहुंच गया है मोदी का भारत : पृथ्वीराज चह्वाण

मोदी सरकार किसान आंदोलन से निबटने के लिए जो कुछ कर रही है उससे उदार लोकतांत्रिक देश वाली हमारी छवि धूमिल हो रही है, सरकार को भूलना नहीं चाहिए कि हर नागरिक को अपनी आवाज़ उठाने का अधिकार है.

इमरान ख़ान का पाकिस्तान बात करना चाहता है. पर मोदी का जवाब एक ही रहा -‘बात नहीं, सिर्फ व्हाट्सएप’

पाकिस्तान की कश्मीर नीति का कभी कोई अन्त नहीं होगा. अगर इसका मतलब ये भी हो कि उससे वार्ता करने वाला कोई न हो और उसे अपने से ही बातचीत आयोजित करनी पड़े

योगी नहीं, मायावती, अखिलेश, राहुल की विफलता, 2017 के बाद से यूपी की बड़ी राजनीतिक कहानी है

जबकि एक साल बाद ही यूपी विधानसभा का चुनाव होने वाला है, सभी विपक्षी दल—सपा, बसपा, कांग्रेस और रालोद भी— जहां के तहां खड़े नज़र आ रहे हैं. वे एक कदम भी आगे बढ़े हों ऐसा नहीं दिखता.

नरेंद्र मोदी देश पर ऐसे राज कर रहे हैं मानो भारत एक राज्य है और वह अब भी एक मुख्यमंत्री हैं

 प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय राजधानी में उन्हीं पैंतरों को आजमाया है जो उन्हें भली भांति समझ आते हैं—'सीएम मॉडल ऑफ गवर्नेंस’ की जांची-परखी कार्यशैली.

‘रन ऑफ दि रिवर’ जैसी फर्जी तकनीकों से लोगों को बेवकूफ बनाया जा सकता है, हिमालय को नहीं

बहरहाल चमोली के इस आमंत्रित हादसे में सौ से ज्यादा लोगों की बलि दी गई है. चूंकि बलि मजदूरों की दी गई है इसलिए मामला जल्दी ही शांत हो जाएगा. विकास की गति तेज है उसे रोका नहीं जा सकता.

क्यों प्रधानमंत्री मोदी को अपने इर्द-गिर्द जमा कागजी शेरों को लेकर चिंता होनी चाहिए

प्रधानमंत्री मोदी के कागजी शेर टीवी और ट्विटर पर विपक्ष के खिलाफ खूब दहाड़ते हैं, लेकिन उनमें से कोई भी लुटियंस की दिल्ली से निकलकर सिंघू, टिकरी और गाज़ीपुर बॉर्डर तक नहीं जाता.

लोकतांत्रिक सूचकांक में भारत का फिसलना चिंताजनक, क्या लोकतंत्र सच में कल्पना में रह गया है

जब हमारे सत्ताधीश हमारे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का आधा हिस्सा हजम कर गये हैं, हम क्या कर रहे हैं? उसे दुनिया का सबसे बढ़िया लोकतंत्र बनाने का कोई सपना हमारे पास बचा है या नहीं?

कृषि कानूनों पर मोदी सरकार को व्यापक स्वीकृति हासिल करनी होगी

किसान ही नहीं, दूसरे तबकों को भी यकीन होने लगा है कि दिल्ली की गद्दी पर बैठी सरकार अब उसका प्रतिनिधित्व नहीं करती. इसका अर्थ यह हुआ कि सरकार चाहे बड़ी आसानी से कानून बना ले, उसे देखना होगा कि उन्हें व्यापक स्वीकृति कैसे हासिल होगी.

सिख अलगाववाद के वजूद की लड़ाई लड़ रहा है, किसान आंदोलन से अगर ढंग से न निपटे तो आग लग सकती है

पंजाब में जरनैल सिंह भिंडरांवाले की आज कुछ-कुछ वैसी ही स्थिति है जैसी 1970 के दशक में चे ग्वेरा की स्थिति युवाओं के बीच थी.

मोदी सरकार कृषि कानून की लड़ाई हार चुकी है, अब सिख अलगाववाद का प्रेत जगाना बड़ी चूक होगी

कृषि क़ानूनों पर जंग तो मोदी सरकार हार ही चुकी है, अब अगर वह किसानों के आंदोलन को लेकर सिख अलगाववाद का राग अलापती रहेगी तो और भी गंभीर भूल करेगी

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AI समिट पर घिरी मोदी सरकार को यूथ कांग्रेस के विरोध से मिला राहत का मौका

रणनीतिक तौर पर, बिना शर्ट वाला यह प्रदर्शन आत्मघाती गोल से भी बुरा था. अचानक, AI समिट की सारी गड़बड़ियां भूला दी गईं और यूथ कांग्रेस का विरोध ही मुद्दा बन गया.

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रांची में एक व्यक्ति की हत्या के आरोप में पांच लोग गिरफ्तार

रांची, 23 फरवरी (भाषा) रांची में एक व्यक्ति की हत्या करने के आरोप में एक दंपति सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.