केवल असम में सत्ता बचाए रखना ही भाजपा के लिए जश्न मनाने का पर्याप्त कारण नहीं होगा. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी से सत्ता छीनना पार्टी की असल जीत होगी.
एलएसी पर सेनाओं की वापसी की पहली कार्रवाई के एक महीने बाद ऐसा लग रहा है कि वह सब चीन और भारत के लिए अपनी-अपनी जीत के दावे करने भर के लिए किया गया उपक्रम था.
आत्मबोधानंद 27 साल के एक युवा ‘विकास विरोधी संत’ है. वे कंप्युटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं और पिछले कई सालों से हरिद्वार के मातृ सदन में रह रहे हैं.
एस जयशंकर जानते होंगे कि इन दिनों भारत लोकतंत्र की हर रेटिंग में नीचे खिसका है और मानवाधिकारों के बाबत प्रकाशित रिपोर्टों में इस मोर्चे पर भारत की खस्ताहाली पर बड़ी चिंता जाहिर की गई है.
जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष का पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ने का फैसला भारत में वामपंथ के पतन की एक बुनियादी वजह में सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है.
अगर अमेरिका और चीन के बीच तनाव उबलता रहा और पूरी तरह एक ‘शीत युद्ध’ में तब्दील हो गया, तो हॉन्गकॉन्ग दोनों शक्तियों के बीच प्रतिद्वंदिता का केंद्र बन जाएगा.
केरल में एलडीएफ शासनकाल ने मुख्यमंत्री के आसपास कभी इस तरह का व्यक्तित्व नहीं गढ़ पाया है. विजयन के विरोधी तो उनकी तुलना मोदी से करने की हद तक पहुंच गए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को उपासना स्थलों के कानून को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर अपनी अपनी राय रखने को कहा है.उसका जवाब भारत के परिदृष्य को बदल देगा.
कांशीराम की राजनीतिक सफलता ने भारत में लोकतंत्र और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति वंचित तबकों में एक गहरा विश्वास पैदा किया. ‘समता एवं स्वाभिमान के लिए’ के नाम से शुरू किए गए उनके सतत संघर्ष ने भारत में आज़ादी की नींव को और मज़बूत किया.
रणनीतिक तौर पर, बिना शर्ट वाला यह प्रदर्शन आत्मघाती गोल से भी बुरा था. अचानक, AI समिट की सारी गड़बड़ियां भूला दी गईं और यूथ कांग्रेस का विरोध ही मुद्दा बन गया.