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Tuesday, 13 January, 2026
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ममता बनर्जी बनाम नरेंद्र मोदी- पश्चिम बंगाल में कैसे टूट रही हैं राजनीतिक मर्यादाएं

मोदी कहते हैं कि नेताजी होते तो देश का आज का पराक्रम देखकर खुश होते लेकिन जानकार बताते हैं कि प्रधानमंत्री जिस आरएसएस की विरासत थामे हुए हैं, नेताजी उसे पनपने के पहले उखाड़कर फेंक देना चाहते थे.

गणतंत्र दिवस परेड को लेकर सवाल उठ रहे हैं लेकिन इस समारोह के लिए इससे बेहतर समय नहीं हो सकता

परेडों से दुनिया को यही संदेश जाता है कि देश की सुरक्षा क्षमता कितनी मजबूत है और वह विश्व समुदाय में एक भरोसेमंद सदस्य की तरह कितनी बड़ी भूमिका निभा सकता है. 

मुनव्वर फारुकी कोई खूंखार अपराधी नहीं, उसे जमानत देने से मना करने का उद्देश्य मुस्लिमों को सबक सिखाना है

मुनव्वर फारुकी के मामले में जो कुछ भी हो रहा है वह जानबूझकर तंग किए जाने का स्पष्ट मामला है लेकिन यहां उद्देश्य एक समुदाय विशेष को परेशान करना है, न कि किसी व्यक्ति मात्र को.

भारत कहे ‘नमस्ते बाइडन’, US को इरान पर प्रतिबंधों में ढील के लिये मनाए वर्ना चीन से पिछड़ जाएगा

नई दिल्ली को नहीं भूलना चाहिए, कि अमेरिका का चीन से रिश्तों का एक अलग प्रक्षेप पथ है, जो उसके राष्ट्रीय हितों पर आधारित है.

भारत की खेतीबाड़ी में अब तक क्यों उपेक्षित है ‘आधी आबादी’ का संकट

असल में भारत में महिलाओं के संकट को समझने से पहले हमें भारत की खेती की बुनियादी समस्या में जाना होगा.

भारतीय अर्थव्यवस्था का भविष्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बजाय सेवा क्षेत्र पर निर्भर करेगा

शायद यह कबूल करने का समय आ गया है कि भारत पूर्वी-एशियाई देशों या बांग्लादेश तक की मैन्युफैक्चरिंग की कहानी को दोहराने नहीं जा रहा है.

कर्पूरी ठाकुर ने बिहार के हाशिये के तबकों के लिए अपने राजनीतिक जीवन को संघर्ष में झोंका

कर्पूरी की नैतिकता और ईमानदारी को समझने के लिए जानना चाहिए कि लंबी राजनीति पारी के बाद उनका निधन हुआ तो एक मकान तक उनके नाम नहीं था. न पटना में, न ही अपने पैतृक घर में वे एक इंच भी जमीन जोड़ पाए थे.

वो 7 कारण जिसकी वजह से मोदी सरकार ने कृषि सुधार कानूनों से हाथ खींचे

कृषि सुधार मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की बड़ी उपलब्धि बन सकते थे मगर समझदारी तथा धैर्य की कमी और अतीत के प्रति नफरत ने इसे एक संकट में बदल दिया है.

नरवणे ने पीएम का जिक्र कर भूल की, उन्हें पता होना चाहिए कि नेहरू ने करिअप्पा से क्या कहा था

ऊपर के पदों पर माथा टेकने वालों को बैठाने की तमाम कोशिशों के बावजूद सेना राजनीति से अछूती रही लेकिन अब वह राष्ट्रवादी विचारधारा के जुनून में फंस रही है.

यह वो बड़ा खुलासा है जो बताता है कि भारत और इजरायल 1947 से ही पाकिस्तान को फंड कर रहे

विरोधियों पर भारत और इजरायल के सबसे अच्छे दोस्त होने का ठप्पा लगा देना पाक में एक पसंदीदा शगल है. सार्वजनिक रूप से उपलब्ध इन तस्वीरों का पाकिस्तानियों की दुनिया में कुछ और ही मतलब होता है.

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जेन-Z आंदोलन के बाद फिर पुरानी राजनीति, नेपाल की पार्टियां ‘स्टार्टिंग पॉइंट’ पर लौटीं

एक स्थिर नेपाल के लिए आगे का रास्ता लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने, समावेशी संवाद के जरिए राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने और कानून के शासन को बनाए रखने में है.

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कमल के नाम को राजनीति से क्यों जोड़ा जाए: सुरेश गोपी

त्रिशूर (केरल), 13 जनवरी (भाषा) केरल में स्कूल कला महोत्सव के आयोजन स्थलों के नाम फूलों के आधार पर रखे जाने को लेकर उठे...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.