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Sunday, 12 April, 2026
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पोलियो, कुष्ठ रोग की लड़ाई में वैज्ञानिक डेटा भारत की ताकत थी. कोविड में, यह एक साइलेंट विक्टिम है

पहली लहर के बाद, वैज्ञानिक विशेषज्ञ हाशिये पर चले गए. जनवरी में, कोविड टास्क फोर्स ने मीटिंग तक बंद कर दिया था.

कोविड का मुकाबला करने के लिए RSS ने शुरू किया अभियान, राहत कार्यों की रणनीति भी बदली

आरएसएस प्रमुख सर संघचालक मोहन भागवत मई के दूसरे सप्ताह में राष्ट्र को संबोधित करेंगे. मकसद है देश में फैले भय और अनिश्चितता को दूर एक सकारात्मक माहौल तैयार करना.

कोरोनाकाल के दौर में BJP में अपने ही अपनों पर सवाल उठाने लगे हैं

भाजपा के विधायकों से जब अपने चुनाव क्षेत्र में मिलने वाली चुनौतियों के बारे में पूछा जाता था तब वे कहा करते थे कि ‘अरे, मोदी जी हैं न!’, लेकिन कोविड ने उनसे उनकी यह निश्चिंतता छीन ली है.

धीरूभाई शेठ- देशज आधुनिकता के सिद्धांतकार और भारत के आंदोलनजीवियों के दोस्त

बहुत से समाजविज्ञानी जिन्हें लगता था कि भारत के गांव तो जाति की धुरी पर बने हुए हैं, मंडल की बहस के दौरान पाला बदलकर ये कहने लगे थे कि आरक्षण का आधार जाति नहीं हो सकती. दूसरी तरफ धीरूभाई थे जो दृढ़मत थे कि आरक्षण की नीति जाति के आधार पर तय की जानी चाहिए.

वीरा साथीदार: जिन्होंने थिएटर के जरिए 40 सालों तक जातिगत अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी

कोर्ट फिल्म में हमने जो देखा है, वो साथीदार की एक वृहत छवि है, उत्पीड़ित समुदायों के लिए असली प्रेरणा लेने का तरीका ये है कि उनकी सूक्ष्म छवि को पढ़ें और समझें, जो उनके काम, उनके आंदोलन, विरोध प्रदर्शन और उनकी कला में है.

ICU- 70 साल के बुजुर्ग या 30 साल की महिला के लिए? कोरोना की दूसरी लहर में डॉक्टर, नर्स मनोचिकित्सक का कर रहे रुख

भारत मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान नहीं देता है. दूसरी लहर ने इसे नकारे जाने को उजागर भी कर दिया है.

कोविड से हुई गड़बड़ियों के अलावा भारत की कहानी का दूसरा पहलू भी है, जो उम्मीद जगाता है

कोविड की महामारी से त्रस्त भारत को अच्छी खबरों की या सोचने के लिए किसी और विषय की तलाश है. ऐसे में यह खबर शायद कुछ मददगार हो.

असलियत को कबूल नहीं कर रही मोदी सरकार और भारतीय राज्यसत्ता फिर से लड़खड़ा रही है

पिछले सात वर्षों में मोदी सरकार ने बुनियादी शासन की नींव को मजबूत करने के लिए कुछ नहीं किया जिसका नतीजा यह है कि प्रधानमंत्री अपने कदम पीछे खींचते नज़र आ रहे हैं और उनके मंत्री विफल साबित हो रहे हैं जबकि कोविड का संकट गहराता जा रहा है.

केरल जैसा नहीं है बंगाल, ये BJP का नौसिखियापन था कि वो TMC की जीत के बाद शांति की उम्मीद कर रही थी

2016 के विधानसभा चुनाव में 3 सीटों से पांच वर्ष (2021) में 77 सीटों तक पहुंची भाजपा के लिए अब टीएमसी को उखाड़ फेंकना सिर्फ समय की बात है. ये काम चुनौती भरा ज़रूर है लेकिन असंभव नहीं है.

इमरान खान से ‘तूफान’ फिरदौस तक- पाकिस्तान सरकार को काम करते हुए दिखाने के लिए दो स्ट्रीट विज़िट

पाकिस्तान की सभी पार्टियों के सियासतदानों ने अतीत में रमज़ान महीने का इस्तेमाल PR के कामों के लिए किया है लेकिन सिर्फ इमरान खान ही ऐसे परस्पर-विरोधी शो का मुज़ाहिरा करने में कामयाब हुए हैं.

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दुनिया तेजी से बदल रही है—भारत को खुद को सुधारना, मजबूत करना और आर्थिक ताकत बढ़ानी चाहिए

आज निरंतर बदलती विश्व व्यवस्था भारत के लिए एक मौका उपलब्ध करा रही है जिसका लाभ उठाने के लिए उसे खुद को अनुशासित रखना होगा ताकि पाकिस्तान जब अपने लिए मौका देख रहा है तब हम हड़बड़ी में कोई प्रतिक्रिया न कर बैठें.

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त्रिपुरा जनजातीय परिषद में पहले दो घंटों में 22 प्रतिशत मतदान दर्ज: अधिकारी

(तस्वीर सहित) अगरतला, 12 अप्रैल (भाषा) त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) के चुनाव के लिए रविवार को पहले दो घंटों में...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.