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Tuesday, 13 January, 2026
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आर्थिक व आजिविका की कठिनाइयों के बीच इस बजट में सबसे कमजोर परिवारों की सहायता बहुत जरूरी

कोविड महामारी के कारण जनसाधारण को इतनी कठिनाईयां सहनी पड़ी हैं कि आगामी केन्द्रीय बजट में उन्हें बड़ी राहत मिलनी ही चाहिए.

पाकिस्तान पर भारी रहा ये हफ्ता. टिक टॉक स्टार ने मुफ्ती को जड़ा झापड़, बाजवा ऑमलेट की लाईन में

मुफ्ती अब्दुल क़ावी का विवादों से पुराना रिश्ता रहा है. वे खुद को जन्नत का बंदा बताते हैं, लेकिन हर बार उनकी दुनियावी ख्वाहिशें उन पर हावी होती रही हैं

जैसे जैसे UP गर्त में जा रहा, योगी के सितारें बुलंद हो रहे हैं- इतने कि वो मोदी से लाइमलाइट की होड़ में है

योगी के राज में उत्तर प्रदेश की हालत शायद ही बेहतर हुई है लेकिन उनका अपनी राजनीतिक हैसियत इतनी जरूर बढ़ गई है कि मोदी को उस पर ध्यान देना पड़ रहा है.

भारतीय पर्यटक चीनियों को LAC से दूर रख सकते हैं. सरकार को सीमाओं को खोलना चाहिए

चीन की तुलना में हमारा शक्ति संतुलन हमें बलप्रयोग से अपनी जमीन वापस हासिल करने की छूट नहीं देता. लेकिन एलएसी पर बस्ती की बसावट, पर्यटकों की आवाजाही आदि से हम अपनी और जमीन खोने से बच सकते हैं

चीन की चुनौती के खिलाफ भारत की लड़ाई बजट 2021 से शुरू होनी चाहिए

वित्तीय संकट के बीच, भारतीय सशस्त्र बलों को भी अपने आधुनिकीकरण की योजनाओं को पूरा करने के लिए आवंटन में वृद्धि की उम्मीद है. मोदी सरकार को इसे पूरा करना होगा.

मोदी सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ की राजनीतिक सफलता

मोदी का सफर ‘एक सपने से दूसरे सपने तक’ का सफर कहा जा सकता है. अब इस नये नारे से मोदी ने अपनी सबसे बड़ी कमजोरी, अर्थव्यवस्था से निपटने के लिए अपनी सबसे मजबूत राजनीतिक पूंजी, राष्ट्रवाद का इस्तेमाल किया है

कांग्रेस के लिए अपना खुद का नरेंद्र मोदी ढूंढने का यह आखिरी मौका है

कांग्रेस को एक ईमानदार आंतरिक चुनाव की आवश्यकता है न कि गांधी परिवार निर्देशित नाटक की जिसमें कि बाकी नेताओं की महज सजावटी भूमिका होती है.

किसानों की ट्रैक्टर परेड से बहुत पहले बाबरी मस्जिद आंदोलन भी गणतंत्र दिवस के मौके पर विवाद का कारण बना था

1987 के असहभागिता और/या बहिष्कार के आह्वान की तुलना किसानों की 2021 की परेड के साथ नहीं की जा सकती. हालांकि, इन दोनों प्रकरणों को जोड़ने वाला एक साझा सवाल है.

भारतीय संविधान में राम के चित्र की अहमियत क्यों है

भारतीय संविधान तैयार होने के साथ ही इतिहास के चुनिंदा महात्माओं, गुरुओं, शासकों एवं पौराणिक पात्रों को दर्शाते हुए संविधान के अलग-अलग भागों में सजाया. प्रत्येक चित्र भारत की अनंत विरासत से एक सन्देश और उद्देश्य को व्यक्त करता है .

भारत के लोगों ने गणतंत्र को ऊंचे आसन पर बैठा दिया है और इस पर अमल करना भूल गए हैं

खुले तौर पर तो हम गणतंत्र के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं, संविधान की पूजा तक करते हैं मगर उसे व्यवहार में लाने की परवाह नहीं करते.

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जेन-Z आंदोलन के बाद फिर पुरानी राजनीति, नेपाल की पार्टियां ‘स्टार्टिंग पॉइंट’ पर लौटीं

एक स्थिर नेपाल के लिए आगे का रास्ता लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने, समावेशी संवाद के जरिए राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने और कानून के शासन को बनाए रखने में है.

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जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के पॉलीट्रॉमा गहन चिकित्सा इकाई में भरा पानी

जयपुर, 13 जनवरी (भाषा) जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के पॉलीट्रॉमा गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) के पास सोमवार देर रात पाइप से पानी का...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.