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Monday, 16 March, 2026
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बहुसंख्यकों की तानाशाही लोकतंत्र के एकदम विपरीत, आंबेडकर का लिखा हमें फिर से पढ़ने की जरूरत

आंबेडकर मानते थे कि लोकतंत्र की पहली और सबसे जरूरी शर्त है कि बड़े पैमाने की गैर-बराबरी ना हो, हर नागरिक के साथ शासन-प्रशासन बराबरी का बर्ताव करता हो.

जयशंकर की जबान फिसली, लाव्रोव का पाकिस्तान दौरा- क्यों भारत-रूस के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है

ताजा घटनाक्रम यही संकेत देता है ‘वक्त की कसौटी पर खरा उतरा’ भारत-रूस संबंध सिकुड़ गया है और इसकी वजह यह है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की भावनाओं की पर्याप्त परवाह नहीं कर रहे हैं.

कुंभ पर चुप्पी भारतीयों की इस सोच को उजागर करती है कि सिर्फ मुसलमान ही कोविड फैलाते हैं

सत्य से अधिक मुक्तिदायक और कुछ नहीं होता. और सच ये है कि भारत में सांप्रदायिकता गहरे तक समाई हुई है.

असम में कांग्रेस के चुनाव अभियान में छिपे हैं राहुल के लिए कई सबक

कांग्रेस पार्टी ने असम में जो चुनावी रणनीति अपनाई वह 2 मई को नतीजों की घोषणा के बाद कामयाब साबित हो या नहीं, मगर राहुल गांधी इसे आगे आजमाने पर विचार कर सकते हैं.

नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक युद्ध की बात एकदम बेतुकी- बस्तर जाकर देखिए, वहां अरसे से युद्ध जारी है

लड़ाई जीतने के लिए, आपको विरोधी को अच्छे से समझने की आवश्यकता होती है. ये कोई अलगाववादी आंदोलन नहीं है, इसमें अलग राज्य की मांग नहीं है.

म्यांमार, बेलारूस, हांगकांग, रूस को ही देखिए, इतिहास गवाह है कि क्रांतियां अपनी संतानों को ही खा जाती हैं

ऐसा लगता है कि आंदोलन शुरू करना तो आसान है मगर उसकी दिशा को नियंत्रित करना मुश्किल है. यही वजह है कि लोगों ने जहां दमनकारी शासकों का तख़्ता पलटकर नये शासकों को बैठाया उनमें से कई जगहों में उनकी किस्मत नहीं बदली.

अयोध्या, काशी, मथुरा- ज्ञानवापी मस्जिद पर अदालत का फैसला ‘अतीत के प्रेतों’ को फिर से जगाएगा

ज्ञानवापी मस्जिद पर वाराणसी की जिला अदालत का आदेश इस उम्मीद को तोड़ता है कि अयोध्या में जो कुछ हुआ उसे अब दोहराया नहीं जाएगा, गड़े मुर्दों को उखाड़ते रहना विनाश को बुलावा देना ही है.

पाकिस्तान का शांति प्रस्ताव बिल्कुल स्पष्ट था लेकिन आशावादी भारतीय इसे पढ़ने में असफल रहे

जब पाकिस्तान की आर्थिक समन्वय समिति (ईसीसी) ने, ज़मीन और समुद्र के रास्ते भारत से चीनी, कपास, और कपास के धागों के आयात को मंज़ूरी दी, तो हमने ये मान लिया कि भारत-पाकिस्तान मिलनसारी के पुराने अच्छे दिन लौट आए हैं.

यूट्यूब से लेकर ट्विटर स्पेस तक, भारत-पाकिस्तान के बीच दुश्मनी एक अलग ही स्तर पर पहुंच चुकी है

ट्विटर स्पेस पर भारत-पाकिस्तान के बारे में कोई भी बात हो तो स्थिति किसी सड़क हादसे के बाद वाले एकदम खांटी देसी माहौल जैसी हो जाती है. दो लोगों की मोटर बाइक आपस में टकरा गई और 100 लोग सिर्फ यह देखने के लिए जमा हो गए कि आखिर चल क्या रहा है.

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अवामी लीग को तुरंत नए नेतृत्व की ज़रूरत, लेकिन वह इसे गलत जगहों पर ढूंढ रही है

अवामी लीग को अभी इस सवाल का जवाब नहीं चाहिए कि हसीना के बाद कौन होगा या यह बहस कि हसीना को बांग्लादेश लौटना चाहिए या नहीं, बल्कि ज़मीन पर नया नेतृत्व चाहिए.

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फोनपे ने आईपीओ के जरिये शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की प्रक्रिया अस्थायी तौर पर रोकी

नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) डिजिटल भुगतान एवं वित्तीय सेवा मंच फोनपे ने वर्तमान भू-राजनीतिक संघर्ष और बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण अपनी...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.