दूसरे विश्व युद्ध के दौरान आपात लैंडिंग वाली हवाई पट्टियों के मामले में भारत अग्रणी था, अब लंबे समय बाद इसे फिर से शुरू करने से भारतीय वायु सेना को नयी ताकत मिलेगी.
बहुसंख्यक हों या अल्पसंख्यक, सबकी अपेक्षाओं का स्रोत हमारा संविधान ही है. जो इन अपेक्षाओं को न समझने का दिखावा करते हैं वे संवैधानिक नैतिकता की उपेक्षा करते हैं.
‘तिरंगा यात्रा’ निकालने जैसा कदम उठाना यह बताता है कि आप ये आकलन करने में अक्षम है कि किस तरह की बातें उसके लिए मोदी से मुकाबला करने और दिल्ली से बाहर अपनी छाप छोड़ने में मददगार साबित होंगी.
सर्वे संस्था प्रश्नम को लगता है कि भाजपा की यह रणनीति लंबे समय में राजनैतिक रूप से रंग ला सकती है, क्योंकि पाटीदार मतदाता विजय रूपाणी जैसे जाने-माने पर गैर-पाटीदार शख़्श की तुलना में एक अज्ञात पर अपने समुदाय के नेता को ज़्यादा पसंद करते हैं.
रूस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पात्रुशेव दिल्ली आए, पुतिन ने मोदी को फोन किया, मध्य एशिया की खातिर रूस के साथ अपने रिश्ते को फिर से मजबूत बनाना भारत के हित में ही होगा.
अपनी मातृभाषा व राष्ट्रभाषा से ही नहीं, जमीन व विरासत तक से कटाव को अभिशप्त हमारी नई पीढ़ी का एक बड़ा हिस्सा हिन्दी की उतनी भी सेवा नहीं कर पा रही, जितनी गुलामी के दौर में गिरमिटिये मजदूरों ने की थी.
एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.