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Thursday, 26 February, 2026
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क्या जाति आधारित जनगणना के लिए विपक्ष के दबाव के आगे झुकेगी मोदी सरकार

जनगणना के संबंध में 1951 से ही नीतिगत मामले के रूप में जाति आधारित जनगणना समाप्त कर दी गयी है. तब से अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के अलावा किसी अन्य जाति की गणना नहीं की गयी है.

मुल्ला बरादर जैसे तालिबानी नेताओं को कश्मीर में कोई दिलचस्पी नहीं है

अगले कुछ समय तक तो तालिबानी नेतृत्व हिसाब बराबर करने, मंत्री पद हथियाने और संभावित चुनौतियों से निपटने में इतना मशरूफ रहेगा कि उसे भारत की तरफ नज़र डालने की फुरसत नहीं रहेगी.

अमित शाह की लोकप्रियता में इजाफा नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए क्यों चिंताजनक है

हिंदुत्व की नीतियों को लागू करने के कारण अमित शाह की एक शक्तिशाली, कट्टर और तानाशाहीपूर्ण छवि बनी है. इस छवि के मद्देनजर शाह को प्रधानमंत्री के रूप में पसंद करने वालों की संख्या में इजाफा होना विचारणीय है.

अयोग्य राष्ट्रपति, अस्पष्ट नीति: बुश से लेकर बाइडन तक, अमेरिका के ‘वर्चस्व’ पर खतरा मंडराने लगा है

अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी उसी कड़ी का हिस्सा है जिसमें उसने सीरिया के गृहयुद्ध में बेवजह दखल देकर और इराक में सद्दाम को बेदखल करने के बाद सत्ता के घरेलू ढांचे को ध्वस्त करके दोनों जगह मुंह की खायी.

अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ‘टेररिस्तान’ को भूलकर भारत को क्यों समुद्री शक्ति पर ध्यान देना चाहिए

भारत इस दहशत में न पड़े कि कमजोर पड़ता पाकिस्तान एक नया ‘टेररिस्तान’ बना डालेगा. भारत के लिए यह जमीनी खतरों को भूलकर समुद्री ताकत बनाने पर ज़ोर देने का अच्छा मौका है.

मोदी की लोकप्रियता तेजी से घट रही है, देश बड़ी बेताबी से किसी विकल्प की तलाश में है

मूड ऑफ द नेशन सर्वे में देश के आर्थिक भविष्य को लेकर अब निराशावादियों की संख्या आशावादियों की तादाद पर भर भारी पड़ रही है.

सुष्मिता देव का दलबदल बताता है कि राहुल गांधी की ‘युवा कांग्रेस टीम’ बनने से पहले ही बिखर रही है

कांग्रेस से बड़े चेहरों का रुखसत होना संकेत है कि राहुल गांधी की ‘युवा कांग्रेस’ बनने से पहले ही बिखर रही है क्योंकि इस पुनर्निर्माण के जरूरी खंभे ही लापता हो रहे हैं.

संसद में कानून के प्रावधानों पर चर्चा जरूरी, CJI रमन्ना की चिंताओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए

अपेक्षा की जाती है कि विधायिका में निर्वाचित होने वाले सदस्य अनुभवी और अपने-अपने क्षेत्र में दक्षता रखने वाले होंगे ताकि वे जनकल्याण के निमित्त बनने वाले कानूनों में अपना महत्वपूर्ण योगदान कर सकें.

स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर बूढ़े भारत में जब आई फिर से नई जवानी थी

आज हमारा देश दुनिया का सबसे युवा देश है. लेकिन ‘गुमी हुई आजादी’ को फिर से हासिल करने के लिए बलिदानों की घड़ी आई तो भी इसने खुद को कुछ कम युवा नहीं पाया था.

अमेरिका की यूज एण्ड थ्रो पॉलिसी से 3 बार जूझने के बाद अब अफगानिस्तान के आगे क्या बचा है

इस बार अमेरिका ने अफगानिस्तान में न केवल युद्ध लड़ा बल्कि उसके नवनिर्माण में जज़्बात के साथ काफी वक़्त और धन भी दिया. लेकिन अंत में उसे एशिया का सीरिया बनने के लिए छोड़कर चल दिया.

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मुसलमानों को ‘गोली मारने’ वाले हिमंत बिस्वा सरमा के वीडियो पर कानून क्या कहता है

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण चुनाव जीतने की संभावना बढ़ाने के लिए किया गया लगता है, लेकिन एक बड़ा कानूनी सवाल है: क्या इससे उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है?

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राजनीति

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अलग कुओं की परंपरा से साझा थाली तक का सफर: महाराष्ट्र का सौंदला गांव हुआ ‘जाति-मुक्त’

मुंबई से 350 km दूर, सौंदला ने जाति को ‘सिर्फ़ कागज़ पर’ रखने का फ़ैसला किया है, गालियों पर रोक लगाई है, विधवाओं की दोबारा शादी का समर्थन किया है और स्टूडेंट्स के लिए 2 घंटे का नो-मोबाइल विंडो शुरू किया है.

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.