COAS और CDS दोनों हैसियत से जनरल बिपिन रावत की मीडिया में मौजूदगी ने, अपने पीछे बेतुकी बातों और विचारों का एक ऐसा सिलसिला छोड़ा है, जिसने अनावश्यक विवादों को जन्म दिया है.
अगर चन्नी वह सब करने में सफल रहे जो अमरिंदर पिछले चार सालों में नहीं कर पाए थे, तो गांधी परिवार के लिए उन्हें दरकिनार करना मुश्किल हो जाएगा. इससे सिद्धू के लिए राह कठिन ही होगी.
किसानों में छोटे और बड़े का विभाजन पैदा करके उन्हें जातीय अस्मिता की राजनीति में उलझाया जा रहा है. राजा महेन्द्र प्रताप सिंह के जाट होने की याद दिलाकर उनके नाम पर विवि के शिलान्यास के पीछे यही राजनीति है, जिसका उद्देश्य है पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुल जनसंख्या के 17 प्रतिशत से ज्यादा जाट किसानों को पटाना.
यह तथ्य कि हिंदुत्व में विश्वास रखने वाले सैंकड़ों लोग इस विचारधारा की प्रकृति पर विस्तार से बात करने वाले एक सम्मेलन को ध्यान से सुन रहे थे, वास्तव में उल्लेखनीय है.
योगी आदित्यनाथ ने भाजपा आलाकमान को सकते में डाल दिया है, अगले साल वे यूपी का चुनाव हार गए तो 2024 में भाजपा की उम्मीदों को झटका लगेगा लेकिन जीत गए तो यह जितनी योगी की जीत मानी जाएगी उतनी आलाकमान की भी.
इन परीक्षाओं से जुड़े छात्रों की बड़ी संख्या और इसमें बहुत कुछ दांव पर होने के मद्देनजर एनईईटी और जेईई के लिए जरूरी है कि वे विवादों को सावधानी से संभालें.
एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.