जनगणना के संबंध में 1951 से ही नीतिगत मामले के रूप में जाति आधारित जनगणना समाप्त कर दी गयी है. तब से अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के अलावा किसी अन्य जाति की गणना नहीं की गयी है.
अगले कुछ समय तक तो तालिबानी नेतृत्व हिसाब बराबर करने, मंत्री पद हथियाने और संभावित चुनौतियों से निपटने में इतना मशरूफ रहेगा कि उसे भारत की तरफ नज़र डालने की फुरसत नहीं रहेगी.
हिंदुत्व की नीतियों को लागू करने के कारण अमित शाह की एक शक्तिशाली, कट्टर और तानाशाहीपूर्ण छवि बनी है. इस छवि के मद्देनजर शाह को प्रधानमंत्री के रूप में पसंद करने वालों की संख्या में इजाफा होना विचारणीय है.
अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी उसी कड़ी का हिस्सा है जिसमें उसने सीरिया के गृहयुद्ध में बेवजह दखल देकर और इराक में सद्दाम को बेदखल करने के बाद सत्ता के घरेलू ढांचे को ध्वस्त करके दोनों जगह मुंह की खायी.
भारत इस दहशत में न पड़े कि कमजोर पड़ता पाकिस्तान एक नया ‘टेररिस्तान’ बना डालेगा. भारत के लिए यह जमीनी खतरों को भूलकर समुद्री ताकत बनाने पर ज़ोर देने का अच्छा मौका है.
कांग्रेस से बड़े चेहरों का रुखसत होना संकेत है कि राहुल गांधी की ‘युवा कांग्रेस’ बनने से पहले ही बिखर रही है क्योंकि इस पुनर्निर्माण के जरूरी खंभे ही लापता हो रहे हैं.
अपेक्षा की जाती है कि विधायिका में निर्वाचित होने वाले सदस्य अनुभवी और अपने-अपने क्षेत्र में दक्षता रखने वाले होंगे ताकि वे जनकल्याण के निमित्त बनने वाले कानूनों में अपना महत्वपूर्ण योगदान कर सकें.
आज हमारा देश दुनिया का सबसे युवा देश है. लेकिन ‘गुमी हुई आजादी’ को फिर से हासिल करने के लिए बलिदानों की घड़ी आई तो भी इसने खुद को कुछ कम युवा नहीं पाया था.
इस बार अमेरिका ने अफगानिस्तान में न केवल युद्ध लड़ा बल्कि उसके नवनिर्माण में जज़्बात के साथ काफी वक़्त और धन भी दिया. लेकिन अंत में उसे एशिया का सीरिया बनने के लिए छोड़कर चल दिया.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण चुनाव जीतने की संभावना बढ़ाने के लिए किया गया लगता है, लेकिन एक बड़ा कानूनी सवाल है: क्या इससे उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है?
मुंबई से 350 km दूर, सौंदला ने जाति को ‘सिर्फ़ कागज़ पर’ रखने का फ़ैसला किया है, गालियों पर रोक लगाई है, विधवाओं की दोबारा शादी का समर्थन किया है और स्टूडेंट्स के लिए 2 घंटे का नो-मोबाइल विंडो शुरू किया है.