केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी को नागालैंड में वंदे मातरम को लेकर वहां के विचारों पर चुप रहना पड़ेगा, अगर वह उस राज्य में सत्ता में बने रहना चाहती है, जहां 2028 की शुरुआत में चुनाव होने हैं.
चीन के डेवलपमेंट मॉडल के केंद्र में प्रॉपर्टी सेक्टर था—घरों का निर्माण, ज़मीन की बिक्री और रियल एस्टेट में निवेश. अब इस निर्भरता के नतीजे साफ दिखने लगे हैं.
हमें अपने राष्ट्रपति के प्रति किसी भी अपमान की निंदा करनी चाहिए, लेकिन द्रौपदी मुर्मू और ममता बनर्जी से जुड़ी घटना कई सवाल खड़े करती है, जिनमें कुछ असहज करने वाले भी हैं.
भारत ने खामोशी से यह कबूल लिया है कि अमेरिका कुछ मामलों में उसका मददगार है, तो कुछ दूसरे मामलों में एक अड़ंगा भी. भारत के उत्कर्ष की रफ्तार को धीमा करने में चीन और अमेरिका, दोनों का एक अबोला स्वार्थ है.
भारत धीरे-धीरे ऐसे मॉडल की ओर बढ़ रहा है जहां विकास सिर्फ महिलाओं तक पहुंचाया नहीं जाता, बल्कि महिलाओं द्वारा ही बनाया और आगे बढ़ाया जाता है. भारतीय महिलाएं नवाचार करने वाली और समुदाय की नेता हैं.
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.
डॉनल्ड ट्रंप ने मानमर्दन का दौर ला दिया है, उनका तरीका अमेरिका के मित्रों पर खुलकर अशिष्टता के साथ धौंस जमाने वाला रहा है. ट्रंप को मालूम है कि उनमें से कोई भी उनका प्रतिकार नहीं कर सकता.
पश्चिमी लिबरलिज़्म अधिकारों से शुरू होता है और समाज को पीछे की ओर डिज़ाइन करता है. धर्म रिश्तों से शुरू होता है. यह मानता है कि आप ज़िम्मेदारियों के जाल में पैदा हुए हैं, और यह जाल एक तोहफ़ा है.
एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.