एआई हमारी पहले से मौजूद सोच और पक्षपात को और बढ़ा देता है. यह हमें वही कंटेंट दिखाता है जिस पर हम पहले से यकीन करते हैं. यह गुस्से को तेज़ करता है, चरम विचारों को बढ़ावा देता है और संतुलित सोच को पीछे कर देता है.
चीज़े एक रात में नहीं बदलेंगी. 2001-06 का दौर, जब जमात, बीएनपी के नेतृत्व वाली सरकार में गठबंधन सहयोगी थी, भारत-बांग्लादेश रिश्तों के लिए सबसे खराब दौर में से एक था.
नई दिल्ली ट्रंप से इतना डरती है कि वह रूसी तेल की खरीद रोकने के बारे में झूठ नहीं बोल सकती, लेकिन भारतीय नागरिकों के सामने यह बात मानने में भी उसे शर्म आती है, इसलिए मंत्री गोलमोल जवाब देते हैं.
भारत में हम फीस पर तो सीमा लगाते हैं, लेकिन अयोग्यता पर नहीं; बैलेंस शीट को नियंत्रित करते हैं, लेकिन सीखने के नतीजों को नज़रअंदाज़ करते हैं; इरादों की जांच करते हैं, लेकिन औसत दर्जे को सहन करते हैं.
वी. वी. गिरी नेशनल लेबर इंस्टीट्यूट की हाल ही में की गई एक इंडिपेंडेंट परसेप्शन-आधारित स्टडी से यह शुरुआती पता चलता है कि वर्कर और एम्प्लॉयर इसे लागू करने की प्रक्रिया को कैसे देखते हैं.
शायद भारतीय पुरुषों के व्यवहार पर सही तरह से नज़र रखने का एकमात्र तरीका यह है कि हर ट्रिप पर उनकी मां उनके साथ हों. अगर वे किसी अजनबी से मिलना चाहते हैं, तो उन्हें पहले मम्मी से पूछना चाहिए.
जिन भारतीय बच्चों के पास स्मार्टफोन हैं, वे इसका ज़्यादातर इस्तेमाल मनोरंजन के लिए करते हैं—जैसे फिल्में देखना या सोशल मीडिया चलाना—न कि पढ़ाई के लिए. क्या यही ‘डिजिटल इंडिया’ का सही इस्तेमाल है?
लखनऊ, 21 फरवरी (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत...