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Sunday, 22 February, 2026
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हिमंता सरमा की बंदूक वाली तस्वीर: क्या हम अब हिंसा को सामान्य मानने लगे हैं?

एआई हमारी पहले से मौजूद सोच और पक्षपात को और बढ़ा देता है. यह हमें वही कंटेंट दिखाता है जिस पर हम पहले से यकीन करते हैं. यह गुस्से को तेज़ करता है, चरम विचारों को बढ़ावा देता है और संतुलित सोच को पीछे कर देता है.

बांग्लादेश में BNP की जीत: दिल्ली-ढाका के रिश्तों को रीसेट करने का मौका

चीज़े एक रात में नहीं बदलेंगी. 2001-06 का दौर, जब जमात, बीएनपी के नेतृत्व वाली सरकार में गठबंधन सहयोगी थी, भारत-बांग्लादेश रिश्तों के लिए सबसे खराब दौर में से एक था.

भारत-अमेरिका ट्रेड डील एकदम बजट जैसी है. दोनों की तारीफ करने के लिए चापलूसों को मजबूर किया जाता है

नई दिल्ली ट्रंप से इतना डरती है कि वह रूसी तेल की खरीद रोकने के बारे में झूठ नहीं बोल सकती, लेकिन भारतीय नागरिकों के सामने यह बात मानने में भी उसे शर्म आती है, इसलिए मंत्री गोलमोल जवाब देते हैं.

हैदराबाद में रमज़ान के खाने का नया ठिकाना अब सिर्फ ओल्ड सिटी नहीं रहा

हैदराबाद की ओल्ड सिटी में अब कुछ ढीलापन सा आ गया है और वहां बहुत ज्यादा भीड़ रहती है. टोली चौकी अब एक नया और ज्यादा सही विकल्प बनकर सामने आया है.

मुनाफा कमाने वाले मेडिकल कॉलेज ज़रूरी कदम, शिक्षा की असली पहचान उसके नतीजों से

भारत में हम फीस पर तो सीमा लगाते हैं, लेकिन अयोग्यता पर नहीं; बैलेंस शीट को नियंत्रित करते हैं, लेकिन सीखने के नतीजों को नज़रअंदाज़ करते हैं; इरादों की जांच करते हैं, लेकिन औसत दर्जे को सहन करते हैं.

नए लेबर कोड को लेकर मजदूर और मालिक क्या सोचते हैं? स्टडी ने दिए जवाब

वी. वी. गिरी नेशनल लेबर इंस्टीट्यूट की हाल ही में की गई एक इंडिपेंडेंट परसेप्शन-आधारित स्टडी से यह शुरुआती पता चलता है कि वर्कर और एम्प्लॉयर इसे लागू करने की प्रक्रिया को कैसे देखते हैं.

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में बराबरी के फायदे की उम्मीद, ताकत की सच्चाई से दूर

व्यापार समझौतों को आमतौर पर आर्थिक फायदे के आधार पर परखा जाता है, लेकिन यह सिर्फ आर्थिक मामला नहीं होता, खासकर बदलते हुए वैश्विक हालात में.

हरियाणा, यूपी, तमिलनाडु और कर्नाटक के पुरुष गोवा को कैसे बदनाम कर रहे हैं

शायद भारतीय पुरुषों के व्यवहार पर सही तरह से नज़र रखने का एकमात्र तरीका यह है कि हर ट्रिप पर उनकी मां उनके साथ हों. अगर वे किसी अजनबी से मिलना चाहते हैं, तो उन्हें पहले मम्मी से पूछना चाहिए.

RBI फिलहाल रेपो रेट में कटौती नहीं कर रहा है ताकि पहले से लागू नीतियों का पूरा असर देखा जा सके

सिर्फ़ घरेलू हालात ही RBI के 6 फरवरी के फ़ैसले की वजह नहीं हैं. ग्लोबल माहौल भी बहुत ज़रूरी हो गया है.

गाजियाबाद की घटना: सोशल मीडिया बन रहा है नया नशा, भारत की नीति में सख्ती ज़रूरी

जिन भारतीय बच्चों के पास स्मार्टफोन हैं, वे इसका ज़्यादातर इस्तेमाल मनोरंजन के लिए करते हैं—जैसे फिल्में देखना या सोशल मीडिया चलाना—न कि पढ़ाई के लिए. क्या यही ‘डिजिटल इंडिया’ का सही इस्तेमाल है?

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सरकार बताए हमारी एनएसजी सुरक्षा क्‍यों हटाई गई : अखिलेश यादव

लखनऊ, 21 फरवरी (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.