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Friday, 16 January, 2026
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क्या जाति की गिनती भूखे और बेरोज़गार लोगों की गिनती से अधिक महत्वपूर्ण है

जातिगत आरक्षण का उद्देश्य पिछड़ी जातियों को सशक्त करना था जिससे कि समाज में समानता के साथ बंधुत्व का भाव विकसित हो सके.

पाकिस्तान परेशान है कि अनुच्छेद 370 पर विरोध कैसे करे- चुप्पी साधे या मोदी के पोस्टर के आगे हॉर्न बजाए

भारत पर जीत हासिल करने या श्रीनगर में पाकिस्तानी झंडा फहराने के सपने देखने के दिन अब बीत चुके हैं. अब, बस किसी रेड लाइट पर हॉर्न बजाएं और कश्मीर को आजाद करा लें.

जाति, नस्ल, धर्म- भारतीय हॉकी के एकजुट रंगों ने साबित किया कि खेल की तरक्की सबको साथ लेकर चलने में है

ऐसी कोई भारतीय हॉकी टीम बनाना मुश्किल है जो हमारी विविधता, अनेकता में एकता को न प्रतिबिंबित करे और दूसरी टीमों से बेहतर हो. यह साबित करता है कि कोई खेल हो या कोई राष्ट्र, वह तभी तरक्की कर सकता है जब वह सबको साथ लेकर चले.

अपने मन से भय हटाने के साथ अफगानिस्तान के बारे में पांच मिथक जिनसे भारत को उबरना होगा

'साम्राज्यों के कब्रिस्तान' से लेकर महान खेलों के रंगमंच तक, अफगानिस्तान के बारे में कई सदाबहार किस्से प्रचलित हैं.

भारत की आर्थिक वृद्धि की गति RBI को ब्याज दरों में हेरफेर करने से रोकती है

मुद्रास्फीति में नरमी और आर्थिक वृद्धि में तेजी के कुछ शुरुआती संकेत हैं. लेकिन लगता है कि रिजर्व बैंक अभी इन पर नज़र रखने के बाद ही दरों पर कोई फैसला करेगा.

भारत-अमेरिका संबंधों पर अफगानिस्तान या मोदी काल में लोकतंत्र जैसे मुद्दों का बोझ न डालें

अमेरिका का अफगानिस्तान में बने रहना भारत के हित में नहीं है. भारत की असली समस्या पाकिस्तान है, तालिबान नहीं.

फैक्ट बताते हैं कि सामाजिक न्याय की सच्ची पहरेदार भाजपा रही है, उसके विरोधी नहीं

2007 में ही केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम के प्रभाव में आने के बावजूद तत्कालीन यूपीए सरकार ने राज्यों के मेडिकल कालेजों में इसके तहत पिछड़ा वर्ग को आरक्षण के प्रावधानों को लागू नहीं किया.

ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का कांस्य किसी स्वर्ण से कम नहीं, यह एक सकारात्मक राष्ट्रवाद की पदचाप है

भारतीय महिला और पुरुष हॉकी टीम की सफलता 'गरबीली गरीबी' से पैदा हुए हॉकी के पुराने राष्ट्रवाद की याद दिलाती है. पदक का रंग जो भी हो, मुझे फर्क नहीं पड़ता- देश को नए नायक और नायिका मिले हैं .

कैसे हो ‘राष्ट्र प्रथम, सदैव प्रथम’, जब प्रधानमंत्री के ‘अपने’ ही उनकी नहीं सुनते

प्रधानमंत्री को खुद को इस सवाल के सामना करना होगा कि अगर उनकी पार्टी के मुख्यमंत्री और निर्वाचित सरकारें तक ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के उनके विचार के विरुद्ध जाने से बाज नहीं आतीं, तो वे आईपीएस अधिकारियों से यह उम्मीद कैसे कर सकते हैं.

असम ने स्थिरता और विकास के लिए वोट दिया था लेकिन मोदी-शाह की BJP ने अराजकता और टकराव में उलझाया

असम को एक ऐसा नेतृत्व मिला है, जो इस बात में विश्वास रखता है कि अस्थिरता पैदा करना, सामाजिक सदभाव को भंग करना, बहुसंख्यकवादी मुद्दे उठाना और उत्तरपूर्व के दूसरे राज्यों के लिए ‘बिग ब्रदर’ की धौंस दिखाना ही ‘मजबूत’ सरकार की निशानी है.

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चंदौली में स्कार्पियो ने सड़क के किनारे खड़े तीन लोगों को कुचला, एक की मौत

चंदौली (उप्र), 16 जनवरी (भाषा) चंदौली जिले के मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र में पड़ाव चौराहे पर एक तेज रफ्तार स्कार्पियो ने सड़क के किनारे खड़े...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.