दोनों समूह व्यवसाय जगत में नयी मजबूत पहल करने के लिए मशहूर हैं लेकिन दूसरे भी ऐसे हैं. ये दोनों अगर अलग दिखते हैं तो इसलिए कि उनमें अपना वर्चस्व बनाए रखने की भूख है.
क्रिप्टोकरेंसी ने सरकारों का चैन छीन लिया है. कारोबारी या बड़ी हस्तियां जो बिना टैक्स दिये अपना धन पनामा जैसे देशों में भेजते हैं, उनके लिए यह एक सुनहरा अवसर प्रदान करता है.
‘नार्कोटिक्स ड्रग्स ऐंड साइकोट्रोपिक सब्स्टेंसेज एक्ट’ नामक कठोर कानून उन लोगों के हाथ में थमा दिया गया है जो इसका दुरुपयोग कर सकते हैं. आज टीवी के परदे पर इसी खुल्लमखुल्ला दुरुपयोग की कहानी चल रही है.
बाल विवाह रोकथाम अधिनियम, 2006, जब से बना है तब से बाल विवाहों में बहुत गिरावट हुई है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वेक्षण के 2015-16 के सर्वे के अनुसार राजस्थान में बाल विवाह का प्रतिशत 35 फीसद तक घट गया था और देश का 27 फीसदी तक हो गया था.
बसपा मजबूत जनाधार वाली बड़ी ताकत है. 2017 में सबसे खराब प्रदर्शन करने के बावजूद 22.2 फीसदी वोट के साथ वह दूसरे नंबर की पार्टी थी जबकि सपा 21.8 फीसदी वोट लेकर उसके नीचे थी.
धर्म, राष्ट्र, भाषा और जाति के प्रश्न पर गांधी और सावरकर उतने दूर नहीं है, जितना बताया जाता है. इन विषयों पर विरोध की धारा का नेतृत्व डॉ. आंबेडकर करते हैं.
मंदिरों और हिंदू घरों को जिस तरह तोड़ा व जलाया जाता रहा है, इससे फिलहाल तो यही लग रहा है कि बांग्लादेश सरकार हिंसा की ऐसी क्रूर घटनाओं को थामने में कमजोर साबित हो रही है.
मोपा, गोवा से ज़्यादा महाराष्ट्र के लिए काम आता है. साउथ गोवा के MP कैप्टन विरियाटो फर्नांडिस ने कहा, 'मोपा एक इकॉनमी इंजन है, लेकिन वहां आने वाले 75% टूरिस्ट सिंधुदुर्ग जाते हैं.'