एक भारत वह है जिसका प्रतिनिधित्व तमिलनाडु करता है, तो दूसरे का प्रतिनिधित्व बिहार करता है. मानव विकास के संकेतकों के मामले में उन दोनों के बीच बड़ी खाई है जबकि बिजली-पानी के मामले में दोनों एक भारत के हैं.
डोभाल के बयान से ऐसा लगता है कि वे भारत को अभी भी औपनिवेशिक राजशाही मानते हैं, जहां लोगों को प्रजा माना जाता है; कि वह एक लोकतंत्र नहीं है, जहां लोगों को नागरिक माना जाता है.
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान सभा में अपने समापन भाषण में कहा था, ‘आखिरकार, एक मशीन की तरह संविधान भी निर्जीव है. इसमें प्राणों का संचार उन व्यक्तियों द्वारा होता है जो इस पर नियंत्रण करते हैं तथा इसे चलाते हैं.
अब जबकि कृषि कानून वापस ले लिये गए हैं, कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) व्यवस्था कितनी कारगर रही है या नहीं रही इस पर विचार करके एक नयी शुरुआत की जा सकती है
बीजेपी के संगी-साथी, मुक्त बाजार के पैरोकार और पर्यावरण-प्रेम के नाम पर जेहादी तेवर अपना रखने वाले योद्धाओं की फैलायी एमएसपी की कहानी के छह झूठ का पर्दाफाश !
भारत अपनी आर्थिक वृद्धि और राष्ट्रीय सुरक्षा पर मंडराती चुनौतियों का सामना सबसे पहले अपनी आंतरिक एकता को मजबूत करने की अधिकतम कोशिश किए बिना नहीं कर सकता.
बीजेपी ने कृषि कानूनों को वापस लेकर सिखों को ये संदेश दिया है कि बीजेपी को उनकी परवाह है और बीजेपी उनके साथ वह व्यवहार नहीं करती है जो वह मुसलमानों के साथ करती है.
पाकिस्तान अधिकतर मामलों में भारत की बराबरी करे यह न केवल नामुमकिन है, बल्कि वह और पिछड़ता ही जाएगा. उसके नेता अपनी अवाम को अलग-अलग बोतल में सांप का तेल पेश करते रहेंगे.