इस समय जब यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्र खुद को बचाने की गुहार लगा रहे हैं, भारत में तमाम लोग इस बहस में व्यस्त हैं कि पढ़ाई के लिए विदेश जाना उनकी प्राथमिकता क्यों है. आइये जानते हैं कि उनके लिए भारत पसंदीदा ‘जगह’ क्यों नहीं है.
आज का भारतीय युवा मार्क्सवाद को एक अजीब, अतिवादी और गुजरे वक्त की गयी-बीती विचारधारा मानकर चलता है लेकिन सवाल ये है कि इस विचारधारा में जो कुछ बेशकीमती है, उसे हम कैसे हासिल करें?
जब हमला शुरू हुआ, तब दोनों पक्ष अलग-अलग कारणों से हैरान हुए. रूस ने यूक्रेनी शहरों को कमजोर करना शुरू कर दिया है और उन पर किसी भी समय कब्जा कर सकता है.
नवीन शेखरप्पा ज्ञानगोडार की खारकीव में हत्या कर दी गई थी. लेकिन जिस चीज ने उन्हें यूक्रेन जाने के लिए प्रेरित किया, वह NEET था लेकिन ये है पैसे और भारत में सीटों की कमी की कहानी.
2012, 2018 और 2019 में भोपाल और इंदौर में आयुक्त प्रणाली शुरू करने का प्रयास किया गया था, लेकिन आईएएस, एसडीएम और राजस्व अधिकारियों ने परामर्श के बिना अपनी शक्तियों को कम करने पर आपत्ति जताई थी.
मोदी को मालूम है कि यूक्रेन में फंसे छात्रों के वीडियो उनके और उनकी सरकार के बारे में लोगों की धारणा को किस कदर बदल सकती है इसलिए उन्होंने छात्रों को वहां से निकालने के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के प्रयासों को विस्तार देने की पहल की.