महेंद्र सिंह धोनी का ईमानदारी भरा आत्म-मूल्यांकन हमेशा भारतीय क्रिकेट के हितों को अपने स्वयं के लिए कोई 'विरासत' खड़ी करने की किसी भी इच्छा से आगे रखता है.
मधु लिमये के लिए उनकी जन्मशती के वर्ष में सच्ची श्रद्धांजलि यह होगी कि हम संविधान से दसवीं अनुसूची हटा दें और मजाक बन चले इस कानून से ये उम्मीद पालना छोड़ दें कि वह दलबदल को रोक सकता है.
पिछले कुछ हफ्तों में हिंदुत्व समर्थक मीडिया ने विभिन्न खबरों और सामयिक मुद्दों को कैसे कवर किया और उन पर क्या संपादकीय टिप्पणी की, इसी पर दिप्रिंट का राउंड-अप.
सुरक्षा के लिए भाड़े के सैनिकों का इस्तेमाल परोक्ष युद्ध, औपनिवेशिक युग वाली बर्बरता को बुलावा देना है. भारत जैसे लोकतांत्रिक देश को आर्थिक दांव के मद्देनजर इसमें महज तमाशबीन बनकर नहीं रहना चाहिए.
हमने यथासमय निर्णायक होकर यह बात तय नहीं की तो आश्चर्य नहीं कि जल्दी ही हमें मिर्जा गालिब की तरह कहना पड़े: कोई उम्मीदवर नहीं आती, कोई सूरत नजर नहीं आती!
भारत का सामरिक संतुलन पश्चिम पर टिका है और आर्थिक संतुलन चीन की ओर केंद्रित है. लेकिन बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण के लिए इसे और भी बहुत कुछ चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर भारत में जो प्रतिक्रियाएं सामने आईं उनसे तो यही संकेत मिलता है कि यह महज शोरशराबे का देश बन गया है जिसका कोई मतलब नहीं होता.
सेंट्रल वाटर कमीशन का डाटा के मुताबिक औसतन 26 लाख लोग हर साल असम में बाढ़ से प्रभावित होते है. अभी भी ढाई लाख से ज्यादा लोग राहत शिविरों में है. 60 हजार पालतू जानवर इस बाढ़ में बह गए और जंगली जानवरों का अब तक कोई डाटा सामने नहीं आया है.
पश्चिम बंगाल चुनाव में वामपंथी दल और कांग्रेस खुरचन में हिस्सेदारी के लिए होड़ लगा रहे हैं. पूर्वी-मध्य भारत में माओवाद को कब्र में दफन कर दिया गया है, तो केरल में वे सरकार विरोधी दोहरी भावना से जूझ रहे हैं.