ज्ञानवापी मस्जिद पर कानूनी फैसला आने में कुछ साल और लगेंगे इसलिए फिलहाल ऐसा लगता है कि मोदी सरकार और भाजपा इस मसले को ठंडे बस्ते में डालने का मन बना रही है.
ओडिशा से लेकर कर्नाटक तक भाजपा 2019 के बाद से ही अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए संघर्ष कर रही है और इसके सहयोगी इसके विस्तारवादी मंसूबों के प्रति लगातार सावधान होते जा रहे हैं.
ये बहुत दुखद है कि जिस देश में पेड़ों को बचाने के लिए चिपको जैसा महान आंदोलन चला हो, जिस देश में प्रकृति को पूजा जाता हो वहां के लोग अब पर्यावरण को लेकर बहुत उदासीन हो चुके हैं.
आवश्यकता इस बात की है कि बिश्नोई समाज आगे आकर अपनी प्रतिष्ठा हासिल करे और समाज में अपना योगदान दे. वरना उनके प्रतिनिधित्व के नाम पर आपराधिक तत्व ही छाए रहेंगे.
मोदी सरकार की कश्मीर नीति राज्य का स्टेटस बदलने और इस बात का निर्धारण करने में सफल रही है कि किस पर बात होगी और किस पर नहीं लेकिन इससे आतंकवाद का खात्मा हो जाएगा यह खयाली पुलाव है.
ये फिल्म दुश्मन को बड़ा दिखाने के चक्कर में गजनी शहर को रोम वाली भव्यता दे डालती है, जिसमें भव्य महल, हजारों की कैपिसिटी वाले विशाल स्टेडियम और शानदार इमारतें हैं. जबकि अपने सबसे अच्छे दिनों में भी ये एक मामूली सा शहर ही था.