गृह मंत्रालय को अपना पारंपरिक रुख बदल कर रास्ता दिखाना होगा. यह ऐसी शर्त है जो राजनीतिक जिम्मेदारी है. अल्पावधि सेवा का अधिकतम उपयोग करना सेना की जिम्मेदारी है. दोनों को पूरा किया जा सकता है.
संघर्ष के अपने विवरण में एक चीनी सैन्य चैनल ने एक डॉक्युमेंट्री की क्लिप दिखाई, जिसमें चेन शियांग्रॉन्ग को दिखाया गया जो गलवान में मारे गए चार PLA सैनिकों में से एक था.
‘जीवन में कुछ घटित होने का इंतजार करना’ ही अनेक युवा भारतीयों के लिए एक बड़ा काम है. हमारे लिए जरूरी है कि आने वाले समय के लिए अरब स्प्रिंग की परिणति से कुछ सबक सीखे जाएं.
पूरे भारत के लिए,, अयोध्या जैसे धार्मिक मुद्दों पर पहले जब चर्चा की जाती थी तब शालीनता का एक झीना परदा उसके ऊपर रहा करता था मगर अब तो नफरत का खुला प्रदर्शन करने से कोई परहेज नहीं किया जाता है.
इस आंदोलन को सख्ती से कुचलने की बात इस समय कोई नहीं कर रहा है, जबकि इस आंदोलन में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई है. खासकर रेल और अन्य सरकारी संपत्तियों को काफी नुकसान हुआ है.
सरकार कड़वा सच क्यों नहीं बोल सकती, इसे समझना बहुत आसान है. तमाम युद्धों की तरह यह युद्ध भी जब रुक जाएगा तब भी भारत के हित विजेता के साथ भी जुड़े होंगे और हारने वालों के साथ भी.