भारत की आत्मा की सौम्यता, ‘सत्यमेव जयते’ का धैर्य और साहस भी इस नये स्तम्भ में एकसार नहीं ही हो पाए हैं, जबकि किसी भी देश का राष्ट्रीय प्रतीक उसके मूल चरित्र का परिचायक होता है.
क्या किसी को परवाह है कि सुनक यूके के अगले पीएम बनेंगे या नहीं? हम बस इतना जानना चाहते हैं कि सुष्मिता सेन और ललित मोदी की शादी की तारीख क्या है, संगम होगा कि नहीं.
एक ‘मॉडल विकासशील देश’ के तौर पर हिंद महासागर का केंद्रबिंदु बनते जाने के बीच श्रीलंका एक ‘दिवालिया राष्ट्र’ बन गया है जहां सामाजिक-आर्थिक तनाव बेहद गहरा है.
फिलहाल अजेय दिख रही भाजपा क्या यह चाहती है कि देश की करीब 15 फीसदी आबादी को उसकी आस्था के कारण अलग-थलग कर दिया जाए? यह तो भारतीय लोकतंत्र को कमजोर ही करेगा.
आरबीआई ने हाल में विदेशी मुद्रा प्रवाह को आसान करने के लिए रुपये में लेनदेन की व्यवस्था को उदार बनाया है. यह सुविधा श्रीलंका को मुहैया कराई जा सकती है.
खाने-पीने की चीजों के महंगाई, अर्थव्यवस्था के उदारीकरण, बढ़ती मांग महंगाई को बढ़ा रही है मगर केरल, तमिलनाडु जैसे राज्यों में राशन वितरण व्यवस्था कीमतों को नीचे रखने में मदद कर रही है.