प्रधानमंत्री मोदी से अपनी चुनावी ताकत पाने वाली, और आज के चाणक्य माने जा रहे अमित शाह की सीधी देखरेख में चलने वाली भाजपा अब अव्यवस्था की शिकार हुई नज़र आ रही है
उत्तरी आयरलैंड में अमन-चैन की विभाजक रेखा ने दशकों तक कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट को एक-दूसरे से अलग किए रखा, अब वे साथ लाए गए, साबित हुआ कि नफरत कभी भी स्थायी नहीं होती.
सवाल ये है कि ये लोग भारत और भारतीय पासपोर्ट को अलविदा क्यों कह रहे हैं. वह भी तब जबकि भारत अब एक स्थिर राष्ट्र के रूप में शक्ल ले चुका है, आजादी के 75 साल पूरे होने वाले हैं. अमृत काल का महोत्सव चल रहा है.
भविष्य पर नज़र डालने पर सवाल उठता है कि क्या पश्चिमी ताकतें उस देश को बचाना चाहती हैं जिसे अभी भी यूक्रेन कहा जाता है और क्या पश्चिम रूसी खतरे को हमेशा के लिए खत्म करना चाहता है.
धर्माधारित राज्य किसी के नहीं होते. न अपनों के और न बेगानों के. यही कारण है कि अब पाकिस्तान को अपने संस्थापक द्वारा एक गैरमुस्लिम शायर से लिखवाया गया कौमी तराना तक कुबूल नहीं.
भारत और चीन के कोर कमांडरों की ताजा बातचीत यही संकेत देती है कि मामला रणनीतिक और कूटनीतिक गतिरोध में फंसा है, अब दोनों देशों के लिए दो ही रास्ते बचे हैं.
इस बार देवानूर महादेव की प्रसिद्धि की धमक दिल्ली की 'राष्ट्रीय' मीडिया तक पहुंची है, हिंदी के अखबारों तक भी. उनकी छोटी सी कुल 64 पन्नों की पुस्तिका के खूब चर्चा में है.
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.