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Monday, 30 March, 2026
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‘आजादी का अमृत महोत्सव’- भूख, गरीबी, भ्रष्टाचार से कितना आजाद हुए हम

भारत में यह माना जाता रहा कि ऊपर के लोगों का विकास होगा तो रिसकर नीचे तक पहुंचता है. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. आज असमान विकास के नाम पर भारत के सामने जस की तस चुनौती बनी हुई है.

आजादी की जंग अब भी लड़ रहा पाकिस्तान, राजनीतिक थ्रिलर से कहीं ज्यादा नाटकीय है कहानी

आईएमएफ के पंजों में फंसा एक नाकारा लोकतंत्र- यही है पाकिस्तान के 75 साल की कहानी.

उस आजादी के स्वर्ग में, ऐ भगवान, कब होगी मेरे वतन की नई सुबह?

कितना अच्छा होता कि आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में हम अपने प्यारे भारत को उनकी कल्पनाओं का देश बनाने की दिशा में बढ़ते लेकिन जो हालात हैं, उनमें कोई इसका सपना भी भला कैसे देखें?

आज़ादी के 75वें साल किस बात का जश्न? संवैधानिक संस्थाओं के ढहने का या क्रूर होती लोकतांत्रिक सत्ता का

जब भारत 2022 में आजादी के 75 साल पूरे कर रहा है तो यहां एक सवाल सबसे जरूरी हो जाता है कि हमारे लिए आजादी के मायने क्या हैं, क्या इसका मतलब हम लोगों के बीच ठीक तरह से ले जा पाए?

1966 से 2005 तक भारतीय डाक टिकटों परिवार नियोजन का संदेश, डाक विभाग ने कैसे निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

यह याद दिलाती है कि इमरजेंसी में सरकार प्रायोजित जबरन परिवार नियोजन से प्रजनन दर में नहीं के बराबर फर्क. 2022 में तो जबरन कार्यक्रम चलाने की कोई कोशिश मोटे तौर पर बेवजह, क्योंकि दर लगातार घट रही.

लालू यादव के बड़े दिल और नीतीश-तेजस्वी की निडरता से विपक्ष में नया जोश

भाजपा जिस तरह से क्षेत्रीय दलों को अमर्यादित और अनैतिक तरीक़ों से नेस्तनाबूद करने में लगी थी, ऐसे में राजद यह अपनी ज़िम्मेदारी समझता है कि अपनी पूरी ताक़त से बीजेपी का मुक़ाबला करे और क्षेत्रीय पार्टियों को बचाए.

बिजली, स्कूल, सड़कें या अस्पताल- ‘मुफ्त रेवड़ियों’ पर रोक लगाना मोदी के लिए भी आसान क्यों नहीं

बुद्धिमानी तो इसी में है कि पैर उतना ही पसारिए जितनी चादर लंबी है लेकिन भारत में लोग रियायतों के इतने आदी हो चुके हैं कि उन्हें वे उपाय जमते नहीं जिनसे भविष्य में बेहतर नतीजा हासिल होता हो.

राष्ट्रवाद पर मोदी से टक्कर लेने को तैयार केजरीवाल, उन्हें तिरंगा-दर-तिरंगा लोहा लेना पड़ेगा

नरेंद्र मोदी को लेकर अरविंद केजरीवाल ने अपना ‘मौन व्रत’ तोड़ दिया है. राजनीति में आया यह मोड़ बिहार में आए नाटकीय मोड़ जितना ही महत्वपूर्ण है.

6 वजहें: फॉरेस्ट गम्प की रिमेक की जगह, बॉलीवुड फिल्म बनकर क्यों रह गई लाल सिंह चड्ढा

इसके निर्माताओं का दावा है कि ये अमेरिकी फिल्म फॉरेस्ट गम्प (1994) की रिमेक है.

रक्षा मंत्रालय का हिस्ट्री डिवीजन बस तथ्यों-आंकड़ों का संग्रह करे, इतिहास को इतिहासकारों पर छोड़ देना चाहिए

इतिहास बताता है कि सेनाएं अपने युद्धों और अभियानों का ईमानदारी से रेकॉर्ड नहीं रखतीं, और भारतीय सेना भी इस मामले में कोई अपवाद नहीं है.

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लुधियाना में कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष की कुल्हाड़ी से हमला करके हत्या

चंडीगढ़, 29 मार्च (भाषा) पंजाब के लुधियाना जिले में रविवार शाम को दो अज्ञात लोगों ने कुल्हाड़ी से हमला करके एक स्थानीय कांग्रेस नेता...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.