बद्रीनाथ जाने वाले मार्ग पर अलकनंदा नदी के पूर्व में बसे इस गांव का नाम है नानि या छोटी काशी और इसी छोटी काशी का हिस्सा है हाट गांव. यहां मौजूद है आदि शंकराचार्य के समय का लक्ष्मीनारायण मंदिर.
शायद, जनता समझ चुकी है कि युक्तिसंगत जान पड़तीं नीतियां अपने सामान्य ढर्रे पर चलती रहें तो इन नीतियों से उसे बहुत कुछ हाथ नहीं लगने वाला. शायद, लोगों को पता है अभी और यहीं की टेक पर वह जितना हथिया सकें, बस उतना ही भर उसे मिल सकता है.
जब नेतागण लोगों की निजी स्वाधीनता का सम्मान न कर रहे हों और गिरफ्तारी के मनमाने आदेश दे रहे हों, तब यह उम्मीद करना बेकार ही है कि पुलिसवाले और अफसर लोग उनके नक्शेकदम पर नहीं चलेंगे.
नारैल के साहापाड़ा में हिंदुओं के घर और कारोबार जलाकर भीड़ ने दिए संकेत. इससे पता चलता है कि सांप्रदायिकता का मुकाबला करने में नाकाम रहने वाली राजनीति का हश्र क्या होता है.
कुछ और ऐसी चीजें भी हैं जो कलाम कतई नहीं थे, वह क्षुद्र मानसिकता वाले, निंदक, स्वार्थी, प्रतिशोधी, सिद्धांतहीन, अहंकारी नहीं थे. यही वजह है कि एक अरब से अधिक लोग दशकों से उन्हें अपने सबसे प्रिय नेता के तौर पर याद करते हैं.
गुजरात के निर्विवाद बादशाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने गढ़ पर जबरदस्त दबदबा रखते हैं; मगर अरविंद केजरीवाल ने उनके गढ़ में घुसपैठ करने की कोशिश करके उन्हें परेशान कर दिया है.
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.