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Wednesday, 11 March, 2026
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दुनिया की बड़ी आर्थिक ताकतें अस्थिरता बढ़ा रही हैं, भारत संतुलन बनाए रखने के लिए क्या करे

दुनिया के वित्तीय, रणनीतिक, आर्थिक केंद्र बने अमेरिका, चीन, यूरोप आज चुनौतियों से रू-ब-रू हैं, ऐसे में उन सुर्खियों से आगे देखने की जरूरत है, जो संरचनात्मक दरारों और अराजकता पर ज़ोर दे रही हैं.

हिजाब समर्थक SC में लड़ाई जीत भी जाएं तो भी हारेंगे, क्योंकि असली संघर्ष राजनीति के मैदान में है

बेहद ध्रुवीकृत समय में, हाशिये पर धकेले गए अल्पसंख्यक पीछे मुड़कर अपनी उन जड़ों और बुनियादों को बचाने में जुट जाते जो उन्हें बहुत प्रिय होते हैं लेकिन राजनीतिक दृष्टि से यह एक खतरनाक जाल बुन सकता है.

मोहन भागवत ही नहीं, उससे पहले गोलवलकर भी मिल चुके हैं मुस्लिम नेताओं से

पहली बार कोई आरएसएस प्रमुख मुस्लिम समुदाय के नेताओं से नहीं मिले है. संघ के दूसरे सरसंघचालक एम.एस. गोलवलकर 1961 में मुस्लिम नेताओं से मिले थे.

नए CDS को बहुत कुछ करना है लेकिन पहले तो उसे फास्ट ट्रैक करना होगा जो जनरल रावत ने शुरू किया था

नरेंद्र मोदी सरकार ने जनरल अनिल चौहान को दूसरा सीडीएस नियुक्त करने में नौ महीने लगाए, इससे जाहिर है कि उसे उनमें पूरा विश्वास और भरोसा है

मोदी ने गुजरात को एक सपना दिखाया था, अब केजरीवाल वहां एक सपना बेच रहे हैं

बीजेपी के ‘एक टक’ (एक मौका) अभियान ने गुजरात में उसे 25 साल तक शासन में बनाए रखा, अब आप का मौका ‘एक मोको केजरीवालने’ कहने का है.

सिकुड़ता विदेशी मुद्रा भंडार फिलहाल खतरे की घंटी नहीं, मगर RBI को संभलकर चलना होगा

अमेरिकी फेडरल बैंक दरें बढ़ा रहा है, तो रिजर्व बैंक को भी रुपये में गिरावट और विदेशी मुद्रा के भंडार को सिकुड़ने से रोकने के लिए दरें बढ़ानी पड़ेंगी लेकिन इससे आर्थिक वृद्धि की रफ्तार थम सकती है.

शिक्षा के मामले में इलीट किला टूटा, बड़ी संख्या में विदेश जा रहे हैं दलित छात्र

पढ़ने के लिए विदेश जाना भारत में कोई नई बात नहीं है. नई बात है वंचित जातियों की इस क्षेत्र में जगी रुचि.

सीमा विवाद, सेना में सुधारों को भूलकर मोदी सरकार उसे अतीत के काल्पनिक प्रेतों से मुक्त कराने में जुटी है

सेना सरकार के ‘वस्तुनिष्ठ नियंत्रण’ में है, जो उसे हमेशा स्वायत्तता देती रही है लेकिन या तो सेना ने सरकार को ‘औपनिवेशिक’ प्रतीकों के मामले में तार्किक सलाह नहीं दी या वह अपनी मर्जी से उसकी राजनीतिक विचारधारा से जुड़ गई.

सोनिया गांधी अभी भी समझ नहीं पाईं हैं कि भारत में सत्ता के मायने बदल गए हैं

सोनिया गांधी का एकमात्र 'गुनाह' उनका यह सोचना रहा है कि कोई भी कांग्रेसी नेता पार्टी के अध्यक्ष पद को मुख्यमंत्री की उसकी कुर्सी के ऊपर तरजीह देगा.

काश ‘कांग्रेस को मर जाना चाहिए’ याद रखने वाले पढ़ भी लेते कि मैंने यह क्यों कहा था, तो वे आज हैरान न होते

इतिहास के इस मुकाम पर हम अपने आपस के झगड़ों में उलझे नहीं रह सकते. पॉल सैम्युल्सन की तर्ज पर मैं भी सबसे पूछना चाहता हूं, ' जब स्थिति बदलती है तो मैं अपना आकलन बदल लेता हूं लेकिन आप क्या करते हैं, जनाब?'

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पश्चिमी एशिया में स्थिति के मद्देनजर विमानन कंपनियां परिचालन संबंधी व्यवस्थाएं कर रही हैं : मंत्रालय

मुंबई, 10 मार्च (भाषा) नागर विमानन मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशिया में बदलते घटनाक्रम और भारत व इस क्षेत्र के बीच...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.