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Friday, 24 May, 2024
होममत-विमत40 साल मामूली प्रदर्शन के बाद अर्थव्यवस्था 2023 में ठोस वृद्धि दिखाने को तैयार

40 साल मामूली प्रदर्शन के बाद अर्थव्यवस्था 2023 में ठोस वृद्धि दिखाने को तैयार

पिछले चार दशकों में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 16 गुना वृद्धि की और अब वृद्धि के आंकड़े भले कम आकर्षक लग रहे हों मगर आईएमएफ के मुताबिक भविष्य चमकदार है.

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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोश (आईएमएफ) ने कई देशों की आर्थिक स्थिति के बारे में ताजा आंकड़े जारी किए हैं. ये आंकड़े 1980 तक के हैं, जब उसने अपनी पहली विश्व आर्थिक दिशा की रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें हर एक देश के आंकड़े दिए गए थे.

अमेरिकी डॉलर के चालू मूल्य के हिसाब से तुलनात्मक आर्थिक वृद्धि पर नज़र डालने पर पता चलता है कि 2011-21 के दशक में चार देशों ने सर्वोत्तम प्रदर्शन किया— क्रमानुसार बांग्लादेश, चीन, वियतनाम और भारत. (भारत के लिए 2021 का अर्थ है वित्त वर्ष 2021-22, पिछला पूर्ण वर्ष). इनमें से केवल दो देशों ने ही इससे पिछले दशक में टॉप कामकाज किया था. चीन सबसे आगे रहा, तो वियतनाम और तुर्की पांचवें नंबर पर रहे.

याद रहे कि इस अवधि (2001-11) में भारत का कामकाज दशकों के लिहाज से अब तक का सबसे उत्तम था. लेकिन जैसा कि शायद ही कबूल किया जाता है, इस अवधि में देश की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार सभी उभरते बाज़ारों और विकासशील देशों (ईएम) यानी उस गुट के औसत से थोड़ी धीमी रही जिसमें कोई 40 ‘विकसित’ देशों को छोड़ सारे देश शामिल हैं.

जब अधिकतर देश असामान्य रूप से अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे तब भारत भी ऐसा ही कर रहा था. 1991-2001 और 1981-91 के दशकों में भारत ने ईएम देशों के कुल प्रदर्शन के मुक़ाबले औसत से कुछ बेहतर या बहुत थोड़ा बुरा प्रदर्शन किया.


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ये सब आर्थिक वृद्धि के पक्के आंकड़े नहीं, तुलनात्मक रैंकिंग हैं. इसलिए, भारत ने ईएम देशों के मुक़ाबले 2001-11 में नहीं बल्कि 2011-21 में बेहतर प्रदर्शन किया तो इसमें कोई विसंगति नहीं है क्योंकि पिछले दशक में भारत इससे पिछले दशक के मुक़ाबले सुस्त पड़ा था. इसकी रैंक में बेहतरी विश्व अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार को उजागर करता है. डॉलर की चालू कीमत के हिसाब से भारतीय अर्थव्यवस्था में 2001-11 में 3.7 गुना वृद्धि हुई लेकिन पिछले दशक में केवल 1.7 गुना वृद्धि हुई.

अब आगे तुलनात्मक प्रदर्शन बेहतर रहने वाला है. 2022 के लिए (भारत के लिए 2022-23) अर्थव्यवस्था 6.8 फीसदी की दर से बढ़ सकती है जबकि सभी ईएम देश केवल 3.7 फीसदी की दर से वृद्धि दर्ज कर सकते हैं. 3 प्रतिशत-अंक का यह अंतर शायद ही कभी हासिल किया गया है. और उम्मीद है की 2023 में यह अच्छा-खासा (2.4 प्रतिशत-अंक) रह सकता है.

यह लगभग तय है क्योंकि चीन में भारी सुस्ती सभी ईएम देशों के अनुमानित औसत को नीचे गिरा सकता है. इस बीच, विकसित अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि दर इस साल 2.4 प्रतिशत से गिरकर अगले साल 1.1 फीसदी हो सकती है. आईएमएफ साफ कह तो नहीं रहा है मगर ‘विच्छेद’ के संकेत दे रहा है. ऐसा अगर आंशिक रूप से भी होता है तो भारत की वृद्धि के आंकड़े 2022, 2023 में कम आकर्षक दिख सकते हैं. उसकी मौजूदा स्थिति अंधेरे में एक किरण के समान है जो कुछ समय के लिए बनी रह सकती है.

चूंकि वियतनाम और बांग्लादेश (तेल से अमीर सऊदी अरब को छोड़ कर) भारत के साथ चल रहे हैं इसलिए यह कहा जा सकता है कि देर से आए गरीब देश वही दोहरा रहे हैं जो पिछले दशकों में पूर्वी एशियाई देशों ने कर दिखाया था, जिनमें से कुछ (दक्षिण कोरिया और ताइवान) ने 1981 से पहले शुरुआत की थी.

इस तरह की व्याख्या लागू रह सकती है, भले ही वियतनाम की प्रति व्यक्ति आय का आंकड़ा भारत के इस आंकड़े से 60 फीसदी ज्यादा है और फिलीपींस (मूल आसियान-5 के देशों में सबसे गरीब) इस आंकड़े से भी बड़ा है. जैसा कि होता है, फिलीपींस का नाम 2022 के लिए टॉप तीन से ठीक नीचे है. सभी चारों देश अंतरराष्ट्रीय व्यवसायों में आगे बढ़ने वालों में रहे हैं और तथाकथित ‘चाइना+1’ के तहत अपने उत्पादन का आधार चीन से हटा लेना चाहते हैं.

चारों दशकों (198-2021) को साथ ले लें तो आईएमएफ के आंकड़े बताते हैं कि केवल तीन देशों ने भारत से बेहतर प्रदर्शन किया. चीन अपने आप में एक वर्ग था, और अपनी अर्थव्यवस्था को 62 गुना बढ़ा रहा था (डॉलर के निश्चित नहीं बल्कि चालू मूल्य के हिसाब से). इसके बाद दक्षिण कोरिया था, जिसने 25 गुना वृद्धि की, और इसके बाद वियतनाम था.
भारत इसके बाद के देशों में शुमार था. मिस्र, श्रीलंका, बांग्लादेश, ताइवान के साथ उसने 16 गुना वृद्धि की, जबकि थाईलैंड और मलेशिया भी बहुत पीछे नहीं रहे. यानी यह असाधारण नहीं, तो प्रशंसनीय रेकॉर्ड है.

बहरहाल, विश्व की जीडीपी में भारत का योगदान 1981-91 में 1.7 फीसदी से घटकर 1.1 फीसदी हुआ लेकिन 2011 में बढ़कर 2.5 फीसदी हो गया और 2021 में 3.3 फीसदी हुआ. यह आंकड़ा और ऊपर जा सकता है.

(इस लेख को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

(बिजनेस स्टैंडर्ड के विशेष व्यवस्था द्वारा)


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