छात्रों के आंदोलन से निकली नेशनल सिटिज़न्स पार्टी अब पूरी तरह कलंकित हो चुकी है. उसने अब बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामवादी पार्टी जमात-ए-इस्लामी से हाथ मिला लिया है.
वही पुराना पैटर्न है: सनसनीखेज लीक से उन्मादी कवरेज होती है, मामले अदालत में गिर जाते हैं, लेकिन जनता की अदालत में आरोपियों को पहले ही दोषी ठहरा दिया जाता है.
हिंसा करने वाले लोग पुलिस से नहीं डरते. उन्हें पता है कि वे दूसरों को परेशान कर सकते हैं, दुकानों पर हमला कर सकते हैं या यहां तक कि हत्या भी कर सकते हैं और पकड़े नहीं जाएंगे.
हिंदुओं की हालत पर आरएसएस और भाजपा के इस मौन की तुलना डॉ. हेडगेवार की चिंताओं, वक्तव्यों से करें. तब साफ दिखाई पड़ेगा कि आरएसएस केवल अपने लाभ-हानि के हिसाब में डूबा रहा है.
ड्रोन आतंकवाद से निपटने की भारत की चुनौती सिर्फ तकनीक की नहीं, बल्कि सोच और संस्थाओं की भी है. असली समस्या यह है कि इसे हवाई सुरक्षा के लिए एक पूरी और गंभीर चुनौती के रूप में अब तक ठीक से पहचाना नहीं गया है.
रूस की क्रांति से भारत की राजनीति तक, कम्युनिज्म ने शोषण-मुक्त समाज का सपना दिखाया. सौ साल बाद वही विचारधारा क्यों बौद्धिक म्यूजियम की वस्तु बन चुकी है.
इस साल मैंने नेशनल इंट्रेस्ट में जो लेख लिखे उनमें आपमें से कई को कुछ-न-कुछ गलत ज़रूर लगा होगा. मैं आपसे असहमत हो सकता हूं, लेकिन कुछ के लिए अपनी गलती कबूल करनी चाहिए. इस हफ्ते मैं उनमें से जो सबसे ताज़ा है उसकी बात करूंगा.
दिल्ली हाई कोर्ट ने न तो रेप पर सवाल उठाए और न ही उन अपराधों में कुलदीप सेंगर की दोषिता पर, जिनके लिए उसे सज़ा मिली है—इस वजह से उसकी सज़ा को निलंबित किया जाना और भी डरावना लगता है.
BCCI के फैसले ने हिंदू राइट के कट्टरपंथी गुट को नई जान दे दी है. अब उनमें इतना आत्मविश्वास आ गया है कि वे अपने सांप्रदायिक अभियानों के हिसाब से पॉलिसी में बदलाव करवा सकें.