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Wednesday, 7 January, 2026
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छात्र आंदोलन से जमात तक, बांग्लादेश में इस्लामवादी कैसे बने हीरो

छात्रों के आंदोलन से निकली नेशनल सिटिज़न्स पार्टी अब पूरी तरह कलंकित हो चुकी है. उसने अब बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामवादी पार्टी जमात-ए-इस्लामी से हाथ मिला लिया है.

बोफोर्स से नेशनल हेराल्ड तक—भारतीय ‘घोटाले’ अदालत में ढह गए, लेकिन फायदा हमेशा BJP को मिला

वही पुराना पैटर्न है: सनसनीखेज लीक से उन्मादी कवरेज होती है, मामले अदालत में गिर जाते हैं, लेकिन जनता की अदालत में आरोपियों को पहले ही दोषी ठहरा दिया जाता है.

देहरादून, बरेली से तमिलनाडु तक हिंसा—भारतीय गुस्सैल हो रहे हैं, राजनीति को हर बार दोष देना काफी नहीं

हिंसा करने वाले लोग पुलिस से नहीं डरते. उन्हें पता है कि वे दूसरों को परेशान कर सकते हैं, दुकानों पर हमला कर सकते हैं या यहां तक कि हत्या भी कर सकते हैं और पकड़े नहीं जाएंगे.

हेडगेवार का संघ और आज का RSS: सौ साल में मकसद से कितना भटका संगठन

हिंदुओं की हालत पर आरएसएस और भाजपा के इस मौन की तुलना डॉ. हेडगेवार की चिंताओं, वक्तव्यों से करें. तब साफ दिखाई पड़ेगा कि आरएसएस केवल अपने लाभ-हानि के हिसाब में डूबा रहा है.

2026 में पांच चुनाव—और पांच बातें, जिन पर नतीजे BJP और विपक्ष की राजनीति बदल देंगे

2026 के विधानसभा चुनाव बीजेपी के हिंदुत्व एजेंडे की पहुंच और उसकी सीमाओं की परीक्षा होंगे.

भारत ड्रोन आतंकवाद के लिए तैयार नहीं है, यह छद्म युद्ध का अहम हथियार बन चुका है

ड्रोन आतंकवाद से निपटने की भारत की चुनौती सिर्फ तकनीक की नहीं, बल्कि सोच और संस्थाओं की भी है. असली समस्या यह है कि इसे हवाई सुरक्षा के लिए एक पूरी और गंभीर चुनौती के रूप में अब तक ठीक से पहचाना नहीं गया है.

1917 से 2025 तक: भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन क्यों गिन रहा है अंतिम सांसें

रूस की क्रांति से भारत की राजनीति तक, कम्युनिज्म ने शोषण-मुक्त समाज का सपना दिखाया. सौ साल बाद वही विचारधारा क्यों बौद्धिक म्यूजियम की वस्तु बन चुकी है.

बांग्लादेश की राजनीति में तारीक रहमान का अंधेरा अतीत रहा है, पहले उन्हें अपनी छवि सुधारनी होगी

आज बीएनपी के सामने एक बड़ी चुनौती उसके पूर्व सहयोगी बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी का उभार है. फरवरी 2026 के चुनावों में दोनों पार्टियां आमने-सामने होंगी.

साल के अंत में राष्ट्रीय हित का कबूलनामा: फौज–इस्लाम का मेल लोकतंत्र को खत्म नहीं करता

इस साल मैंने नेशनल इंट्रेस्ट में जो लेख लिखे उनमें आपमें से कई को कुछ-न-कुछ गलत ज़रूर लगा होगा. मैं आपसे असहमत हो सकता हूं, लेकिन कुछ के लिए अपनी गलती कबूल करनी चाहिए. इस हफ्ते मैं उनमें से जो सबसे ताज़ा है उसकी बात करूंगा.

क्या उन्नाव केस में न्याय फिर 2018 वाली पटरी पर लौट गया? सेंगर के लिए ‘अधिकार’, पीड़िता के लिए ‘काल’

दिल्ली हाई कोर्ट ने न तो रेप पर सवाल उठाए और न ही उन अपराधों में कुलदीप सेंगर की दोषिता पर, जिनके लिए उसे सज़ा मिली है—इस वजह से उसकी सज़ा को निलंबित किया जाना और भी डरावना लगता है.

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BCCI ने बांग्लादेश को लेकर भारत के रवैये को नुकसान पहुंचाया

BCCI के फैसले ने हिंदू राइट के कट्टरपंथी गुट को नई जान दे दी है. अब उनमें इतना आत्मविश्वास आ गया है कि वे अपने सांप्रदायिक अभियानों के हिसाब से पॉलिसी में बदलाव करवा सकें.

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हम जेएनयू में शरजील इमाम की ‘औलादों’ के इरादों को कुचल देंगे- फडणवीस

नागपुर, छह जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा कि जेएनयू में पैदा हुईं शरजील इमाम की 'औलादों' के इरादों...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.