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Sunday, 12 April, 2026
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इस ‘किसी की भी नहीं’ वाली ईरान की जंग की कीमत क्या है? नैतिकता

महाभारत में विदुर कहते हैं कि बड़े हित के लिए त्याग ज़रूरी है. इससे सवाल उठता है: ईरान की जंग में ‘बड़ा हित’ क्या है?

ममता बनर्जी बनाम शक्तिशाली सिस्टम: असल में बंगाल चुनाव इसी बारे में है

मुख्यधारा मीडिया में लगातार, लगभग एक जैसा नैरेटिव दिखाया जाता है: बंगाल ‘कानूनहीन’, बंगाल ‘हिंसक’, बंगाल ‘अस्थिर’. हर घटना को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है.

अल्पसंख्यक फिर से UDF के साथ खड़े हैं: क्या इससे केरल में LDF की जीत का सिलसिला टूट जाएगा

कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा झटका 2005 में के. करुणाकरण और उनके गुट का पार्टी से अलग होना था. उनके कई पुराने कार्यकर्ता आगे चलकर BJP के सिपाही बन गए.

मनमोहन सिंह के समय नक्सलवाद गिरावट पर था, सुदृढ़ीकरण के दौर में आई मोदी सरकार

2005 में UPA सरकार के दौरान छत्तीसगढ़ में सलवा जुडूम शुरू हुआ, आदिवासी युवाओं को हथियार देकर अपने ही लोगों के खिलाफ लड़ाई में उतारा गया.

जातिवाद भारतीय शहरों से खत्म नहीं हुआ है, बस उसने अंग्रेज़ी सीख ली है

शहरी भारत आज जातिवाद खत्म होने के दौर में नहीं है, बल्कि ऐसा दौर है जहां लोग जातिवाद मानना नहीं चाहते. वे ऊंच-नीच के फायदे तो चाहते हैं, लेकिन इसे मानने में शर्म महसूस करते हैं.

भारतीय इंडस्ट्री एनर्जी सेक्टर में ताकतवर बने और भारत के निर्माण का नेतृत्व करे

LNG को अपनाने से ही भारत को एनर्जी सुरक्षा नहीं हासिल हो जाएगी. इसके साथ रसोई, औद्योगिक क्रियाओं, और परिवहन में बिजली के उपयोग को बढ़ाना भी जरूरी होगा.

स्पेक्ट्रम जंग का बड़ा हथियार है, उसे वायरल वीडियो के लिए नीलाम न करें

हमारे सामने असली विकल्प सीधा-सा है: क्या हम यह चाहते हैं कि जब सबसे ज्यादा ज़रूरी हो तब हमारे सैनिक बैंडविड्थ के लिए वायरल वीडियो से मुकाबला करें?

चीन ने खुद को ऊर्जा संकट से सुरक्षित कर लिया है. भारत सिर्फ ‘बातें करता है, काम नहीं’

चीन ने कोयले से गैस बनाने में पूंजी, हुनर और टेक्नोलॉजी का धैर्य के साथ निवेश किया. हम कथनी को करनी में बदलने में हमेशा पीछे रहते हैं. कच्चे तेल की कीमत गिरते ही हमारा जोश ठंडा पड़ जाता है.

भारत की तेल और गैस से जुड़ी कमज़ोरी डीजल ट्रकों पर टिकी है

डीजल से धीरे-धीरे दूर जाने की प्रक्रिया भारत की रिफाइनरी की अर्थव्यवस्था को जटिल बना सकती है क्योंकि 2032 तक पेट्रोल की मांग अपने उच्च स्तर पर पहुंचकर उसके बाद घटने लगेगी.

आसिया अंद्राबी महिलाओं के अधिकारों की पैरोकार नहीं, वह भारतीय मुसलमानों की आवाज़ भी नहीं

अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा आसिया अंद्राबी को महिलाओं के अधिकारों की रक्षक बताना दिखाता है कि कैसे नैरेटिव बनाए जाते हैं और क्या चीज़ें छोड़ दी जाती हैं.

मत-विमत

दुनिया तेजी से बदल रही है—भारत को खुद को सुधारना, मजबूत करना और आर्थिक ताकत बढ़ानी चाहिए

आज निरंतर बदलती विश्व व्यवस्था भारत के लिए एक मौका उपलब्ध करा रही है जिसका लाभ उठाने के लिए उसे खुद को अनुशासित रखना होगा ताकि पाकिस्तान जब अपने लिए मौका देख रहा है तब हम हड़बड़ी में कोई प्रतिक्रिया न कर बैठें.

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राजनीति

देश

ज्योतिबा फुले की द्विशताब्दी: दो साल का राष्ट्रव्यापी समारोह शुरू हुआ

नयी दिल्ली, 11 अप्रैल (भाषा) सरकार ने शनिवार को समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.