भारत को ‘नेशनल चैंपियनों’ का बड़ा आधार चाहिए. जनता के पैसे को इस तरह निवेश करने की गुंजाइश कम है कि वित्तीय गणित गंभीर रूप से गड़बड़ न हो. जाहिर है, कुछ योजनाओं पर पुनर्विचार ही करना पड़ सकता है.
सशस्त्र बलों और रेलवे के बाद वक्फ बोर्ड भारत में तीसरे सबसे बड़े जमींदार हैं. लेकिन भारत का मुस्लिम समुदाय अभी भी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है.
इस नीति के आलोचक इसे बेहद सख्त और क्रूर मान रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी संस्था ने इस नीति की आलोचना की है, वहीं इस नीति के ब्रिटेन में समर्थक और विरोधी दोनों हैं.
मोदी सरकार एक ओर पश्चिम विरोधी और रूस समर्थक जनमत के निर्माण को प्रोत्साहित करती रही है, तो दूसरी ओर अपनी रणनीति इसके बिलकुल उलटी दिशा में निर्धारित करती रही है. ऐसे विरोधाभास चल नहीं सकते.
जो लोग भाजपा को वोट देते हैं वे इसका समर्थन करते हैं क्योंकि वे नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हैं. स्वतंत्रता संग्राम में जो कुछ भी हुआ, उसके कारण कोई भी भाजपा को वोट नहीं देता.
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.