बढ़ती सैन्य और आर्थिक ताकत के कारण भारत अपनी विदेश नीति पर अडिग रह सकता है, रूस से तेल खरीदते हुए पश्चिम की अनदेखी कर सकता है और अंतरराष्ट्रीय क्लबों में जगह बना सकता है.
इस समझौते के शर्तों के तहत ईरान अपने अधिकांश परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करने पर सहमत हुआ था और इसके बदले उसे आर्थिक प्रतिबंध से राहत देने का वादा किया गया था.
भारत में मुसलमानों के प्रति बरताव के मामले में मोदी पर अंगुली उठाकर ओबामा ने इस बहस में हस्तक्षेप किया. लेकिन तानाशाहों से हेलमेल रखते रहे अमेरिका का कोई राष्ट्रपति दूसरों को किस मुंह से उपदेश दे सकते हैं?
विदेश नीति और भारत के दूसरे देशों के साथ संबंधों को आम तौर पर पार्टी-पॉलिटिक्स से ऊपर होना चाहिए. लेकिन भारत की राजनीति फिलहाल जहां पहुंच गई है, वहां साझा राष्ट्रीय हित के सवालों पर भी आम सहमति नजर नहीं आती.
IAMC जैसे लोगों द्वारा प्रचारित आख्यान अक्सर चुनिंदा कहानियों पर निर्भर करते हैं, और यह चिंता का विषय है कि पश्चिमी मीडिया जमीनी हकीकत को जाने बिना उन्हें स्वीकार कर लेता है.
समान नागरिक संहिता के प्रस्ताव को फिर से लाने के पीछे बीजेपी का मकसद विपक्ष को अल्पसंख्यक समुदाय के रूढ़िपरस्त नेतृत्व के साथ दिखाना है और विपक्ष है कि इस जाल में फंसता जा रहा है.
जब मोदी और जो बाइडेन लोकतंत्र के और वैश्विक स्थिरता के नेता के रूप में एक-दूसरे की सराहना करेंगे, तो वे अर्थ और सार से रहित सुने-सुनाए औपचारिक वाक्यों को दोहरा रहे होंगे.
केजरीवाल विपक्षी पार्टियों की बैठक के लिए पटना पहुंच तो गए है और मान लीजिए कुछ सहमति भी बन जाती है तो भी कांग्रेस के लिए 'आप' के साथ गठबंधन करना काफी मुश्किल होगा.
हालांकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के साथ बैठक के दौरान एक समझौतावादी स्वर में बात किया, लेकिन यह स्पष्ट है कि वह अपनी शर्तों पर एक युद्धविराम चाहते हैं.
बालेंद्र शाह की लोकप्रियता के बावजूद, यह संभावना ज्यादा है कि आरएसपी को साफ बहुमत न मिले, लेकिन नेपाली कांग्रेस को अपने सात दशक पुराने वोटर आधार का फायदा मिल सकता है.