यह कहना एक आलसी सरलीकरण होगा कि भारतीय राजनीति भाजपा-प्रेमी उत्तर भारत, और भाजपा- विरोधी दक्षिण में बंट चुकी है. 2024 का मुक़ाबला भाजपाई ‘हार्टलैंड’ बनाम परिधि वाले राज्यों का होगा.
आज बुद्धिजीवी लगातार हिंदू प्रधान भारत में हाशिये पर पड़े मुसलमानों की मार्मिक कहानियों की खोज में लगे हुए हैं. एक पसमांदा मुस्लिम के रूप में मेरा नज़रिया प्रमुख कहानी से काफी अलग है.
जब तक COP28 जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन भारत द्वारा प्रस्तुत वैश्विक दृष्टिकोण को मान्यता नहीं देता, सार्वभौमिक समाधान और आम सहमति प्राप्त करना कठिन होगा.
आज कांग्रेस के पास कोई स्वाभाविक सहयोगी नहीं है, केवल दुश्मन हैं. लेकिन विपक्षी नेताओं के इंडिया एलायंस के तहत फिर से एकजुट होने के बाद भी, यह 2024 में बीजेपी को चुनौती देने के लिए पर्याप्त नहीं होगा.
एकबार फिर कांग्रेस अपना जनाधार बढ़ाने में नाकामयाब रही है जबकि भाजपा ने इसे बड़ी ही सफलता से निभाया है. हिंदुत्व का मुद्दा इसबार लगभग गायब ही रहा; भाजपा से सीधे मुक़ाबले के लिए कांग्रेस अभी भी तैयार नहीं.
अगर पर्याप्त राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई जाती तो 1000 वर्गकिमी पर पुरानी स्थिति 2020 में ही बहाल की जा सकती थी. इसकी जगह हमने विफलताओं को ढकने के लिए राजनीतिक तथा सैन्य निष्क्रियता देखी.
भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि की रफ्तार के मुक़ाबले दोगुनी रफ्तार से वृद्धि कर रही है, वैसे सांख्यिकीय व्यवस्था और डाटा बेस के साथ दीर्घकालिक समस्याएं कायम हैं.
मुंबई, तीन मार्च (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले और पार्टी के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने मंगलवार को...